Hindi Kahani: अखबार के गिरने की पट्ट की आवाज़ से कुछ भयभीत सी मैं उठी , कमरा कुछ बिखरा पड़ा है जहां – तहां पन्ने , बिस्तर पर औंधी पड़ी किताब , फूलदान से सूखे फूलों के अवशेष जमीन पर गिरे पड़े है । ख़्याल आया तुम्हारे पत्र का एक पन्ना सीने पर रखा है जो किसी बोझ से कम मालूम नहीं होता । अम्मा कहती है भावों का वज़न लोहे से भारी होता हैं।
पहले – पहल ये बात मजाकिया लगती थी पर आज से सच लगने लगी । ये पत्र मुझे कंठस्थ हो गया है , और सिर्फ यही नहीं तुम्हारी लिखावट , तुम ‘क ‘ के पिछले हिस्से को कितना मोड़ते थे , अर्ध विराम कैसे खींचते थे, तक मुझे याद है । कुर्सी से उठकर सारे पन्ने समेट फाइल में भर किताबों की शेल्फ में रख दिए ।
खिड़की के बाहर अभी अंधेरा है, हां मन के अंधेरे से कुछ कम जरूर है । फूलों का गुच्छा परसो का आधा भी नहीं बचा है , पर फेंकने को दिल नहीं चाहता, और क्यों चाहें मै खुद पसंद करके जो लाई थी । अपनी पसंद की चीजें फेंकना मेरे लिए हमेशा से मुश्किल रहा है ।
हां औरों की बात दूसरी है जो वो अपने पसंद के आदमी तक को अपनी जिंदगी से बाहर फेंक देते है और माथे पर शिकन तक नहीं चढ़ने देते । फूलों को फूलदान में रख कर बालकनी से अखबार उठा लाई, दूसरे पन्ने पर किसी लॉकर का विज्ञापन था । बड़े – बड़े शब्दों में लिखा था “ फलाना लॉकर अपने घर लाए और अपनी जीवन निधि को बचाए।” मैं मुस्कुराती- सी अपनी जीवन निधि के विषय में सोचने लगी । सहसा ख़्याल आया मेरी जीवन निधि कोई भौतिक वस्तु तो नहीं जिसे लॉकर की जरूरत पड़े । मेरी जीवन निधि तो तुम्हारा प्रेम है , एक आध्यात्मिक भाव …सिर्फ और सिर्फ एक आध्यात्मिक भाव। कोई चोर उसे क्या चुराएगा, जो कोई चोर उसे देख पाता, छू पाता , महसूस कर पाता तो चोर थोड़े बनता । बनता तो कवि , लेखक बनता या फिर संगीतकार या दार्शनिक, या फिर कुछ और । पर चोर तो कतई न बनता। प्रेम को जो छू ले , महसूस कर ले , वो खुद के , दूसरों के जीवन को ज्यादा से ज्यादा सुंदरता देना जानता है । प्रेम का कार्य ही है इंसान को बनाना जो बिगाड़े वो कुछ भी हो प्रेम तो नहीं हो सकता ।
तुम भी तो कहते थे मेरे संग रह कर तुम एक दिन लेखक बन जाओगे, लो मैं आज कहती हूं तुम लेखक बन गए पर मेरे साथ रह कर नहीं मुझसे दूर रह कर। और तुम्हारा ये आखिरी पत्र प्रमाण है इस बात का ।
