fifty shades darker novel in Hindi
fifty shades darker novel in Hindi

fifty shades darker novel in Hindi: “मैक आता ही होगा।”

ओह! मैं तो उसकी आंखों का रंग देखकर चौंक गई हूं। समुद्र के पानी का रंग भी मानो उन्हीं में घुल गया हो।

“दिल तो आता है कि सारी दोपहर तुम्हारे साथ यहीं पड़ा रहता पर डोंगी को बोट पर लाने में उसे मदद की जरूरत होगी। क्रिस्टियन ने प्यार से चूमते हुए कहा, “एना! तुम इस बिखराव के बीच भी कितनी सेक्सी और प्यारी दिख रही हो। जी कर रहा है, तुम्हारे साथ ही रहूं।” वह मुस्कुराया और पलंग से उठा। मैं पेट के बल लेटी नजारा ले रही हूं।

“कैप्टेन! तुम इतने बुरे भी नहीं हो।” मेरी तारीफ सुनकर वह मुस्कुरा दिया।

मैं उसे कपड़े पहनते देखती रही। इस इंसान ने अभी मुझे इतना प्यार दिया है। मैं तो अपनी किस्मत पर यकीन नहीं कर सकती। यकीन नहीं आता कि ये शख्स मेरा है वह मेरे पास बैठा और जूते पहन लिए।

“कैप्टन? मैं तो इस बोट का मालिक हूं।”

मैंने अपनी गर्दन एक ओर झुकाई, “मि. ग्रे! आप मेरे दिल के मालिक हैं और मेरे शरीर के …मेरी आत्मा के !”

उसने गर्दन झटकी और मुझे चूम लिया। “मैं डैक पर हूं। अगर नहाना चाहो तो नहा सकती हो। कुछ पीना चाहोगी?” उसने फिर से अपने सीधे लहजे में पूछा और मैं उसके बदलते रूपों को देखती रही। पल में तोला तो पल में माशा।

“क्या?” उसने मेरी हंसी देखकर पूछा।

“तुम?”

“मैं क्या?”

“तुम कौन हो और तुमने क्रिस्टियन का क्या किया?”

उसके होठों पर उदास सी मुस्कान खेल गई।

“बेबी! वह बहुत दूर नहीं है।” उसके सुर ने मुझे अपनी बात पूछने के लिए शर्मिंदा कर दिया पर उसने बात को हवा में उड़ा दिया। “तुम उसे जल्द ही देखोगी। अगर जल्दी से उठी नहीं तो अभी देख लोगी।” उसने जोर से एक धौल जमाया और मैं चिल्लाने के साथ-साथ हंसने लगी।

“तुमने तो मुझे चिंता में डाल दिया था?”

“क्यों? वैसे तुम भी तो मिले-जुले संकेत देती हो। इंसान करे भी तो क्या? वह चूमकर बोला, मिलते हैं बेबी!”

जब मैं डैक पर गई तो मैक लौट आया था पर मेरे सैलून का दरवाजा खोलते ही वह कहीं ओझल हो गया। क्रिस्टियन अपने फोन पर किसी से बात कर रहा है। किससे? उसने मुझे पास खींच कर चूम लिया।

“अच्छी खबर! बहुत खूब! बढ़िया। हां, हां आज रात।”

उसने फोन बंद किया और मैं इंजन चालू होने की आवाज से चौंक गई। मैक कॉकपिट में होगा।

“वापसी का वक्त हो गया।” क्रिस्टियन ने मुझे लाइफ जैकेट पहना दी।

हम मरीना की ओर लौटे तो सूरज का गोला नीचे उतर रहा था और आज मैंने अपने उस्ताद से बोट चलाने से जुड़े कई कामों का प्रशिक्षण लिया और सारी ट्रेनिंग के दौरान उसकी सख्ती बरकरार रही।

“मैं तुझे एक दिन ऐसे ही बांध दूंगी।” मैंने मसखरी की।

वह बोला, “पहले मुझे पकड़ना होगा। मिस स्टील।”

मेरे दिमाग में पिछली तस्वीरें कौंध गईं। पर उसके बाद हम बिछुड़ भी तो गए थे।

अब तो उसने प्यार का इजहार भी किया है तो क्या मैं फिर उसे छोड़ जाऊंगी। मैंने उसकी आंखों में झांका। क्या मैं इसे कभी छोड़कर जा सकूंगी-भले ही वह मेरे साथ कुछ भी करे। क्या मैं उसे कभी धोखा दे सकूंगी। कभी नहीं!

उसने मुझे बोट के सारे हिस्से दिखाए और मैंने सुना कि उसने कितनी अच्छी तकनीकों का इस्तेमाल किया था। मुझे हमारी पहली मुलाकात याद आ गई। मैंने जहाजों के लिए उसके जुनून की बात की थी पर मुझे ये पता नहीं था कि उसकी कंपनी बड़े जहाजों के सिवा ऐसी प्यारी नावें बनाने में भी निपुण है।

मैं उसके प्यार करनेे के अंदाज पर फिदा हूं। वह एक असाधारण प्रेमी है। बेशक, उसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता। केट यहां होती तो बात बेशक कुछ और हुई होती!

खैर, ये सब उसके लिए कब तक काफी होगा? मैं कुछ नहीं जानती पर यह खयाल बड़ा ही कड़वा है।

अब वह बैठ गया और मैं उसकी बांहों के घेरे में सुरक्षित खड़ी रही। ग्रेस सिएटल के पास आ रही है। मैं व्हील पर हूं और क्रिस्टियन बीच-बीच में सुझाव देता जा रहा है।

“जलयात्र की यह कविता दुनिया जितनी ही पुरानी है।’’ वह मेरे कान में बोला

“ये तो किसी का कहा हुआ लगता है।”

“हां, एंटोनी डि सेंट एक्सपुरी।”

“ओह……मुझे भी लिटिल प्रिंस बेहद पसंद है।”

“मुझे भी।”

शाम अभी ढली नहीं है। आसपास की नावों से रोशनी आने लगी है। तट पर लगी भीड़ को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है कि वे सब सूर्यास्त देखने आए हैं।

क्रिस्टियन ने बोट को एक कोने में खड़ा कर दिया ओर डॉकसाइड के पास भीड़ इकट्ठा हो गई है। उसने बड़े ही आराम से ये काम किया और मैक ने नीचे आकर ग्रेस को बांध दिया।

“लौट आए।” वह बोला।

“धन्यवाद! आज की दोपहर अद्भुत रही।”

मैंने कहा।

क्रिस्टियन बोला, “बेशक! जी में आ रहा है कि किसी सेलिंग स्कूल में तुम्हारा नाम लिखवा दूं। फिर हम दोनों अकेले ही जलयात्रा पर जाएंगे।”

“मुझे बहुत मजा आएगा और हम बार-बार उस पलंग और कमरे का……”

मेरी बात अधूरी छूट गई और वह मेरा कान चूम कर हौले से बोला, “एनेस्टेसिया! मैं इस बात का ध्यान रखूंगा।” उसका यह सुर ही मेरे रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी था।

“यह ऐसे कैसे कर लेता है।”

“आओ, अपार्टमेंट में कोई नहीं है। हम चल सकते हैं।”

“होटल का सामान?”

“वह टेलर ने ले लिया है।”

ओह कब?

“उसने पहले ग्रेस को चेक किया था और फिर होटल चला गया था।”

“क्या वह बेचारा कभी सोता भी है?”

“नींद? एना, वह अपना काम कर रहा है। जेसन अपने काम में माहिर है।”

“जेसन?”

“जेसन टेलर।”

मैंने सोचा कि टेलर उसका पहला नाम था। ये नाम उसे सूट करता है। मजबूत और भरोसेमंद।

मेरे चेहरे की मुस्कान देखकर क्रिस्टियन बोला,”क्या टेलर पर दिल आ गया है?”

“शायद!”

उसने भवें सिकोड़ी।

“मेरा दिल उस पर नहीं आया। तुम अपनी भवें सिकोड़ना बंद करो।”

“तुम्हें टेलर पसंद है?”

“हां, पसंद तो है।”

क्रिस्टियन ने मुंह बना लिया।

“वह मुझे बड़ा भरोसेमंद लगता है और ऐसा लगता है कि वह हमारे किसी बुजुर्ग की तरह देख-रेख करता है।”

“हैं?” क्रिस्टियन हैरान हो गया।

“बेशक अजीब बात है पर सच यही है।” मैंने कहा।

क्रिस्टियन के चेहरे पर अब भी अजीब से भाव हैं।

“क्रिस्टियन प्लीज़, कुछ तो सयाने बनो!”

“हां, कोशिश कर रहा हूं।” उसने कहा।

“कोशिश अच्छी है।” मैंने आंखें नचाईं।

“वैसे ऐसा करने से तुम्हें क्या याद आता है, एना?”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अगर तुम अच्छी तरह पेश आए तो हम उन यादों को दोहरा सकते हैं।”

उसके चेहरे पर हंसी खेल गई। “मैं अच्छे से पेश आऊं? वैसे मिस स्टील! आपको ऐसा क्यों लगा कि मैं उन यादों को दोहराना चाहता हूं।”

“जब मैंने ये कहा तो तुम्हारी आंखों की चमक देखने लायक थी।”

“तुम तो मुझे बहुत अच्छी तरह से जान गई हो।”

“मैं और अच्छी तरह जानना चाहूंगी।”

“मैं भी ऐसा ही करना चाहता हूं एना।” वह मुलायम सुर में बोला।

क्रिस्टियन ने डैक पर आकर मैक से हाथ मिलाया। “धन्यवाद मैक।”

“मि. ग्रे! मुझे भी खुशी हुई। एना! गुडबाय, तुमसे मिलकर अच्छा लगा।”

मैंने भी हौले से सिर हिलाया। उसे पता होगा कि जब वह किनारे पर गया था तो बोट में क्या हो रहा था।

“गुड डे मैक धन्यवाद!”

उसने मुस्कुराकर आंख दबाई तो मैं खिसिया गई।

“मैक कहां से है।” मैंने कुछ देर बाद क्रिस्टियन से पूछा।

“आयरलैंड…नॉर्दन आयरलैंड।” उसने हैरानी से जवाब दिया।

“क्या वह तुम्हारा दोस्त है?”

“मैक? वह मेरे लिए काम करता है। उसने ग्रेस बनाने में मदद की है।”

“क्या तुम्हारे बहुत से दोस्त हैं?”

“नहीं, कोई खास नहीं। मैं ज्यादा दोस्त नहीं बनाता। बस एक ही है।” मैं जानती थी कि वह किसका नाम लेने वाला था।

“भूख लगी है?” उसने बात बदल दी।

मैंने हामी दी। दरअसल भूख से जान निकल रही थी।

“हम वहीं खाएंगे, जहां कार खड़ी है आओ।”

इसके बाद हम एक छोटे से इतालवी बिस्टन्न्रो में गए। उसका नाम था ‘बीज़’। मुझे पोर्टलैंड वाली जगह याद आ गई। हम दोनों मेन्यू देखते हुए लजीज़ फ्रास्कटी पीते रहे। वह मुझे देखकर बोला, “एना! तुम बहुत प्यारी लग रही हो। घर से बाहर आकर तुम और भी निखर जाती हो।”

मैं शरमा गई। उसे धन्यवाद दिया पर अपनी वही जिज्ञासा दोबारा उठा दी। उसका मूड ठीक लग रहा था और मैंने पूछ ही लिया।

“तुम्हारे ज्यादा दोस्त क्यों नहीं हैं?”

“मैंने कहा न कि मेरे पास वक्त ही कहां है। काम से जुड़े लोगों से जान-पहचान है पर वे दोस्त नहीं हैं। मेरे पास मेरा परिवार और एलीना हैं बस!”

“तुम्हारे पास कोई पुरुष दोस्त नहीं, जिनके साथ थोड़ा मूड बदलने के लिए मौज-मस्ती कर सको।”

“एनेस्टेसिया! तुम जानती हो कि ऐसा करने के लिए मैं क्या करता हूं। काम का भी कितना दबाव रहता है। फिर कभी-कभी उड़ान भरता हूं या जलयात्रा पर निकल जाता हूं।”

“कॉलेज में भी कोई दोस्त नहीं थे?”

“नहीं।”

“बस एलीना?”

उसने चिंता के साथ गर्दन हिलाई।

“बिल्कुल अकेले रहते होगे?”

उसके होठों पर तिरछी मुस्कान खेल गई। “तुम क्या खाना चाहोगी।” उसने एकदम बात बदल दी।

“मैं रिसोट्टो लूंगी।”

“अच्छी पसंद है।” उसने कहा। वेटर को बुलाकर ऑर्डर दिया और बात वहीं खत्म हो गई।

मैं मन ही मन सोच रही थी कि अगर आज वह बात करने के मूड में है तो क्यों न कुछ पिछली बातें की जाएं।

मुझे उसकी उम्मीदों और मांगों के बारे में भी तो पता लगाना है।

“एनेस्टेसिया! क्या हुआ बोलो?”

मैंने उसके चिंतित चेहरे को निहारा।

“बोलो न क्या हुआ?” उसकी चिंता किसमें बदल रही है। गुस्सा या भय?

मैंने गहरी सांस ली, “मुझे चिंता है कि ये सब तुम्हारे लिए काफी नहीं है। तुम्हारा केवल इससे काम नहीं चलेगा।”

उसके जबड़े कस गए और आंखें सुलग उठीं, “क्या मैंने कोई ऐसा ईशारा दिया कि यह सब काफी नहीं है।”

“नहीं।”

“तो तुम ऐसा क्यों सोचती हो?”

“मुझे पता है कि तुम कैसे हो? तुम क्या चाहते हो?” …मैं हकलाई।

उसने आंखें बंद की और लंबी अंगुलियों से माथा सहलाने लगा।

“मुझे क्या करना होगा?” उसने कुछ ऐसे सुर में कहा जैसे ताव खा गया हो।

“नहीं, तुम समझे नहीं। तुम्हारी ओर से कोई कमी नहीं है। और मैं जानती हूं कि अभी कुछ ही दिन हुए हैं। मैं उम्मीद करती हूं कि मैं तुम्हें मजबूरन कोई ऐसा इंसान बनने का दबाव नहीं डाल रही, जो तुम नहीं हो।”

“एना! मैं अब भी वही हूं। जिंदगी की कड़वाहटों के पचासों रंगों वाला इंसान। मुझे दूसरों को काबू में रखने की अपनी लत पर काबू करना पड़ रहा है। …पर ये मेरा स्वभाव है और मैं जिंदगी से इसी तरह पेश आता आया हूं। हां, तुमसे एक निश्चित बर्ताव की उम्मीद करता हूं और अगर तुम ऐसा नहीं करतीं तो यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण और तरोताज़गी देने वाला हो सकता है। हम अब भी वही करते हैं, जो मुझे करना पसंद है। कल तुमने मुझे अपनी उस बोली के बाद धौल जमाने की इजाजत दी।” वह मुस्कुरा कर बोला, “मुझे तुम्हें सजा दे कर अच्छा लगा। मुझे नहीं लगता कि यह इच्छा कभी खत्म होगी……पर मैं कोशिश कर रहा हूं और ये सब उतना मुश्किल भी नहीं है, जितना मैंने सोचा था।”

मैं उसके बचपन वाले कमरे में घटी उस घटना को याद कर खिसिया गई।

मैंने हौले से शरमाकर कहा, “मैंने भी उसका बुरा नहीं माना।”

“मुझे पता है और मैंने भी नहीं माना। पर एना, तुमसे एक बात कहना चाहता हूं, यह सब मेरे लिए नया है और मेरी जिंदगी के कुछ पिछले दिन सबसे बेहतर दिनों में से रहे हैं। मैं कुछ भी बदलना नहीं चाहता।

ओह!

“ये मेरी जिंदगी के भी बेहतरीन दिन थे।” मेरे भीतर बैठी लड़की ने भी मुस्कुरा कर सिर हिलाया। वह भी मुझसे सहमत है।

“तो क्या तुम मुझे अपने प्लेरूम में नहीं ले जाना चाहते?”

उसने थूक निगला। चेहरा पीला पड़ गया और सारी हंसी सूख गई।

“मैं नहीं ले जाना चाहता।”

मुझे इस जवाब की उम्मीद नहीं थी। अन्दर बैठी लड़की तो किसी बच्चे की तरह मुंह फुलाए, बांहें मोड़ कर खड़ी हो गई।

“जब हम पिछली बार वहां थे तो तुम मुझे छोड़कर चली गई थीं।” उसने कहा, “मैं ऐसा कोई काम नहीं करना चाहता, जो हमें फिर से जुदा कर दे। जब तुम चली गईं तो मैं पूरी तरह से टूट गया था। मैंने तुम्हें बताया था कि मैंने तुम्हारे बारे में कैसा महसूस किया था।” उसकी आंखों में ईमानदारी झलक रही थी।

“पर ये सही नहीं लगता। तुम लगातार यही ध्यान रखते रहोगे कि मैं कैसा महसूस करती हूं। तुमने मेरे लिए ये सब बदलाव किए हैं……मुझे लगता है कि मुझे भी तुम्हारे लिए कुछ करना चाहिए… कुछ रोल-प्ले करने चाहिए।” मेरा चेहरा उसके प्लेरूम की दीवारों जैसा सुर्ख हो उठा।

इस बारे में बात करना इतना मुश्किल क्यों है? मैंने इस आदमी के साथ कितने ही अलग तरह से सेक्स किया है और कुछ हफ्ते पहले तक तो इन बातों के बारे में सुना तक नहीं था। न ही कभी सोचा था कि ये सब संभव हो सकता है पर इस बारे में इससे बात करना कितना मुश्किल है।

“एना, तुम जितना जानती हो, उससे कहीं ज्यादा भावनाएं प्रकट करती हो। प्लीज़-प्लीज़ ऐसा महसूस मत करो।”

वह बेपरवाह क्रिस्टियन कहां गया? अब तो उसके चेहरे पर अजीब-सा भाव दिख रहा है, “बेबी! अभी मुश्किल से एक वीकएंड हुआ है। हम दोनों को थोड़ा वक्त दो जब तुम चली गईं तो मैंने हम दोनों के बारे में बहुत सोचा। हमें वक्त चाहिए। तुम्हें मुझ पर और तुम्हें मुझ पर भरोसा करना होगा। हो सकता है कि आने वाले वक्त में हम कुछ करें पर अभी तो तुम जैसी हो, मुझे वैसी ही पसंद हो। मुझे तुम्हें खुश, बेपरवाह और बिंदास देखना पसंद है। तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी… हमें दौड़ने से पहले एक साथ चलना होगा।” अचानक ही वह हंस दिया।

“इसमें कौन-सी मज़ाकिया बात है?”

“फिल्न! वह हमेशा यही कहता है और मैंने सोचा नहीं था कि मैं एक दिन उसके ही शब्द दोहरा दूंगा।”

“अच्छा डॉक्टर का भूत सवार है।”

क्रिस्टियन हंसा, “बिल्कुल सही कहा।”

वेटर हमारे लिए स्नैक्स और ब्रुसचेट्टा ले आया। हमारी बात वहीं थम गई।

जब हमारे सामने खाना परोसा जा रहा था तो मैं सोचने लगी कि आज कितने दिन बाद क्रिस्टियन को फिर से शांत मूड में देखा है। मैंने चैन की सांस ली और वह मुझसे पूछने लगा कि मैंने कहां-कहां की सैर की हुई है। बात जल्दी ही खत्म हो गई क्योंकि मैं तो कांटीनेेंटल यूएस के सिवा कहीं गई ही नहीं। उसने सारी दुनिया देखी हुई है। हम बड़े आराम से उसकी देखी हुई जगहों के बारे में चर्चा करने लगे।

हमारे स्वादिष्ट और संतुष्टिदायक भोजन के बाद, क्रिस्टियन और मैं एस्काला लौट आए। कार के मधुर संगीत के बीच मैं अपने ही ख्यालों में मग्न हो गई। आज का दिन तो जबरदस्त रहा था- डॉ. ग्रीन, हमारा शॉवर, क्रिस्टियन के प्यार का इजहार, बोट और होटल में हमारे शारीरिक संबंध और कार की खरीद। क्रिस्टियन खुद भी कितना बदला-बदला लगा। मानो वह किसी चीज को नए सिरे से तलाश रहा था। वह क्या थी, यह मुझे भी नहीं पता था।

कौन जानता था कि वह इतने प्यार से पेश आ सकता था।

मैंने उसे देखा तो वह भी अपनी सोच में गुम था। मुझे अचानक ही याद आया कि उसने कभी एक स्वाभाविक किशोरावस्था की जिंदगी जी ही नहीं। मैंने गर्दन झटकी।

मेरा दिमाग उसकी आशंका की ओर चला गया। उसे बॉल गेम में डर था कि कहीं डॉक्टर की बातें सुनकर मैं उसे छोड़कर न चली जाऊं। क्रिस्टियन अब भी मुझसे कुछ छिपा रहा है। अगर वह ऐसा ही महसूस करता रहा तो हम आगे कैसे बढ़ेंगे।

उसे लगता है कि असलियत जानते ही हमारा साथ खत्म हो जाएगा। ओह! ये आदमी कितना उलझा हुआ है।

घर पास आने लगा तो उसका तनाव और भी बढ़ता गया उसने चारों ओर नजर मारी और मुझे पता है कि वह लीला को देख रहा है। मैं भी देखने लगी। हर युवती को परखने के बाद भी हम लीला को नहीं खोज सके।

वह गैराज में आया तो चेहरे पर तनाव की रेखाएं और भी गहरी थीं। मैं सोचने लगी कि अगर उसे इतना ही परेशान होना था तो यहां आने की जरूरत ही क्या थी। कुछ दिन होटल में ही बिता लेते। कम से कम इतना तनाव तो न होता। स्वेयर गैराज में पैटन्न्रोलिंग कर रहा है। मेरी ऑडी वहां से गायब है। क्रिस्टियन ने एसयूवी खड़ी की तो स्वेयर दरवाजा खोलने आ गया।

“हैलो स्वेयर।” मैंने धीरे से कहा।

“मिस स्टील! मि. ग्रे।”

“कुछ पता चला।” उसने पूछा।

“कुछ पता नहीं सर।”

क्रिस्टियन ने सहमति में सिर हिलाया और मेरा हाथ थामकर लिफ्ट की ओर चल दिया। मैं जानती हूं कि इस समय उसका दिमाग चकराया हुआ है। वह मेरी ओर मुड़कर बोला, “तुम यहां से किसी भी कीमत पर अकेली बाहर नहीं जाओगी। समझी तुम?”

“ओ के।” उसका यह रवैया देखकर मुझे हंसी छूट गई। मैं अपने-आप को गले लगा लेना चाहती हूं। ये इंसान, तानाशाही रवैए वाला इंसान, मुझे किस कदर चाहता है। मैं हैरान हूं कि इस सप्ताह पहले ही इसका यह सुर सुनकर मेरी जान निकल जाती थी पर अब इसे इतना जान गई हूं कि इसके इस बर्ताव का कारण समझती हूं। इस समय यह लीला के कारण तनाव में है, मुझसे प्यार करता है और मेरा बचाव करना चाहता है।

“इसमें मज़ाक की क्या बात है?” उसने हैरानी से पूछा।

“तुम?”

“मैं? मिस स्टील? मुझमें हैरानी की क्या बात है?”

“मुंह मत फुलाओ।”

“क्यों?” वह और भी हैरान हो गया।

“क्योंकि मेरे होंठ काटने से तुम पर जो असर होता है, तुम्हारे मुुंह फुलाने से मुझ पर भी वैसा ही असर होता है।”

“सच्ची!” उसने फिर से मुंह बनाया और मुझे एक छोटा-सा चुंबन दे दिया।

मैंने भी अपने होंठों को उसके होठों की ओर बढ़ाने में देर नहीं की और हमारा छोटा-सा चुंबन एक गहरे आवेग और दीवानगी से भरे चुंबन में बदल गया।

अचानक ही मेरी अंगुलियां उसके बालों में घूमने लगीं और उसने मुझे लिफ्ट की दीवार सेसटा दिया। हमारी जीभें आपस में टकरा रही हैं। पता नहीं लिफ्ट की चारदीवारी का असर है या कुछ और। मुझे उसका आवेग, उसकी जरूरत और चाह और भी गहरी हकीकत लग रहे हैं।

ओह! मैं भी तो उसे अभी और यहीं चाहती हूं।

अचानक ही लिफ्ट रुकी और दरवाजा खुल गया। क्रिस्टियन ने अपना मुंह पीछे कर लिया अब भी उसके उस अंग का उभार महसूस कर सकती हूं।

“ओह!” वह बेदम होकर बोला”उर्फ!” मैंने भी एक गहरी सांस भर कर खुद पर काबू पाना चाहा।

उसने मुझे घूरा, “एना! तुम मेरे साथ ये कर क्या रही हो?” उसने अपने अंगूठे से मेरे निचले होंठ को छुआ।

मैंने आंख के कोने से देखा कि टेलर दो कदम पीछे हो गया था। वह अब भी दिखाई नहीं दे रहा। मैं आगे आई और अपने राजकुमार के सुंदर गढ़न वाले मुंह के एक कोने को चूम लिया।

“क्रिस्टियन! तुम मुझे क्या कर देते हो?”

वह पीछे हटा और हाथ थामकर हुक्म दिया, “चलो।”

टेलर अब भी बरामदे में खड़ा हमारा इंतजार कर रहा है।

“गुड ईवनिंग टेलर!” क्रिस्टियन ने अपनेपन से कहा।

“मि. ग्रे! मिस स्टील!”

“मैं कल मिसेज टेलर थी।” मैं उसे देखकर मुस्कुराई और वह लजा गया।

“हां, उसके लिए एक अंगूठी कम से कम चाहिए थी।” टेलर ने कहा।

“मुझे भी यही लगा था।” मैंने कहा।

क्रिस्टियन ने मेरा हाथ कसकर थाम लिया और बोला, “तुम दोनों के किस्से हो गए हों तो क्या मैं बात कर सकता हूं।”

टेलर एकदम पहलू बदलकर संभल गया और मैं अन्दर ही अन्दर सिकुड़ गई। मैंने लाइन क्रास कर दी थी।

“सॉरी!” मैंने क्रिस्टियन की ओर मुड़ने से पहले, टेलर से कहा और उसने कंधे झटकते हुए एक दयालु-सी मुस्कान दी।

“मैं अभी आया। मिस स्टील से कुछ बात करनी है।” क्रिस्टियन ने टेलर से कहा और मैं जान गई कि आज तो मेरी शामत आ गई।

क्रिस्टियन मुझे बेडरूम में ले गया और दरवाजा बंद कर लिया।

“एनेस्टेसिया! स्टाफ के साथ अ लर्ट मत करो।” उसने फटकारा।

मैंने कुछ कहने के लिए मुंह खोला और फिर बंद कर लिया। फिर हिम्मत जुटाकर बोली, “मैं ऐसा कुछ नहीं कर रही थी। यह एक दोस्ताना रवैया है और दोनों बातों में उतर है।”

“स्टाफ के साथ इन दोनों में से कोई बर्ताव मत रखो। मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है।”

ओह! मेरा बेपरवाह क्रिस्टियन गया कहां?

“सॉरी!” मैंने किसी तरह कहा और अपनी अंगुलियों को घूरने लगी। आज पूरा दिन उसने मुझसे इस तरह का बर्ताव नहीं किया था। उसने मेरी चिबुक पकड़कर मुंह उठाया।

“तुम जानती हो कि मैं कितना जलनखोर हूं।” वह हौले से बोला।

“क्रिस्टियन! इसमें जलन वाली बात कहां से आ गई। तुम मेरे शरीर और आत्मा पर पूरा हक रखते हो।” उसने पलकें झपकाईं और मुझे चूमा पर इस चुंबन में पहले वाली गरमाहट नहीं थी।

“मुझे देर नहीं लगेगी। तुम आराम करो।” वह मुझे अपने बेडरूम में अकेला छोड़कर झट से निकल गया।

“इसे टेलर से जलने की क्या पड़ी है?” मैंने अविश्वास से सिर झटका।

घड़ी देखी तो पता चला कि अभी आठ ही बजे थे। मैंने कल के लिए कपड़े निकालने की सोची और अपने कमरे में जा कर अलमारी खोल ली। वह खाली थी। सारे कपड़े कहां गए? अरे नहीं! क्रिस्टियन ने मेरी बात मानते हुए सारे फेंक दिए।

मेरे भीतर बैठी सयानी लड़की हैरानी से देख रही है। मैंने फटकारा, तू और तेरी जुबान, बड़ी आई…।

उसने मेरी बात क्यों सुनी? मुझे मॉम की बात याद आ गई। मर्द सारी बातों का वही मतलब समझते हैं, जो साफ दिखता है। मैंने खाली जगह देखकर मुंह बनाया। उनमें कुछ सुंदर कपड़े भी थे। वह बॉल ड्रिंक्स कितनी सुंदर थी।

मैं कमरे में टहलने लगी। ये क्या! मेरा मैक कहां गया? हैं! सबसे पहले दिमाग में यही आया कि हो न हो लीला ने चुरा लिया होगा।

मैं झट से नीचे उसके कमरे में गई तो देखा कि मेज पर मेरा मैक, आई-पैड और बैग रखा था।

मैंने अलमारी खोली तो देखा कि सारे कपड़े क्रिस्टियन के कपड़ों के साथ जगह बनाकर रख दिए गए थे। यह कब हुआ? वह ऐसे काम करने से पहले बताता क्यों नहीं?

मैं मुड़ी तो उसे दहलीज पर खड़ा पाया।

“ओह! उन्होंने यह सब कर दिया?” उसने बेख्याली में कहा।

“क्या हुआ?” उसका मुंह बना हुआ था।

“टेलर को लगता है कि लीला इमरजेंसी सीढ़ियों से आई थी और उसके पास उनकी चाबी हो सकती है। अब सारे ताले बदल दिए गए हैं। टेलर की टीम ने एक-एक कमरा छान मारा है। वह यहां नहीं है।” उसने बालों में हाथ फिराया।

“काश मैं जान पाता कि वह कहां है। उसने हमारी सारी खोजबीन पर पानी फेर दिया है। उसे मदद की जरूरत और जाने कहां छिपती फिर रही है।” मैंने उसके गले में बांहें डाल दीं और उसने मुझे बांहों के घेरे में कस लिया।

“जब वह मिल जाएगी तो क्या करोगे?”

“डॉक्टर फिल्न के यहां जगह है।”

“उसके पति का क्या हुआ?”

“उनके बीच अब कुछ नहीं बचा। उसका परिवार कनेक्टीकुट में है। मुझे लगता है कि वह यहां अकेली ही है।”

“कितने खेद की बात है।”

“तुम्हें यहां सामान होने से दिक्कत तो नहीं? मैं चाहता हूं कि तुम मेरे कमरे में रहो।”

वाह! कैसे बात बदल दी।

“हां।”

“मैं चाहता हूं कि तुम साथ ही सोओ। तुम साथ सोती हो तो मुझे रात को डरावने सपने नहीं आते।”

“तुम्हें डरावने सपने आते हैं?”

“हां।”

मैंने उसका हाथ कसकर थाम लिया। मेरा दिल इस इंसान के लिए और भी दुखी गया।

इसके जीवन में कितना दुख है। “मैं तो कल काम पर जाने के लिए अपने कपड़े निकाल रही थी।” मैंने किसी तरह हिम्मत बटोरकर कहा।

“काम।” क्रिस्टियन ने यह सुनकर मुझे ऐसे घूरा मानो कोई गंदा शब्द सुन लिया हो।

“हां…, काम।” मैंने भी उसकी प्रतिक्रिया से उतना ही भ्रमित होते हुए कहा।

उसने चिंता से कहा, “पर लीला, वह बाहर कहीं भी मिल सकती है। मैं नहीं चाहता कि तुम काम पर जाओ।” उसने एक पल रुकने के बाद कहा।

“क्या? क्रिस्टियन ये क्या बात हुई? मुझे काम पर जाना है।”

“नहीं, तुम नहीं जाओगी।”

ये कहना क्या चाहता है।

“मेरी नई नौकरी है और बेशक मुझे पसंद भी है। मुझे तो काम पर जाना ही होगा।”

“तुम्हें क्या लगता है कि तुम सारी दुनिया जीतने निकल पड़ो और मैं यहां बैठी अंगुलियां चटकाती रहूं।”

“शायद……हां।”

ओह! फिफ्टी! फिफ्टी! फिफ्टी! ….मुझे हिम्मत दो।

“क्रिस्टियन! मुझे काम पर लौटना है।”

“नहीं, तुम्हें कहीं नहीं जाना।”

“हां, मुझे जाना है।” मैंने किसी बच्चे की तरह हौले से कहा।

उसने मुंह बनाया, “यह सुरक्षित नहीं है।”

“क्रिस्टियन! मुझे अपनी आजीविका चलाने के लिए नौकरी करनी है और मेरा कोई नुकसान नहीं होगा।”

“नहीं, तुम्हें आजीविका के लिए काम पर जाने की जरूरत नहीं है- तुम्हें कैसे पता कि तुम ठीक रहोगी?” वह लगभग चिल्ला रहा था।

वह कहना क्या चाहता था? वह मुझे सहारा देगा? ओह! ये तो हद हो गई। मेरी उसकी जान-पहचान अभी है ही कितनी- मुश्किल से पांच सप्ताह!

अब वह गुस्से में दिखा और आंखें आग उगलने लगीं पर मैंने परवाह नहीं की।

“क्रिस्टियन! जरा सोचो। उस दिन लीला पलंग के पास थी। अगर वह मुझे कुछ करना चाहती तो उसी समय कर सकती थी। और हां, मुझे काम तो करना ही होगा। मैं तुम्हारी दया पर नहीं पलना चाहती और मुझे अपने स्टूडेंट लोन भी तो अदा करने हैं।”

उसके चेहरे पर मायूसी की रेखाएं खिंच गईं। मैंने भी ठान लिया है कि पीछे नहीं हटूंगी।

“मैं नहीं चाहता कि तुम काम पर जाओ।”

“क्रिस्टियन! यह फैसला तुम नहीं ले सकते।”

उसने बालों में हाथ फिराया और हम दोनों एक दूसरे को घूरने लगे।

“स्वेयर तुम्हारे साथ आएगा।”

“क्रिस्टियन यह जरूरी नहीं है। तुम बेकार की बात कर रहे हो।”

“बेकार की बात? या तो वह तुम्हारे साथ जाएगा या मैं मनमर्जी करते हुए, तुम्हें यही रख लूंगा। काम पर जाने ही नहीं दूंगा।”

वह ऐसा नहीं करेगा। क्यों…, क्या वह करेगा?

“अच्छा, कैसे?”

“ओह! एनेस्टेसिया! मुझे सब तरीके आते हैं। मुझे मजबूर मत करो।”

“ओ के।” मैंने अपने हाथ खड़े कर दिए।

हम दोनों खड़े एक-दूसरे को घूर रहे हैं।

“अच्छा! अगर तुम्हें ठीक लगता है तो यही सही, स्वेयर मेरे साथ आएगा।”

मैंने अपनी आंखें नचाई और वह मेरी ओर एक कदम बढ़ आया।

मैंने कदम पीछे हटाया तो वह और आगे आ गया। उसने मेरा हाथ थाम लिया। मैं जान गई कि उसका मूड बदल गया था।

“क्या मैं तुम्हें घुमा लाऊं।” उसने कहा।

मैं तो सुनकर ही चकरा गई कि वह कहां जाने के लिए कह रहा था। वह हाथ थामकर बोला, “मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता था।”

“तुम डराने की बात करते हो। मेरा तो दिल कर रहा था कि यहां से भाग जाऊं।”

“भागने का मन हो रहा था?” क्रिस्टियन की आंखें फैल गईं।

“मज़ाक कर रही हूं बाबा!”

वह मुझे अलमारी के पास ले गया और मुझे अपने-आप को शांत करने में समय लगा। अब भी नसों में उबाल आ रहा है। इससे लड़ना कोई आसान काम नहीं है। उसने मुझे अपार्टमेंट में घुमाते हुए सारे कमरे दिखाए। उसके प्लेरूम और तीन सोने के कमरों के अलावा टेलर और मिसेज जोंस को भी पूरे अलग विंग मिले हुए थे, जिसमें उनके लिए रसोई, लिविंग एरिया और एक-एक सोने का कमरा था। मिसेज जोंस पोर्टलैंड में रहने वाली बहन के यहां से लौटी नहीं थीं।

नीचे उसकी स्टडी के पास ही एक टीवी रूम दिखा जिसमें एक बड़े से प्लाज़्मा स्क्रीन के अलावा कई गेमिंग कंसोल भी थे। वह अचानक ही अच्छे मूड में दिखा।

“तो तुम्हारे पाए एक्स-बॉक्स भी है।”

“हां, पर मैं इसमें बिल्कुल फिसड्डी हूं। इलियट हमेशा मुझे हरा देता है। जब तुमने मेरे इस कमरे को प्लेरूम समझा था तो मुझे बड़ी हंसी आई थी।”

“मुझे खुशी हुई कि आपको मेरी वजह से हंसने का मौका मिला। मि. ग्रे।” मैंने अकड़ से कहा।

“हां, मिस स्टील। जब आप खिझाने वाले मूड में नहीं होतीं तो अक्सर ऐसा होता है।”

“जब कोई नाजायज तरीके से हावी होता हो तो मैं खिझाने वाले मूड में आ जाती हूं।”

मैंने कहा

“मैं और नाजायज बात करने वाला?”

“जी हां, मि. ग्रे, मेरा तो दिल करता है कि ये शब्द आपके नाम से जोड़ दूं।”

“हां, मिस स्टील! इसके बारे में तो विचार करना होगा।”

“वैसे मुझे लगा था कि ट्रेवलियन तुम्हारा मिडिल नाम था?”

“नहीं, मेरा सरनेम है।”

“पर तुम इस्तेमाल नहीं करते।”

“बहुत लंबा है!”

“आओ।” उसने कहा और फिर हम एक वाइन सेलर से होते हुए टेलर के ऑफिस में पहुंच गए। काफी बढ़िया जगह थी और एक मेज के आसपास छह कुर्सियां लगाई गई थीं वहीं मुझे सीसीटीवी के सारे इंतज़ाम दिखे। मुझे नहीं पता था कि अपार्टमेंट में इसकी व्यवस्था भी है।

“हाय टेलर! मैं एना को ये दिखाने लाया था।”

टेलर ने मुझे विनम्र मुस्कान दी और खड़ा हो गया।

क्रिस्टियन मेरा हाथ थामकर लाइब्रेरी की ओर ले आया।

“यहां तो तुम आ ही चुकी हो।”

मैंने बड़ा-सा हरा बिलियर्ड मेज देखकर पूछा, “खेलें क्या?”

क्रिस्टियन हैरानी से मुस्कुराया।

“हां, पर क्या पहले कभी खेला है?”

“दो-तीन बार।” मैंने असली बात दबा दी।

“एना ! झूठ तुम्हारे बस का नहीं है। या तो तुम कभी नहीं खेली या…”

एक छोटे से मुकाबले से डर गए। मैंने अपने होंठों पर जीभ फिराया।

“मैं और पिद्दी सी छोकरी से डर गया?”

“कभी नहीं!”

“मि. ग्रे! लगी शर्त?”

“हां-हां, मिस स्टील! इतना भरोसा है? क्या शर्त लगी?”

“अगर मैं जीती तो तुम मुझे प्लेरूम में वापिस ले जाना।” वह तो सुनकर ही गश खा गया।

जब अपने को संभाल लिया तो बोला, “अगर मैं जीता तो?”

“तो जो तुम्हारा दिल करे, वही करना।”

“अच्छा डील!”

वह दबी हंसी के साथ बोला, “क्या खेलोगी? पूल, इंग्लिश स्नूकर या कैरम बिलियर्ड?”

“पूल प्लीज़! मैं तो बाकी खेल जानती ही नहीं।”

उसने एक बड़ा-सा चमड़े का डिब्बा निकाला। जिसमें सारी गेंदे मखमल पर सजी थीं उसने झट से बॉल सजा दी। मुझे तो याद नहीं कि मैंने कभी इतने बड़े मेज पर कभी खेला होगा। उसने मेरे हाथ में क्यू और चॉक पकड़ा दिया।

“क्या तुम ब्रेक करना चाहोगी?” उसने विनम्रता से पूछा। वह खेल का मज़ा ले रहा है। उसे लगता है कि जीत तो उसकी ही होगी।

मैंने अपना अपने क्यू के छोर पर लगे फालतू चॉक को फूंक से उड़ाकर कनखियों से क्रिस्टियन को देखा। उसकी आंखों में एक नया ही रंग उतर रहा है।

मैंने सफेद बॉल पर निशाना साधा और एक ही झटके में धारीदार गेंद को दाएं गोले में गिरा कर बाकी गेंदें बिखेर दीं।

“मैं धारीदार गेंदें चुनती हूं।” मैंने हल्के संकोच के साथ कहा और क्रिस्टियन के चेहरे पर हंसी खेल गई।

“अच्छा जी! जो हुक्म”

मैंने एक के बाद एक तीन गेंदें पॉकेट में डाल दीं। मन ही मन जोंस को धन्यवाद दे रही हूं कि उसने मुझे इतनी अच्छी तरह से खेलना सिखाया। क्रिस्टियन हैरानी से मेरा खेल देख रहा है और अब उसके चेहरे पर हंसी नहीं रही। मैं हरी गेंद पर आकर चूक गई।

“एनेस्टेसिया! एक बात कहूं। मैं तो तुम्हें सारी रात इसी तरह खेलते देख सकता हूं। बिलियर्ड टेबल पर झुककर शॉट लगाती एनेस्टेसिया!”

मैं शरमा गई। शुक्र है कि मैंने जींस पहनी हुई है। कमीना कहीं का, वह खेल से मेरा ध्यान हटाना चाहता है। उसने अपना स्वेटर उतार कर कुर्सी पर रख दिया और पहला शॉट लगाने को तैयार हो गया।

वह मेज पर झुका तो मेरा मुंह ही सूख गया। अब समझ आया कि उसका मतलब क्या था! वह सफेद टी-शर्ट और टाइट जींस के साथ मेज पर झुका है……मेरी तो धड़कन ही थम गई। मेरी सोच का दायरा भटक सा गया उसने चार सादी गेंदें निकालने के बाद फाउल कर दिया।

“मि. ग्रे! यह कैसी गलती की?” मैंने पूछा।

“ओह! मिस स्टील! मैं तो एक मूर्ख प्राणी हूं। आपकी बारी।”

“तुम हारने की कोशिश तो नहीं कर रहे?”

“अरे नहीं। मेरे दिमाग में जो स्कीम है उसके लिए मेरा जीतना जरूरी है और वैसे भी मुझे हमेशा से ही जीतने की आदत रही है।”

मैंने आंखें सिकोड़ीं। आज मैं हल्के नीले ब्लॉउज में थी जिसका गला निचली काट का है। मैंने मेज पर झुककर ऐसा दिखावा किया मानो मुझे अपने दिखते उभारों की परवाह ही न हो। ओह! इस खेल का भी अपना ही मजा है।

“मुझे पता है तुम क्या कर रही हो।” वह मेरे कान के पास आकर बोला।

मैंने अपनी गर्दन झटकी और अपने क्यू पर हौले से हाथ फिराया।

“मैं तो सोच रही थी कि अगला शॉट कहां से लूं।” मैंने हौले से कहा

मैंने झुककर संतरे रंग की गेंद को निशाना बनाया और फिर अगले निशाने के लिए मेज पर पूरी तरह से झुक गई। क्रिस्टियन ने गहरी सांस ली और मैं निशाना चूक गई।

वह मेरे पास आया और मेरी कमर के निचले हिस्से पर अपने हाथ रख दिए।

“मिस स्टील! आप मुझे लुभाने के लिए ये कमर मटका रही हैं?” उसने एक धौल भी जमा दिया।”

“हां। क्योंकि यही सच है। ”

“बेबी! जरा सोचकर ऐसी इच्छा जताना।”

मैंने अपना पिछला हिस्सा मला और मेज के दूसरे कोने पर आ गई। उसने लाल गेंद को निशाना बनाकर कमाल दिखाया पर पीली गेंद पर चूक गई और मैंने दांत निपोर दिए।

“रैड रूम! हम आने वाले हैं।” मैं चिल्लाई।

उसने त्यौरी चढ़ाई और खेलने का इशारा किया। मैंने हरी गेंद निकाली और आखिर में संतरी गेंद ही रह गई है।

क्रिस्टियन बोला, “अपनी पॉकेट का नाम बताओ।” ऐसा लगा मानो वह किसी और शरारत के बारे में पूछ रहा हो।

“बाईं ओर, ऊपर वाली।” मैंने काली पर निशाना साधा पर चूक गई। ओह! हो गया कचरा।

क्रिस्टियन दुष्टता से मुस्कुराया और मेज पर झुक अपनी दो बची गेंदों को निबटाने लगा। मैं उसके गठे बदन को मेज पर झुके हुए देख रही हूं। उसने खड़े हो कर क्यू पर चॉक रगड़ा और मुझे गहरी वासना भरी नजरों से घूरने लगा।

“अगर मैं जीता…।”

ओह हां?

“मैं इसी मेज पर पहले तुम्हारे पीछे धौल जमाऊंगा और फिर बिलियर्ड मेज पर ही शारीरिक संबंध बनाऊंगा।”

ओह! मेरी नाभि के आसपास की हर मांसपेशी खिंचती चली गई।

“सबसे ऊपर वाली!” उसने काली की ओर संकेत किया और शॉट लगाने के लिए झुक गया।