“महाराज! आपको बीरबल जैसे सयाने आदमी को स्वर्ग भेजना चाहिए ताकि वह आपके पुरखों का हाल-चाल पता कर सके!” राजा को भी उपाय अँच गया। नाई ने भेजने का उपाय भी बता दिया।
दरबार में उन्होंने सबके सामने बीरबल को स्वर्ग भेजने की बात कही। उन्होंने घोषणा की, “बीरबल को एक चिता पर बैठा कर, आग लगा दी जाएगी। उसी धुएँ के साथ वह स्वर्ग पहुँच जाएगा।”
बीरबल यह सुन कर चौंक गया, पर उसने एक शब्द भी नहीं कहा। उसने चुपचाप उस स्थान से अपने घर तक एक सुरंग खोद ली, जहाँ उसकी चिता तैयार की जानी थी। तयशुदा दिन पर वह चिता पर बैठ गया। उसके पूरे शरीर को लकड़ी के लट्ठों से ढक दिया गया। जैसे ही चिता में आग लगाई गई, बीरबल चुपचाप सुरंग के रास्ते निकल गया।
किसी को पता तक नहीं चला और वह सही-सलामत घर आ गया। वह भेष बदल कर घर से निकला। उसने पूरे शहर में घूम कर पता लगाया कि कौन लोग उसे मारने की साजिश में शामिल थे।
कुछ दिन बाद बीरबल अकबर के दरबार में पहुँचा। उसने कहा, “महाराज! । आपके पुरखे स्वर्ग में मजे से हैं। हालांकि, वे अपनी बढ़ी हुई दाढ़ियों से थोड़ा परेशान हैं। उन्होंने मुझसे कहा है कि आप झट से अपने नाई और कुछ दरबारियों । को स्वर्ग भेज दें।”
बादशाह मान गए और झट से ऐसा करने का आदेश दे दिया। नाई और दरबारी सकते में आ गए, पर अब उनके पास राजा का हुक्म मानने के सिवा दूसरा उपाय भी कहाँ था। हालांकि, उन्हें अहसास हो गया था कि चतुर बीरबल को मूर्ख बनाना इतना आसान नहीं था।
