Hindi Kahani: मैंनें बचपन से अपनी बहुत सारी चाचियों को देखा है। उन सब चाचियों की मेरी माँ जेठानी थीं। मेरी चाचियां जब भी हमारे घर आतीं माँ को एक भी घर के कामों में हाथ न लगाने देतीं। घर का सारा काम तो दूर वे तो माँ तक के काम कर देतीं जैसे उनके कपड़े धोना, उनकी थाली उठाना आदि। मां मेरी चाचियों के बीच महारानी सी रहतीं। पर फिर भी मेरी माँ अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भागती, चाचियों के लाख माना करने पर भी वे उनके साथ काम में जुटी रहती, और उन्हें छोटी बहनों सा स्नेह देतीं। माँ का और चाचियों का वही रूप मेरे मन में आज भी है।
आज जब देवरानी-जेठानी के रिश्ते बहुत जटिल हो चलें हैं। वहाँ इस तरह कि सरलता की तो कोई गुंजाइश ही नहीं है और हो भी क्यों? जब समय बदल रहा है तो रिश्ते भी बदलेगें न!
अब मैं जेठानी हूँ और मेरे पास दुनिया की सबसे प्यारी देवरानी है। बेहद होशियार, आज के दौर की स्मार्ट लड़की, मुझसे उम्र में काफी छोटी, हम दोनों एक-दूसरे से बहुत अलग हैं। हमारी रुचियाँ भिन्न हैं, हमारी आदतें भिन्न हैं पर इतने सारे अंतर होने के बावज़ूद भी हम दोनों में असीम स्नेह है। इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे कि न मुझमें जेठानी होने की ठसक है न उसमें देवरानी होने की निराशा। हम एक-दूसरे से खूब सीखते हैं, हम एक-दूसरे को ख़ूब समझते हैं, हम एक-दूसरे को ख़ूब प्यार करते हैं। हम दो भाइयों को जोड़े रखने का सेतु बन उन्हें मिलाकर रखते हैं। घरेलू काम को हम चुटकियों में करके बाहरी मस्ती के लिए ख़ूब समय चुराते हैं। आज हर रिश्ते को प्यार की जरूरत है। अगर आप जेठानी हैं तो ठसक में न रहें और अगर आप देवरानी हैं तो जेठनी को कोई दूसरी दुनिया से आया प्राणी न समझे वो भी आप ही कि तरह इस घर में आई है।
हम गले लगते हैं, हम मस्ती करते हैं, हम बहस करते हैं और सबसे बड़ी बात हम एक-दूसरे का सम्मान करते हैं हम एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। यदि आप भी देवरानी-जेठनी के रिश्ते को जी रहीं हैं तो ऐसे ही जीकर देखिये यकीन मानिए यह रिश्ता दुनिया का बड़ा प्यारा सा रिश्ता है।
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