Hundred Dates
Hundred Dates

Hindi Love Story: “नर्क में जाओगी, नर्क में।” मैंने अपना सर सहलाते मज़ाक भरे लफ़्ज़ों में कहा। जान-बूझ कर मैंने उसे चिढ़ाने के लिए सड़क पर चलती लड़की को ज़्यादा ही घूरा; और मेरी हरकत देखने का उसे भरपूर वक़्त दिया। उसने अपना हैंड बैग मेरे सर पर दे मारा, जिसकी चोट मस्ती जितनी हल्की भी नहीं थी।

“एक्स-रे मशीन लगा रखी है क्या आँखों की जगह? गन्दी हरकतें तुम करो, और नर्क में मैं जाऊं? वाह भई वाह!…” उसने अब हैंड बैग मेरी बाँह में मारा।

“अबे!धर्म का कुछ तो ख़याल करो, कल को तुम्हारा पति हो गया तो सोचो; परमेश्वर को मारने के अपराध में कड़ाहियों में तली जाओगी और ख़ून-मवाद से भरी नदियों में बहते हुए, उसे ही खा-पीकर गुज़ारा करना होगा।” मैंने हल्के बचे दर्द के बीच और चिढ़ाया उसे।

“ख़ुद भाड़ में जाए ऐसा परमेश्वर; जिसकी छिछोरी हरकतों पर उसे पीटा ना जा सके। तुम्हारी आँखे निकाल लूँगी ज़्यादा ताका-झाँकी की तो, आई बात समझ में।” उसने एक लात मेरी लातों पर मारी और उसकी आँखों में चुड़ैल नाचने लगी; पर मैं कौन सा कम भूत था।

“अच्छा, ज़्यादा नहीं तो कितनी तक चल जाएगी?” मैंने बचाव की मुद्रा धरते हुए पिशाचनी की कल्पना की।

“सुधर जाओ, या कि सारे अरमान तुम्हारे अभी ही ठंडे कर दूँ?” डाँटने की उसकी अदा मम्मियों से कमतर तो हरगिज़ नहीं।

“कितना तो सुधर गया हूँ। तुम्हारी क़सम! दुनिया की बाकी लड़कियों को सर्फ एक्सेल से धुली एकदम साफ़ नज़रों से देखता हूँ। बस, एक तुम्हें देखते ही प्रोफेसर वात्स्यायन की तालीमें सर चढ़ आती हैं…”

“झूठी क़समें खा-खाकर मुझे मार ही डालोगे तुम। पर तुम्हें किसी और को देखना ही क्यूँ है, जब नज़रें साफ़ हैं? और एक मिनट…तुम्हारी कमीनेपंती की कसमें जानती हूँ मैं। तुम्हारी साफ़ नज़रों का मतलब यह तो नहीं कि, दूसरों को साफ़ देखते हो और मुझे देखते समय आँखों में कीच भर लेते हो?” भूत और चुड़ैल का मिलाप तो ऐसा ही होगा।

“देखा, मेरी संगत में तुम्हारा दिमाग भी अब काम करने लगा है।” मैंने हँसते हुए कहा।

“मैं कराती हूँ काम तो तुम्हारा।” उसने दनादन मेरी पीठ उसी हैंड बैग से ठोंकी, मैं ढीठ बच्चे की तरह माँ की पिटाई खाता रहा और “सॉरी-सॉरी” कहता हुआ हँसता रहा। मेरी हँसी में कुछ तो और कमाल रहा होगा। वह उठ कर जाने लगी और उसने कहा-

“गन्दे कहीं के। मुझे बात ही नहीं करनी तुमसे।”

आज फिर आसपास किसी के ना होने का मैंने भरपूर फ़ायदा उठाया और उसे खींचते हुए ख़ुद पर गिरा लिया। उसकी कमर पर चलते मेरे हाथों की गुदगुदी और उसके कानों के पीछे बरसते दुलार ने उसका गुस्सा हवा कर दिया।

यूँ चोर कलेजे में हमीदा शाहीन खटकी तो थी।

“कौन बदन से आगे देखे औरत को सबकी आँखे गिरवी हैं इस नगरी में।”