Olive Ridley Turtles in Odisha

ओडिशा के समुद्र तट पर दिखा अद्भुत नजारा, 7 लाख ओलिव रिडले कछुए घोंसले बनाने के लिए पहुंचे

इन दिनों ओडिशा के गंजाम जिले का ऋषिकुल्या समुद्र तट पर अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। काफी बड़े पैमानें में ओलिव रिडले कछुए घोंसले बनाने के लिए पहुंचे है। लगभग तीन लाख ओलिव रिडले कछुए 9000 किलोमीटर की दूरी तय कर ओडिशा के समुद्री तट पर पहुंचे हैं।

Olive Ridley Turtles in Odisha: इन दिनों ओडिशा के गंजाम जिले का ऋषिकुल्या समुद्र तट पर एक अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। काफी बड़े पैमानें में ओलिव रिडले कछुए घोंसले बनाने के लिए पहुंचे है। लगभग तीन लाख ओलिव रिडले कछुए 9000 किलोमीटर की दूरी तय कर ओडिशा के समुद्री तट पर पहुंचे हैं। रिकॉर्ड तोड़ 6,98,718 कछुओं ने समुद्र तट पर अंडे दिए। जो 2023 में बनाए गए 6,37,008 के रिकॉर्ड को पार कर गया। यह इसलिए भी खास हैं क्योंकि लुप्तप्राय समुद्री प्रजातियाँ पिछले वर्ष समुद्र तट पर दिखाई नहीं दीं।

बता दें, 16 फरवरी 2025 को कछुओं का सामूहिक घोंसला बनाना शुरू हुआ। इस सीजन ने पिछले सारे को तोड़ दिया है। जिसमें हजारों कछुए पहले ही अंडे जमा कर चुके हैं। इन घोंसले वाले स्थानों की सुरक्षा और कछुओं और उनके अंडों की सुरक्षा की गारंटी के लिए सरकार और संरक्षण समूहों द्वारा आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

ऑलिव रिडले कछुओं द्वारा बड़े पैमाने पर घोंसले बनाने के लिए एक विशिष्ट समुद्र तट पर जाने के कई कारण हैं। उनमें से एक है अनुकूल जलवायु परिस्थितियाँ। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिक बिवास पांडव ने कहा, “इस साल बेहतर जलवायु परिस्थितियों ने रुशिकुल्या नदी के मुहाने पर अधिक कछुओं को अंडे देने में मदद की है, जो कछुओं के लिए एक प्रमुख आश्रय स्थल के रूप में उभर रही है।”

ओडिशा के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खूंटियां ने कहा, “ऑलिव रिडले टर्टल का ओडिशा आना एक अच्छा संकेत है। इस साल लगभग 7 लाख से ज्यादा कछुए समुद्र तट पर पहुंचे हैं। वन विभाग ने कछुओं की सुरक्षा के लिए 2000 से अधिक कर्मचारियों को तैनात किया है। हमने कई जगहों को ‘नो फिशिंग जोन’ करार दिया है ताकि कछुओं की सुरक्षा को पुख्ता किया जा सके”।अंडों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऋषिकुल्या समुद्र तट को 50 हिस्सों में बांटा गया है। 200 से अधिक वन विभाग के कर्मचारी और स्वयंसेवक इस काम में लगे हुए हैं। इसके अलावा, जंगली कुत्तों, सियार और शिकारियों को रोकने के लिए समुद्र तट के चारों ओर घेरा भी बनाया गया है।

दरअसल, हर साल कुछए अपने वार्षिक सामूहिक घोंसला निर्माण के लिए ओडिशा के तट पर पहुंचते हैं। इन्हें “अरिबाडा” के नाम से जाना जाता है। ओलिव रिडले कछुए हर साल फरवरी और मार्च के बीच लाखों की संख्या में आते हैं। समुद्र तट की सुनहरी रेत पर ये कछुओं ने जगह-जगह घोंसला बनाया है और अपनी अगली पीढ़ी को जन्म देने के लिए 5.5 लाख अंडे दिए हैं।

ऑलिव रिडले कछुए अपने जैतूनी हरे रंग के कवच के कारण पहचाने जाते हैं और इन्हें वर्ल्ड कंजर्वेशन यूनियन द्वारा संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल किया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार मादा कछुआ एक बार में 100 से ज्यादा अंडे देती है जो 45 से 50 दिनों में फूटते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन कछुओं की रक्षा करना समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी है।

मेरा नाम नमिता दीक्षित है। मैं एक पत्रकार हूँ और मुझे कंटेंट राइटिंग में 3 साल का अनुभव है। मुझे एंकरिंग का भी कुछ अनुभव है। वैसे तो मैं हर विषय पर कंटेंट लिख सकती हूँ लेकिन मुझे बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल के बारे में लिखना ज़्यादा पसंद...