gorichen
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Summary: गोरीचेन पीक की ख़ास बात

यह चोटी तवांग जिले में स्थित है और भारत-चीन सीमा के करीब स्थित हिमालय की उत्तर-पूर्वी पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यह न केवल भारत की सबसे ऊँची चोटियों में से एक है बल्कि ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए एक रोमांचक स्थल भी है।

Gorichen Peak: अरुणाचल प्रदेश की बर्फीली पहाड़ियों में स्थित गोरीचेन पीक राज्य की सबसे ऊँची चोटी है जिसकी ऊँचाई 6,858 मीटर है। यह चोटी तवांग जिले में स्थित है और भारत-चीन सीमा के करीब स्थित हिमालय की उत्तर-पूर्वी पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है। यह न केवल भारत की सबसे ऊँची चोटियों में से एक है बल्कि ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए एक रोमांचक स्थल भी है। इसकी कठिन चढ़ाई और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य इसे साहसिक यात्रियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं। बर्फ से ढकी चोटियाँ और हरे-भरे घास के मैदान इस क्षेत्र की सुंदरता को और अधिक मनोरम बना देते हैं।

Gorichen Peak
Beauty of Gorichen

गोरीचेन पीक का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी बहुत गहरा है। यहाँ की मोनपा जनजाति इस पर्वत को “साओडंग” के नाम से पुकारती है और इसे पवित्र स्थल मानती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पर्वत उनके समुदाय की सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक है और उनकी रक्षा करता है। यहाँ बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव देखने को मिलता है और इस क्षेत्र की आध्यात्मिकता इसे एक विशेष आकर्षण प्रदान करती है। गोरीचेन पीक के पास स्थित तवांग मठ भारत के सबसे बड़े बौद्ध मठों में से एक है और यहाँ बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु ध्यान और साधना करते हैं।

गोरीचेन पीक की चढ़ाई किसी रोमांच से कम नहीं है। यह एक तकनीकी पर्वतारोहण ट्रेक है जिसमें ऊँचाई पर ऑक्सीजन की कमी, कठोर ठंड और कठिन चढ़ाइयाँ शामिल हैं। इसलिए, ट्रेकिंग से पहले उचित शारीरिक तैयारी और पर्वतारोहण का अनुभव आवश्यक होता है। ट्रेकिंग के दौरान गर्म कपड़े, बूट्स, पर्वतारोहण गियर, आइस एक्स, क्रैम्पन्स और रोप्स जैसी चीज़ें अनिवार्य होती हैं। ऊँचाई के कारण कई बार अल्टीट्यूड सिकनेस की समस्या भी हो सकती है, इसलिए यात्रियों को अच्छी तरह से अनुकूलित होकर इस यात्रा पर निकलना चाहिए। गोरीचेन पीक पर ट्रेकिंग का सबसे अच्छा समय मई से अक्टूबर के बीच होता है। 

Mountain of Gorichen
Mountain of Gorichen

गोरीचेन पीक के आसपास कई प्रमुख पर्यटन स्थल हैं जो इसे और भी खास बनाते हैं। तवांग मठ इस क्षेत्र का सबसे बड़ा आकर्षण है जो बौद्ध संस्कृति और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके अलावा, सेला पास एक और प्रमुख स्थल है जो तवांग जाते समय रास्ते में पड़ता है और अपनी बर्फीली सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। बुमला पास जो भारत-चीन सीमा पर स्थित है, यहाँ जाने वाले यात्रियों के लिए एक ऐतिहासिक और रोमांचक स्थान है। मधुरी झील अपनी अविश्वसनीय सुंदरता के लिए जानी जाती है। गोरीचेन पीक की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) की आवश्यकता होती है जिसे अरुणाचल प्रदेश सरकार जारी करती है। 

गोरीचेन पीक की यात्रा की शुरुआत तवांग से होती है, जो इस क्षेत्र का प्रमुख शहर है। तवांग तक पहुँचने के लिए सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा तेजपुर (असम) में स्थित है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा तवांग पहुँचा जा सकता है। यदि कोई रेल मार्ग से आना चाहता है तो रंगापारा रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है, जो असम में स्थित है। तवांग से गोरीचेन पीक के बेस कैंप तक का मार्ग कठिन और रोमांचकारी होता है। ट्रेकिंग के दौरान जेमिथांग और न्युकम जैसे छोटे गाँवों से होकर गुजरना पड़ता है। यह मार्ग सुरम्य घाटियों, ग्लेशियरों और बर्फीले पहाड़ों के बीच से होकर जाता है। 

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...