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Alum for Plants

Alum for Plants: अमूमन हम सभी को घर की बालकनी या छत पर फूल-पौधे लगाना पसंद करते हैं। इससे घर की खुबसूरती तो बढ़ती ही है, साथ ही आसपास का वातावरण भी शुद्ध और खुशनुमा रहता है। पौधे लगाना किसे पसंद नही है। पर जब आप अपने घर में पौधे लगा रहे हैं तो उनकी उचित देखभाल करना भी जरूरी है। समय पर पानी देना, खाद और उचित प्रकाश की व्यवस्था। पर कई बार सब कुछ सही से करने पर भी गर्मियो में पौधे धूप के कारण झुलस से जाते हैं। अगर आपके घर में भी पौधे गर्मियों में सूख जाते हैं या जल कर खराब हो रहे हैं, तो फिटकरी की मदद से अपने पौधों को बचा सकते हैं।

पोधो के लिए फिटकरी बेहद उपयोगी खाद के जैसी है। यह रोगों और कीटों से लड़ने में मदद करता है। फिटकरी एक रंगहीन रसायानिक पदार्थ है, जो एक क्रिस्टल की तरह होता है। इसका रासायनिक नाम पोटेशियम एल्यूमीनियम सल्फेट है। इसे अंग्रेजी में एलम कहा जाता है। सामान्य से दिखने वाले इस पदार्थ में कई औषधीय गुण मौजूद होते है। फिटकरी में एंटीबायोटिक, एंटी-ट्राइकोमोनसए एस्ट्रिंजेंट, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। फिटकरी बहुत ही सस्ती आती है। आप फिटकरी की मदद से घर के कई काम आसान बना सकते हैं, साथ ही गार्डनिंग में भी प्रयोग कर सकते है।

पौधों के लिए फिटकरी खाद के रूप मे कीटनाशक भी है। अगर किसी पौधे में चींटी या कीड़े लग रहे हैं। तो केवल फिटकरी को या तो गमले के नीचे रख दें या फिर गमले की मिट्टी में दबा दें या आप फिटकरी के पानी का भी प्रयोग कर सकते हैं।

फिटकरी मिट्टी की शक्ति को भी बढ़ता है। इससे पौधों की बढवार अच्छे से होती है, पौधे हरे-भरे रहते हैं। फिटकरी के उपयोग से उत्पादन में बढ़ोतरी भी अच्छी होती है। इसके लिए आप या तो फिटकरी को बारीक़ पीसकर इसे पौधा लगाते समय मिट्टी में मिला दे या बाद में भी मिट्टी में दबा दे या फिर पौधों में पानी देते समय फिटकरी के पानी को मिलाकर सकते हैं।

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कैसे काम करता है

Alum for Plants
Tips of Alum for Plants

फिटकरी में पोटैशियम सल्फेट और ऐलुमिनियम सल्फेट का मिश्रण होता है। फिटकरी को पानी मे मिलाने से पानी की अम्लता बढ़ जाती है। क्योंकि इससे कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जिससे कार्बोनिक एसिड बनता है। इससे पानी की अम्लता बढ़ जाती है और पीएच मान कम हो जाता है। फिटकरी का इस्तेमाल जब आप पौधों में कर रहे हैं, तो आपको सावधानी बरतने की भी जरूरत है। क्योंकि फिटकरी के फायदे हैं तो नुकसान भी हैं। फिटकरी के पानी को कभी भी पौधों की पत्तियों में न डालें। ऐसा करने से पत्तियां खराब हो जाती हैं। फिटकरी का पानी पत्तियों को जला देता है। पर ये जड़ों के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित है।

किन पौधों के लिए फिटकरी अच्छा है

फिटकरी में खटास होती हैं और जिन पौधों को सिट्रिक एसिड की जरूरत होती है, उनमें फिटकरी डालना बहुत ही फायदेमंद होता है।

  • फिटकरी को फूलों वाले पौधों के लिए खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। इससे पौधे मजबूत और स्वस्थ बनते हैं और उनमें फूलों की संख्या और उत्पादन बढ़ता है।
  • फिटकरी का उपयोग फलदार पौधों के लिए भी उपयोगी होता है।
  • जिन पौधों को अम्लीय मिट्टी ज्यादा पसंद है, उनमें ज्यादा मात्रा में 5 ग्राम प्रति लीटर से पौधे के आकार के अनुसार प्रयोग कर सकते है। जैसे- गुडहल, गुलाब, गंधराज, कमीलया, हाइड्रेंजिया, ब्लीडिंग हार्ट, गेंदा, फूलगोभी, टमाटर, आम, अमरूद, नींबू आदि। जिन्हें नॉर्मल मिट्टी पसंद है, उनमें केवल संतुलित मात्रा में 2 ग्राम प्रति लीटर तक ही प्रयोग करें।

कैसे करें उपयोग

अपने पौधों के लिए आप फिटकरी दो तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।

200 ग्राम फिटकरी को पहले 1 लीटर पानी में घोल लें। फिर 1 लीटर पानी में आपको केवल 1 छोटा चम्मच घुला हुआ फिटकरी का पानी डालना है। आप इस पानी से पौधों की नियमित सिचाई भी कर सकते हैं।

दूसरा तरीका यह है कि एक छोटा सा 2 ग्राम से 20 ग्राम तक का फिटकरी का टुकड़ा गमले के आकार के अनुसार मिट्टी में दबा दें। ऐसा करने से फिटकरी जरूरत भर को पोषण पौधों को देता रहेगा।

फिटकरी के फायदे

  • पौधे को फंगस से बचाता है।
  • कीटनाशक का काम करता है (दीमक और चीटियों को खत्म करता है)
  • मृदा की संरचना में सुधार करता है।
  • मिट्टी के पीएच लेवल को कम करता है।
  • पौधों को हरा-भरा रखता है।
  • उत्पादन में वृद्धि करता है।
  • पौधों में फूलों की संख्या बढ़ता है।

रखें ध्यान

किसी भी पौधे में प्रयोग के लिए पौधे के आकार के अनुसार मात्रा सुनिश्चित करके ही प्रयोग करें। बेहतर होगा पहले कम मात्रा से प्रारंभ करें। सभी सामान्य पौधों में प्रति माह 2 ग्राम प्रति लीटर डाल सकते है। अम्लीय मिट्टी पसंद करने वाले पौधों में प्रति माह 5 ग्राम तक प्रयोग कर सकते हैं। खेत मे 1 किलो प्रति एकड़ नॉर्मल पीएच पर और हाई पीएच पर 2 किलो प्रति एकड़ प्रयोग कर सकते हैं।

(रजत कश्यप, उद्यान विशेषज्ञ, दिल्ली )