अधिकांश मामलों में कोविड के हल्के फुल्के या सामान्य लक्षण होते हैं,जिनमें अस्पतालों में भर्ती होने की ज़रूरत नहीं होती है,बल्कि संयम और समझदारी की ज़रूरत होती है। यदि आपक़ो कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका हो या टेस्ट पॉज़िटिव आएं तो, क्या करें-
१- आप परामर्श के लिए Emergency रूम में फ़ोन करें।यदि फ्लू जैसे लक्षण हों तो एहतियात बरतें और अपने Doctor से सम्पर्क करें
२-साधारण कफ,बुखार,गला ख़राब होने की स्थिति में आप घर में ही रहे,यदि ये लक्षण कोरोना के भी हों तो,बेहतर होगा आप घर में रहें,क्योंकि अधिकांश मामलों में ये इमर्जेन्सी केस नहीं होता।ह्रदय,किडनी,मधुमेह तथा कैंसर के रोगी भी इसी क्षेणी में आते हैं।ज़्यादा जोखिम वाले रोगी वो होते हैं,जो अस्थमा या फेफड़े की बीमारी
से पीड़ित होते हैं,या जिन्हें पहले निमोनिया हो चुका हो। आपातक़ालीन लक्षण -जैसे थकान,बदन दर्द और नाक जाम होना,गले में ख़राश और उल्टी दस्त ,साँस लेने में तकलीफ़,सीने में लगातारदर्द या दबाव,होंठ या चेहरे का रंग नीला पड़ना या चक्कर आना।हालाँकि कुछ संक्रमित लोगों में इनमे से कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता।

क्या एहतियात बरतें–
जब तक आपतक़ालीन लक्षण दिखाई न दें परिवार में दूसरे लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए अलग रूम में रहना होगा।जहाँ तक संभव हो अपना बाथरूम भी अलग रखना होगा। परिवार का कोई सदस्य खाना ,दरवाज़े पर ही रख दे। देखभाल करने वाले व्यक्ति के लिए ये ,निहायत ज़रूरी होगा कि वो मास्क पहनकर ही कमरे में आए।अपना तौलिया,बिस्तर,खाना किसी के साथ शेयर नहीं करना है घर के कौमन प्लेस को खुला रखना ज़रूरी है।जिससे हवा आती रहे।इसके लिए खिड़की खोल कर रखनी चाहिए या एयर-कंडिशनर का इस्तेमाल कर सकते हैं
कैसे होगी साफ़ सफ़ाई–
क्योंकि कमरे में किसी अन्य व्यक्ति की आवाजाही निषिद्ध होगी इसीलिए ,बेडरूम या बाथरूम में टिशू पेपर,तौलिया तथा डिसिन्फ़ेक्टंट रखना ज़रूरी समझा जाता है।यदि बाथरूम साझा है तो ,इस्तेमाल के बाद,तुरंत उसे डिसिन्फ़ेक्टंट करना चाहिए,जिससे दूसरे सदस्य संक्रमण से बचे रहें ।यदि परिवार में दूसरे सदस्य हैं तो उनके लिए दस्ताने और मास्क पहनना ज़रूरी होगा,तथा बिजली का स्विच,नल,टॉयलेट,और रोगी द्वारा छुए जाने वाली चीज़ों को विसंक्रमित करना भी ज़रूरी होगा।
खान पान का कैसे रखें ख़याल–
सामान्य लक्षणों में अपनी देखभाल उसी तरह करनी है जैसे फ्लू के रोगियों की ,की जाती है। क़ोरोना संक्रमित के मरीज़ों को प्रतिदिन २हज़ार कैलरी का भोजन देना अनिवार्य
होता है।डायबिटिक मरीज़ को ब्रेड नहीं देनी है,ना ही संक्रमित मरीज़ को चावल,दही,केला,और खट्टे फल ही देते हैं क्योंकि इससे खाँसी बढ़ने का ख़तरा होता है। मरीज़ को माँसाहारी भोजन देने की भी मनाही है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के लिए हल्दी वाला दूध,फलों में सेबविटामिन बी और सी ,तथा तरल पदार्थ,जैसे ,सूप जैसी चीज़ों का सेवन अति उत्तम माना जाता है।कार्बोहाइड्रेट के लिए आलू,फ़ाइबर के लिए पनीर,अरहर दाल,सोयाबीन दी जा सकती है।
भोजन फ़ाइबर युक्त होना चाहिए। इसमें गाजर की सब्ज़ी,राजमा ,और चने की दाल उपयुक्त है। सुबह के नाश्ते में,जिन मरीज़ों को शुगर नहीं है उन्हें ब्रेड,मक्खन,दलिया,उपमा और पोहा दिया जाना चाहिए।उबला अंडा भी दिया जा सकता है,साथ में एक कप दूध निश्चित अंतराल पर तापमान भी देखना चाहिए। यदि कमज़ोरी इतनी ज़्यादा महसूस हो कि खा-पी न सकें ,और बाथरूम तक भी न जा सकें तो ,ड़ौक्टर से परामर्श करना अनिवार्य होगा।अधिकांशत:कोरोना के मरीज़ की दशा में,सप्ताह बाद सुधार होना शुरू हो जाता है।
एक सवाल-
क्या परिवार के अन्य सदस्यों को काम पर जाना चाहिए? नहीं,यदि परिवार में कोई व्यक्ति संक्रमित या संदिग्ध संक्रमित हो तो पूरे परिवार को १४ दिन के क्वारेंटाइन में
रहना चाहिए।
कब ख़त्म करें आयसोलेशन–
डब्ल्यू एचओ की सलाह है क़ि लक्षण समाप्त होने के बाद रोगी को १४ दिन तक आयसोलेट रहना चाहिए,लेकिन सीडीसी की गाइडलाइन में कहा गया है कि कोराना संक्रमण के समाप्त हो जाने के बाद,बाहर निकलने से पहले इन तीन बातों का ध्यान रखना चाहिए-
१-बुखार की दवाई बंद करने के बाद ७२ घंटों तक बुखार न हो।
२-अन्य लक्षण जैसे खाँसी,ज़ुकाम,और साँस लेने में तकलीफ़ न हो।
३-पहली बार लक्षण प्रगट होने के बाद कम से कम सात दिन बीत गए हों।
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