Motivational Story: परेश पंडित जी से पूछे बिना कुछ नहीं करता था। बहुत दिन से पंडित जी की शरण में था। संतान सुख नहीं मिला। आखिरकार ईश्वर के दरबार में सुनवाई हो गई और बड़े मान -गुन का बेटा हुआ। वह बेटे का मुंह देखने को छटपटा रहा था। तभी पंडित जी आए और परेश से कहा यह पांच दिन भारी हैं । पांच दिन बेटे का चेहरा नहीं देखना। वरना कुछ अहित हो तो फिर मुझे न कहना।परेश भौंचक्का होकर अपनी सूनी आंखों से पंडित जी को देखता रहा। सालों की आस के बाद पुत्र हुआ और यह कह रहे हैं चेहरा नहीं देखना। हे भगवान…! पांच दिन कैसे निकालूंगा। परेश मन ही मन कसमसा रहा था।
अस्पताल के बाहर बेंच पर बैठे-बैठे अचानक उसे ध्यान आया पांच दिन…. हे भगवान…! वह तो पिछले पांच वर्षों से गांव नहीं गया। उसका चेहरा तो इतने सालों से मां-बाबूजी ने दोनों ने नहीं देखा।
दूरी—गृहलक्ष्मी की कहानियां
