भय लगातार आपका पीछा कर रहा है। ईश्वर सम्पर्क से ही भय का अन्त होता है, और किसी से नहीं। तब प्रतीक्षा क्यों? योग से आप ईश्वर के साथ उस सम्पर्क को स्थापित कर सकते हैं। भारत के पास आपको देने के लिए कुछ है जिसे कोई अन्य राष्ट्र कभी नहीं दे सका। मैं प्रत्येक वस्तु के लिए अपने गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वर जी का ऋणी हूं, वे हर प्रकार से दक्ष थे। उनके ज्ञान का अनुसरण कर के ही मैं पश्चिम में अपने जीवन के विशिष्ट ध्येय में सफलता पाने के योग्य हुआ था। उन्होंने कहा था, ‘तुम जो कुछ भी करो, इस प्रकार करने का प्रयत्न करो जिस प्रकार इससे पहले कभी किसी ने न किया हो!’ यदि तुम इस विचार को याद रखोगे, तो तम सफल हो जाओगे। अधिकाश लोग दूसरों की नकल करते हैं। आपको मौलिक बनना चाहिए, और आप जो कुछ भी करें, अच्छे ढंग से करें। जब आप ईश्वर के साथ सम्पर्क में रहते हैं तो समस्त प्रकृति भी आपके साथ समस्वर रहती है।
हम प्राय: सर्वप्रथम अपने विषय में सोचते हैं, परन्तु हमें सदा दूसरों को अपनी खुशियों में सम्मिलित करना चाहिए। जब हम ऐसा अपने हृदय की पवित्रता से करते हैं, तो हम चारों ओर आपसी तालमेल के भाव को फैला देते हैं। यदि एक हजार व्यक्तियों के समाज में प्रत्येक व्यक्ति इसी प्रकार व्यवहार करे तो प्रत्येक व्यक्ति के नौ सौ निन्यानवे मित्र होंगे। परंतु यदि प्रत्येक व्यक्ति उस समाज में एक शत्रु की तरह व्यवहार करे, तो प्रत्येक व्यक्ति के नौ सौ निन्यानवे शत्रु होंगे।
प्रेम की शक्ति से दूसरों के हृदय पर विजय प्राप्त करना महानतम विजय है जिसे आप जीवन में प्राप्त कर सकते हैं। सदा सर्वप्रथम दूसरों के विषय में सोचने का प्रयत्न करें और आप संपूर्ण जगत को अपने चरणों में पाएंगे। जीसस की यही महानता थी। वे सब के लिए जीवन जीए और मरे। महान् भौतिक शक्तियों वाले मानव, जो केवल अपने लिए जीते हैं, जल्दी ही भुला दिए जाते हैं, परंतु जो पूर्ण रूप से दूसरों के लिए जीते हैं वे सदा के लिए स्मरण किए जाते हैं। राजाओं के राजा का पृथ्वी पर अपने अल्प जीवनकाल में कोई स्वर्ण का सिंहासन नहीं था, परंतु उन्होंने करोड़ों लोगों के हृदय में प्रेम के सिंहासन पर बीस शताब्दियों तक शासन किया है। यही उत्तम सिंहासन है जिसे पाना चाहिए।
आप जिस वस्तु से भयभीत हैं, अपने मन को उससे दूर ले जाएं और उसे ईश्वर पर छोड़ दें। प्रभु में विश्वास रखें। प्राय: कष्ट’ केवल चिंता के कारण होते हैं। अभी कष्ट’ क्यों भोगें जबकि अभी आया ही नहीं? चूंकि हमारी अधिकांश बीमारियां भय के कारण आती हैं, इसलिए यदि आप भय छोड़ दें तो आप तुरंत मुक्त हो जाएंगे। स्वास्थ्य लाभ तुरन्त हो जाएगा। तीन बार ‘ओम’ का उच्चारण करें, अथवा ‘प्रभु’ शब्द का उच्चारण करें। यह आपकी रक्षा करेगा। आप प्रभु की अद्भुत सुरक्षा का अनुभव करेंगे। निर्भीक रहें। स्वस्थ रहने का केवल यही एक तरीका है। यदि आप ईश्वर से सम्पर्क स्थापित करेंगे तो उनकी सत्यता आपकी ओर प्रवाहित होगी। आप जान लेंगे कि आप एक अमर आत्मा हैं। हृदय से भय दूर हो जाएगा, और ईश्वर का आनन्द प्रकट हो जाएगा।
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