बच्चे और शरारत तो मानो एक दूसरे के पर्यायवाची शब्द हों। बच्चे हर जगह शरारत करते हैं। उनकी कुछ एक हरकतों की वजह से आप को शर्मिंदा भी होना पड़ सकता है। लेकिन उन्हें कहा पर कैसे पेश आना है यह उनके मां बाप ही सीखा सकते हैं। आप अपने शैतान बच्चे को एक अच्छा इंसान बना सकते हैं। लेकिन बचपन में उन्हें थोड़ी बहुत शरारत की अनुमति भी मिलनी चाहिए। यदि आप चाहते हैं कि आप के बच्चे में भी अच्छे संस्कार दिखें तो आप निम्नलिखित टिप्स का पालन करें। 

उन्हें अच्छी अच्छी कहानियां सुनाएं : बच्चो के दिमाग पर उसी का असर पड़ता है जो वो सुनते या देखते हैं। इसलिए उन्हें एक अच्छा इंसान बनाने के लिए प्रेरणादायक कहानियां सुनाएं या टीवी पर दिखाएं। उन्हें आप किसी महा पुरुष जैसे एपीजे अब्दुल कलाम या स्वतंत्रता सेनानियों आदि की जीवनी भी सुना सकते हैं जिससे वे प्रेरित हों। या फिर आप उनके मनोरंजन के लिए उन्हें पंचतंत्र की कहानियां सुनाएं जिससे उन्हें एक अच्छी सीख मिलें। हर कहानी की एक सीख होती है यदि आप के बच्चे उस सीख को समझ लेंगे तो वह निश्चय ही एक अच्छे इंसान बनेंगे। 

उन्हें म्यूजिक के माध्यम से सिखाएं : बच्चो को म्यूजिक सुनना बहुत पसंद होता है। अतः जब भी वे किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई ऐसी हरकत करते हैं जिनकी वजह से आप को शर्मिंदा होना पड़े तो आप उन्हें वह बात म्यूजिक के माध्यम से सीखा सकते हैं। आप कोई ऐसी कविता या ऐसा सोंग चला सकते हैं जिस को देखने से उन्हें पता चले की क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।जैसे हम यदि कुछ खाते हैं तो हमें ज्यादा आवाज करने की बजाए चुपके से खाना चाहिए या फिर जब हमें किसी को आगे से हटाना हो तो उन्हें एक्सक्यूज मी बोलना न भूलें। ये सब बातें आप एक मनोरंजक तरीके से अपने बच्चे को सीखा सकते हैं। आप इस काम के लिए म्यूजिक का सहारा ले सकते हैं। यूट्यूब पर ढेर सारी ऐसी विडियोज मिल जाएंगी। 

अपने घर पर ही डिनर करने का अभ्यास करें : यदि आप अपने बच्चो को कहीं बाहर डिनर पर ले जाना चाहते हैं और आप को पता है कि आप के बच्चे वहां शरारत करेंगे तो आप को एक बार अपने घर पर ही उन्हें कैसे डिनर करना है उस का अभ्यास करा सकते है। इससे बच्चे सीख जाएंगे कि उन्हें बाहर जा कर शैतानी नहीं करनी है और वह कोई भी ऐसी हरकत नहीं करेंगे जिस की वजह से आप को शर्मिंदा होना पड़े। आप उन्हें टेबल पर बैठने का व्यवहार सीखा सकते हैं। आप उन्हें धन्यवाद या प्लीज़ कहना सिखाएं ताकि जब वह किसी अन्य से किसी चीज को मांगने की रिक्वेस्ट करें तो वह थैंक यू या प्लीज़ बोलें। यदि वह कोई गलती करते हैं तो उन्हें सॉरी कहना भी अवश्य सिखाएं। यदि आप के बच्चे बाहर जा कर इतने अच्छे से पेश आएंगे तो इसमें आप की ही वाह वाही होगी। क्योंकि बच्चे वैसे ही व्यवहार करते हैं जैसे उनके माता पिता उन्हें सिखाते हैं।

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