Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: उसने अपनी जेब से मोबाइल निकाला और फोन कट कर दिया। थोड़ी सफेदी उसकी शक्ल पर दिख ही गई।

“इससे अब भी बात होती है?” मैंने देख लिया था कि उसके एक्स का कॉल था।

“ऐसे नहीं, एकाध बार कभी आ जाता है कॉल।” उसने बहुत ही हल्के अंदाज़ में कहा।

“अब क्या चाहिए उसे?” मैंने चिढ़ते हुए कहा।

“हद करते हो, कुछ चाहिए होगा तभी कॉल करेगा क्या? यूँ ही हाल-चाल पूछने के लिए कभी-कभी बात हो जाती है।”

“अच्छा, तो ब्रेकअप के बाद पहली बार तुमने कॉल किया था या उसने?” अब वह भी समझ चुकी थी कि बात इतनी आसानी से नहीं टाली जा सकेगी।

“आँ…मैंने ही किया था एक बार। एक्चुली बहुत उदास थी और मन नहीं लग रहा था तो सोचा पूछ तो लूँ क्या कर रहा है आजकल।” उसकी ईमानदारी मुझे पसंद है।

“जब छोड़ ही दिया तो क्या पूछना-उक्षना लगा है? तुम्हें लेना-देना ही क्या है उससे?”

“कुछ नहीं। यूँ ही कर लिया था कॉल।”

“यूँ ही तो कुछ नहीं होता डियर! कुछ बातें रह गई हैं तुम्हारे मन में? या जानना चाहती थी कि वह आसानी से तुम्हें भूल तो नहीं गया?”

“ऐसा कुछ नहीं। अब तो उसकी भी नई गर्लफ्रेण्ड है। मैं जानती हूँ उस लड़की को, पता नहीं क्या दिखा उसको उसमें, अब उसे समझ आ रहा है कि वह उसके साथ ख़ुश नहीं रह सकता। जब मैं समझा रही थी, तो उसके कुछ समझ में नहीं आ रहा था।”

“वैरी गुड। तो वह यह सब तुम्हें क्यों बताता है? बहुत ख़ुश होगी तुम तो यह सुनकर, वापस चाहता है तुम्हें या डबल गेम?”

“पागल हो गए हो तुम। मुझे कोई इन्टरेस्ट नहीं उसमें और उसकी सड़ी हुई गर्लफ्रेण्ड में।” उसके बनाए तिरक्षे लबों पर आज प्यार नहीं, तरस आया।

सच जो भी हो, किसी के सोचने से बुद्धी छुट्टी पर तो नहीं चली जाती। ज़रूरी चीजों के लिए ज़िंदगी में वक़्त कम पड़ जाता है, किस-किस एक्स का हाल-चाल मैं लेता चलूँ। मूर्दों को दफ़ना देने का हिमायती जो ठहरा। मैंने जान लिया कि, आज की शाम एक और मुर्दा पैदा करने वाली है; मैयत की तारीख़ें कितनी ही मुश्किल हों, आख़िर चुक जाएँगी। समझौतों की बिसात पर अच्छे सौदे पक सकते हैं; पर सौदाग़र का कलेजा भी तो हो। समझौतों पर चलती उथली ज़िंदगी में तृप्ति कहाँ होगी?

मुझे यक़ीन की नाजायज़ बीमारी नहीं और ना ही बवंडरों से बचने का शौक़। सुकून भर दम, लहलहाकर रगों में दौड़ा और हयात भर इश्क़, रातरानी के झोंके सा बेख़ुद कर गया।