Geeta Gyan: श्रीमद्भागवत गीता केवल एक पुस्तक न होकर ऐसा धार्मिक ग्रंथ है जिसमें जीवन का सार समाहित है। इसलिए हर व्यक्ति को इसका अध्ययन और अनुसरण जरूर करना चाहिए। गीता में भगवान कृष्ण ने कई महत्वपूर्ण उपदेश दिए हैं, जिन्हें अपनाकर हर कोई अपने जीवन को सुखी और सफल बना सकता है। साधारण और सटीक अर्थ में कहें तो जीवन के लिए जो चीज जरूरी है, गीता में वह सारी बातें श्री कृष्ण ने बताई हैं। कर्म, आजीविका, सेहत, संबंध, शिक्षा, युद्ध, निर्णय, खुशी से संबंधित बातें गीता में बताई गई हैं। यह ऐसा ग्रंथ है जो धर्म के साथ ही अच्छे कर्म करने के लिए भी प्रेरित करता है।
गीता के अध्याय 8 और श्लोक 7 में श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं- ‘तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्’। हे अर्जुन! तुम मेरा चिंतन करो, लेकिन अपना कर्म भी करते रहो। इससे पता चलता है कि कृष्ण किसी भी व्यक्ति को अपना काम छोड़कर केवल भगवान का नाम लेते रहने को नहीं कहते हैं। बल्कि वह कर्म को करते रहने की भी सलाह देते हैं। गीता में साफ लिखा है कि बिना कर्म के जीवन संभव नहीं है।
क्यों देर से मिलती है अच्छी चीज

आजकल के भागदौड़ भरे जीवन में हर किसी को कर्म करने के बजाय हर चीज शीघ्र अति शीघ्र पाने की लालसा है। फिर चाहे वह धन हो, प्रेम हो या फिर सफलता। इसका एक मात्र कारण है धैर्य की कमी। जबकि जीवन की सच्चाई यह है कि जिस चीज को हम जल्दी पाने की इच्छा रखते हैं या जो चीज हमें अच्छी लगती है वही हमें देर से मिलती है। आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों होता है और भगवत गीता में इसे लेकर क्या कहा गया है।
गीता के दूसरे अध्याय के 47वें श्लोक में कहा गया है कि, ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि’। यानी व्यक्ति को बिना फल के इच्छा किए अपना कर्म (काम) करते रहना चाहिए। क्योंकि कर्म करना मनुष्य के अधिकार में है लेकिन उसका फल क्या होगा यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
अच्छी चीजों के देर से मिलने का एक कारण यह भी है कि, अगर हम जो चाहते हैं वह हमें तुरंत मिल जाए तो उस वस्तु का मूल्य कम हो जाता है। वहीं अगर वह चीज देर से मिले या बहुत संघर्ष के बाद मिले तो वह चीज हमें जान से अधिक प्यारी लगती है और हमारे लिए वह अमूल्य वस्तु हो जाती है।
जल्दबाजी नहीं अच्छी

जल्दबाजी में किए गए हर चीज का परिणाम अच्छा नहीं होता। इसलिए कहा जाता है कि जल्दबाजी से देर भली। लेकिन कुछ लोगों को ऐसा लगने लगता है कि, परिणाम जल्दी नहीं मिला तो शायद कभी नहीं मिलेगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है, बल्कि सब्र का फल और अधिक मीठा होता है। प्रकृति का भी यही नियम है कि हर चीज अपने तय समय ही होती है। पेड़ लगाकर न ही तुरंत फल मिलते हैं और ना ही एक ऋतु के बाद तुंरत दूसरी ऋतु आती है। इसलिए किसी चीज को पाने की जल्दबाजी न करें और ना ही कार्य करने के बाद उसके परिणाम पाने की प्रतीक्षा में बैठे रहें, बल्कि अपना काम कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते रहें। जीवन के प्रवाह के साथ बहने वाले ही लक्ष्य तक पहुंचते हैं।
