सिक्किम के बारे में जरूरी और खास बातें
सिक्किम केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिकता और स्वच्छता के लिए भी प्रसिद्ध है। यह राज्य भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य है और यहाँ पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया जाता है।
Sikkim Travel Guide: भारत का उत्तर-पूर्वी राज्य सिक्किम प्रकृति प्रेमियों और घुमक्कड़ों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। चारों ओर फैली बर्फीली चोटियाँ, नीले आसमान को छूती पर्वत श्रृंखलाएँ, रंग-बिरंगी घाटियाँ और शांत झीलें इस प्रदेश को अद्वितीय और अनोखा बनाती हैं। सिक्किम केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, आध्यात्मिकता और स्वच्छता के लिए भी प्रसिद्ध है। यह राज्य भारत का पहला पूर्ण जैविक राज्य है और यहाँ पर्यावरण संरक्षण को विशेष महत्व दिया जाता है। यदि आप कुछ दिनों के लिए रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर शांति और सुकून की तलाश में हैं तो सिक्किम आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।
सिक्किम का प्राकृतिक वैभव
सिक्किम में दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटी कंचनजंगा पर्वत स्थित है जिसे यहाँ के लोग पूजनीय मानते हैं। राज्य के हर हिस्से में प्रकृति अपने अलग-अलग रंग बिखेरती है, कहीं शांत झीलों का सौंदर्य है, तो कहीं ऊँचाई पर बसे बौद्ध मठ आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं। सिक्किम की राजधानी गंगटोक आधुनिकता और परंपराओं का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है जहाँ तिब्बती और नेपाली संस्कृति की झलक मिलती है। सिक्किम के स्थानीय व्यंजन जैसे थुकपा, मोमो और गुंड्रुक यहाँ के खान-पान का अनूठा स्वाद प्रदान करते हैं। अगर आपके पास केवल तीन दिन हैं तो भी आप इस खूबसूरत राज्य के मुख्य आकर्षणों का आनंद ले सकते हैं।
पहला दिन: गंगटोक और आसपास

सिक्किम की यात्रा की शुरुआत गंगटोक से करना सही रहता है। सुबह-सुबह त्सोमगो झील की यात्रा एक अद्भुत अनुभव साबित होता है। यह झील बर्फीली पहाड़ियों के बीच स्थित है और इसके बदलते रंग पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। इसके बाद, भारतीय सेना के वीर जवान बाबा हरभजन सिंह मंदिर के दर्शन किए जा सकते हैं जो साहस और समर्पण की मिसाल है। शाम को गंगटोक के एमजी मार्ग पर घूमना और वहाँ के स्थानीय बाज़ारों में खरीदारी करना सुखद अनुभव होता है।
दूसरा दिन: नाथुला पास और मनोरम दृश्य

दूसरे दिन की यात्रा रोमांच और इतिहास से भरपूर हो सकती है। गंगटोक से कुछ घंटों की दूरी पर स्थित नाथुला पास समुद्र तल से 14,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह भारत और चीन की सीमा पर स्थित एक ऐतिहासिक मार्ग है। इस जगह पर जाने के लिए विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। यहाँ से बर्फीले पहाड़ों का नज़ारा अत्यंत मनोहारी लगता है। नाथुला पास के पास ही हनुमान टोक नामक एक सुंदर मंदिर है जहाँ से पूरे गंगटोक शहर का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।
तीसरा दिन: युमथांग और गुरुडोंगमर झील

तीसरा दिन सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का अवसर प्रदान करता है। गंगटोक से करीब 6 घंटे की दूरी पर स्थित लाचुंग गाँव अपनी शांति और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ से आगे बढ़ने पर युमथांग घाटी, जिसे ‘फूलों की घाटी’ भी कहा जाता है देखी जा सकती है। चारों ओर बर्फीली चोटियाँ और रंग-बिरंगे फूलों से सजी यह घाटी मन को आनंदित कर देती है। यदि समय हो, तो सिक्किम की सबसे पवित्र झीलों में से एक गुरुडोंगमर झील की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।
