ज्यादातर महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान त्वचा अच्छी हो जाती है और साथ ही चेहरे पर हेल्दी ग्लो भी रहता है, लेकिन दूसरी ओर मां बनने के बाद त्वचा और बालों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। यह आमतौर पर हार्मोन के असंतुलन होने के कारण होता है, क्योंकि गर्भावस्था के बाद एस्ट्रोजेन गिर जाते हैं। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद और विश्राम दोनों सौंदर्य और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं। ज्यादातर नई मांएं पेट पर स्ट्रेच माक्र्स की समस्या का सामना करती हैं। इन स्ट्रेच माक्र्स को कम करने के लिए तेल से पेट की मालिश करें। ये निशान समय के साथ कम होते चले जाएंगे। पेट पर हाथों से गोल घुमाते हुए तेल से मालिश करें। बांहों और जांघों पर ऊपर की तरफ लम्बे में मालिश करें। गर्मियों के दौरान गाल, माथे या नाक पर गहरे पैच भी हो सकते हैं। सनस्क्रीन का उपयोग इस समय जरूर करना चाहिए। सन-एक्सपोज़र से लगभग 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाना चाहिए। घरेलू उपाय में आप दही में एक चुटकी हल्दी मिलाएं और पेस्ट बना लें। इसे रोजाना उस पैच पर लगाएं। 20 मिनट के बाद इसे सादे पानी से धो लें। स्क्रब चेहरे और बॉडी दोनों के लिए अच्छा होता है। पिसे हुए बादाम या चावल के पाउडर को दही के साथ मिलाएं। एक चुटकी हल्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएं। 15 मिनट के बाद, स्क्रब को उस पैच पर हल्के हाथों से मसाज करें और पानी से धो लें।

गर्भावस्था के तुरंत बाद एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट के कारण मां को बालों के झडऩे का सामना करना पड़ता है, इसलिए हम प्रतिदिन स्कैल्प पर हर्बल हेयर टॉनिक लगाने की सलाह देते हैं, जिसे कॉटन की मदद से लगाया जाता है। हफ्ते में एक बार रात को शैम्पू से पहले तेल लगाएं। सिर की मालिश से बचें। अगर स्कैल्प ऑयली है या डैंड्रफ है तो एक मग पानी में 2 बड़े चम्मच एप्पल साइडर विनेगर मिलाएं और शैम्पू के बाद इससे धो लें। नवजात शिशु की देखभाल करते समय कई समस्याएं सामने आती हैं। उदाहरण के लिए शिशुओं को रेशेज होने की संभावना होती है, खासकर डायपर की वजह से और विशेष रूप से गर्मियों में। अगर दाने एक दिन से अधिक समय तक बने रहते हैं तो मालिश देने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करें। डायपर वाले क्षेत्र को सूखा रखने के लिए बेबी पाउडर का उपयोग करें। शिशुओं में भी गॢमयों में दाने बहुत आसानी से विकसित होते हैं। हालांकि ध्यान रखें कि बहुत अधिक पाउडर का उपयोग न करें, क्योंकि यह बच्चे की त्वचा की दरारों और सिलवटों में जमा हो सकता है। सूखापन और चॉपिंग या दानेदार स्थितियों के लिए सूदिंग बेबी क्रीम का उपयोग करना चाहिए।

बच्चों के बाल धोने के लिए ‘टीयर्स फ्री बेबी शैम्पू का उपयोग करें, जो आंखों में चुभता नहीं है। कम शैम्पू का प्रयोग करें और सादे पानी से अच्छी तरह से धोएं। यहां तक कि अगर आप इस शैम्पू का उपयोग करती हैं तो भी यह ध्यान रखें कि साबुन का पानी आंखों में न जाए। बाल धोते समय आगे से पीछे तक पानी डालें, ताकि पानी बच्चे के चेहरे पर न गिरे।

कभी-कभी बच्चे के स्कैल्प पर सफेद पपड़ी हो जाती है, जिसे ‘क्रैडल कैप के रूप में जाना जाता है। ये सफेद पपड़ी बच्चे की स्कैल्प से चिपक सकती है। सफेद पपड़ी को हाथों से मत हटाएं। बच्चे के बालों को हफ्ते में तीन बार बेबी शैम्पू से धोएं। स्कैल्प पर शुद्ध जैतून का तेल लगाएं। यह सफेद पपड़ी को नरम करने में मदद करता है। फिर शैम्पू से स्कैल्प को धो लें। कॉटन का उपयोग करते हुए इस सफेद पपड़ी को धीरे से हटाने की कोशिश करें। अगर कुछ अभी भी स्कैल्प से चिपकी हुई हैं तो एक या दो दिन बाद फिर से जैतून का तेल लगाएं। यदि स्थिति गंभीर है तो अपने डॉक्टर से परामर्श करें। शिशु की देखभाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, ‘शिशु की मालिश करना। आप शुद्ध जैतून का तेल या तिल के बीज का तेल भी इस्तेमाल कर सकती हैं। आसान और हल्के हाथों से बच्चों की मालिश करनी चाहिए। अचानक, झटकेदार मालिश से बच्चे को डर लग सकता है। सिर और चेहरे की मालिश नहीं करनी चाहिए। बुखार या बीमारी होने पर शिशु की मालिश नहीं की जानी चाहिए। उसके पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें।