Tanik Betho Mere Pass
Tanik Betho Mere Pass

Hindi Poem: मुझसे मुझको शिक़ायतें बहुत हैं, 

आओ, तनिक बैठो मेरे पास,

सब तुमको बतलाऊँ।

सोचती हूँ, एक बार सुन ली जाए,

और धीरे-धीरे सबमें सुधार किया जाए।

बात-बात में क्यों हो जाती मैं उदास, 

रखती क्यों सबसे इतनी आस।

 क्यों अपने मन का मैं नहीं करती, 

फ़िज़ूल बातों को मन में भरती।

क्यों न मैं समय नियोजन की सूची बनाऊँ,

 करूँ योग और सुबह-शाम टहलने को जाऊँ।

 क्यों मैं मोबाइल को रखूँ साथ में,

 क्यों ना किताब को रखूँ हाथ में। 

अच्छा-अच्छा सोचकर 

 सदैव लिखती जाऊँ,

क्यों बेवजह की बातों में समय गँवाऊँ।

 एक दिन क्यों ना, मैं भी बहुत नाम कमाऊँ।

ख़ूब करूँ मैं मेहनत पर 

थोड़ा आराम भी, 

करती जो इतनी फ़िक्र सबकी करूँ अपनी भी। 

व्यस्तता के इस दौर में

रखूँ अपना भी ख़्याल, 

समय-समय पर पूछती रहूँगी 

ख़ुद से ख़ुद का हाल ।

क्यों अपने शौक को मैं

 अलमारी में बन्द रखती, 

कभी हँसी-ठठ्ठा तो कभी 

बचपना मैं भी करती ।

 क्यों मैं तेरी-मेरी में व्यर्थ समय गँवाऊँ,

कुछ अच्छा करके नया में भी सीख पाऊँ।

 सबके साथ अपना भी रखूँगी ख़्याल, 

पूछती रहूँगी ख़ुद से ख़ुद का हाल। 

सुन लेती मैं सबका अपना अनसुना कर देती,

सबकी पसन्द का रखती ख्याल अपने शोक भुला देती।