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बुजुर्गों को भले ही यह आलस्य लगे, लेकिन थेरेप्यूटिक लेजीनेस को नई जनरेशन 'सेल्फ लव' मानती है। उनकी प्राथमिकता खुद का आराम होता है। इसमें वे किसी प्रकार का संकोच या शर्म महसूस नहीं करते हैं।
Therapeutic Laziness Trend: क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें बेड पर लेटे रहना बहुत अच्छा लगता है। बिना कुछ किए खुद के साथ समय बिताना आपका फेवरेट काम है। ऐसे में हो सकता है कि आप ‘थेरेप्यूटिक लेजीनेस’ को फॉलो करते हैं। थेरेप्यूटिक लेजीनेस को नए जनरेशन का ट्रेंड माना जाता है। आइए आज जानते हैं क्या है थेरेप्यूटिक लेजीनेस, जिसे हर यूथ पसंद करता है।
थेरेप्यूटिक लेजीनेस को पहचानें

अगर आपको छुट्टी के दिन कहीं घूमने की जगह अपने बिस्तर पर लेटे रहना पसंद है। आउटिंग से अच्छा आपको आराम लगता है। तो हो सकता है कि आप थेरेप्यूटिक लेजीनेस को पसंद करते हैं। इसे चिकित्सकीय आलस्य कहते हैं। थेरेप्यूटिक लेजीनेस में लोग बिना कुछ काम किए लंबे समय तक जानबूझकर आराम करते हैं। यूथ इसे बर्नआउट और तनाव दूर करने का सबसे आसान और सटीक तरीका मानते हैं। इस लेजीनेस को अपनाने वाले लोग खुद की देखभाल और नींद पर पूरा फोकस करते हैं।
खुद को देते हैं प्राथमिकता
बुजुर्गों को भले ही यह आलस्य लगे, लेकिन थेरेप्यूटिक लेजीनेस को नई जनरेशन ‘सेल्फ लव’ मानती है। उनकी प्राथमिकता खुद का आराम होता है। इसमें वे किसी प्रकार का संकोच या शर्म महसूस नहीं करते हैं। एक समय था जब लोग खुद को रिलैक्स करने के लिए एक्सरसाइज, मेडिटेशन और स्पा का सहारा लेते थे। लेकिन थेरेप्यूटिक लेजीनेस वाले लोग सिर्फ आराम करना चाहते हैं। उनका मानना है कि इससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से रीसेट होते हैं।
ये कहते हैं मनोचिकित्सक
मनोचिकित्सक मानते हैं कि थेरेप्यूटिक लेजीनेस में कोई बुराई नहीं है। क्योंकि इससे सच में आप तनाव और बर्नआउट की स्थिति को दूर कर सकते हैं। इससे तंत्रिका तंत्र को आराम मिलता है। शरीर में तनाव का हार्मोन कोर्टिसोल कंट्रोल रहता है। नींद की गुणवत्ता सुधरती है। इतना ही नहीं शरीर में एनर्जी बनी रहती है। यह लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।
बढ़ती है मानसिक रचनात्मकता
मनोचिकित्सक मानते हैं कि थेरेप्यूटिक लेजीनेस से व्यक्ति की रचनात्मकता बढ़ती है। इसे अपनाने वाले लोगों की उत्पादकता में भी इजाफा होता है। स्लीप फाउंडेशन के अनुसार आराम और बेहतर नींद संज्ञानात्मक लचीलेपन को बढ़ाने में मददगार है। इससे लोगों का प्रदर्शन बेहतर होता है।
दूर होती है अनिद्रा की शिकायत
अनिद्रा आज के समय में एक बड़ी समस्या है। वर्क प्रेशर और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल के कारण लोगों की नींद उड़ जाती है। ऐसे में थेरेप्यूटिक लेजीनेस मददगार हो सकती है। इसमें लोग पूरी तरह से रिलेक्स हो जाते हैं। जिससे उनके शरीर के साथ ही मस्तिष्क को भी आराम मिलता है।
सोच बदलने की जरूरत
यह बात सच है कि हमारे समाज में जरूरत से ज्यादा आराम को अभी भी ठीक नहीं माना जाता है। इसे आलसी होने की निशानी समझा जाता है। अगर आप भी आराम करते समय किसी न किसी अपराध बोध से गुजर रहे हैं तो कुछ सीमाएं तय करके इससे मुक्ति पा सकते हैं। आप लोगों को बताएं कि जितना जरूरी काम करना है, उतना ही आवश्यक आराम करना भी है। आराम करने को आप आलस्य नहीं बल्कि माइंडफुलनेस का अभ्यास मानते हैं।
कुछ सीमाएं करें तय
थेरेप्यूटिक लेजीनेस खुद की जरूरत को समझने जैसा है। इससे आपको अंदर से कॉन्फिडेंस मिलता है और चुनौतियों का सामना करने के लिए आप तैयार हो पाते हैं। इसलिए आराम करना कभी भी बुरा नहीं हो सकता। लेकिन अपने काम और आराम को कभी आपस में न मिलाएं। इसकी सीमाएं और समय दोनों निर्धारित करें। बीच-बीच में आराम के लिए ब्रेक लें। इससे आप रिलेक्स होंगे और काम बेहतर तरीके से कर पाएंगे। आराम करने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आप हमेशा सोते रहे। जो एक्टिविटीज आपको रिलेक्स करती हैं, आप उन्हें करें और रिलेक्स हों।
