हेल्थ एक्सपर्ट ऋतु कहती हैं कि जिंदगी यूंही खुशहाल कटती रहे, इसके लिए जरूरी है कि हम दिमागी तौर पर तंदरुस्त रहें। पर इसके लिए आप क्या करेंगी? दादी मां के नुस्खे वाला बादाम दूध पिएंगी या फिर आपको लग रहा है कि जिगसा पजल और सूडोकू खेलनाभर फायदेमंद होगा तो आप गलत हो सकती हैं। क्योंकि दिमागी तंदरुस्ती ऐसे तो बिलकुल नहीं मिलती है। इसके लिए आपका खानपान आपकी दिमागी सेहत पर सबसे बड़ा रोल अदा कर सकता है। जबकि इस बारे में हममे से ज्यादातर लोग सोचते भी नहीं हैं। हम वजन कम करने और सुंदर दिखने की कोशिश तो करते हैं लेकिन ये बिलकुल नहीं सोचते कि अच्छे खानपान से दिमाग तेज करने की कोशिशें की जानी चाहिए। ये बहुत कठिन भी नहीं है। इसके लिए खानपान में थोड़े बहुत बदलाव करने की जरूरत होगी। फिर देखिएगा कि कैसे आपके शरीर के साथ दिमाग भी फिट होता चला जाएगा और सरपट दौड़ता चला जाएगा-

हल्दी करेगी कमाल-
हल्दी को हमेशा से स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन माना गया है। इसको ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट माना जाता है, जो कैंसर तक के इलाज में फायदेमंद है। कह सकते हैं शरीर के हर हिस्से में ये फायदा पहुंचाती है। कानपुर यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ साइन्सेस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. भारती दीक्षित कहती हैं, कुछ नई स्टडी कहती हैं कि हल्दी में न्यूरोप्रोटेक्टिव एजेंट होता है, जो न्यूरोलोजिकल डिसऑर्डर को सही करने में मदद करता है। ये अलजाईमर और ट्यूमर तक के लिए फायदा करता है। मतलब समझना ये है कि हल्दी का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा खाने में किया जाना चाहिए। इससे ब्रेन तो स्वस्थ्य होगा ही, बाकी शारीरिक दिक्कतों में भी सुधार होगा।
मछली खाइए, दिमाग रखिए तंदरुस्त-
ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली सैमन आपके दिमाग तक तंदरुस्ती का स्वाद भी पहुंचाएगी। इसमें इतनी पौष्टिकता है कि ये बच्चों में होने वाले एडीएचडी यानि अटेन्शन डेफ़िसिट- हायपर एक्टिव डिसऑर्डर को भी ठीक कर सकती है। डॉ. भारती कहती हैं कि इस सैमन मछली के सेवन से दिमागी परेशानी अवसाद में भी सुधार होता है। कह सकते हैं कि ये अवसाद होने ही नहीं देती है। दरअसल ये अवसाद होने का रिस्क ही कम करती जाती है। इसके अलावा कौगनिटिव यानि शरीर की ज्ञान संबंधी क्रियाओं को भी ठीक रखता है। कुलमिलाकर मछली खाने के शौकीनों का दिमाग मान लीजिए तेज ही होता है।
सेब करेगा दिमाग का पोषण-
वैसे डॉक्टर हमेशा से दिन में एक सेब खाने की सलाह देते हैं। पर हममें से कितने लोग इसको मानते ही हैं। पर अब ये सलाह मान लीजिए क्योंकि सेब का दिमागी तंदरुस्ती से भी गहरा नाता है। ये आपके दिमाग को मजबूत तो करेगा ही आपकी टेंशन कम करने में भी कारगर होगा। डॉ. भारती कहती हैं कि सेब से जुड़ी एक स्टडी भी है, जिनमें अनोखे रिजल्ट सामने आए थे। इसमें उन छात्रों पर ध्यान दिया गया था, जिन्होने लंच में सेब खाया था। इन छात्रों को दिमागी स्वास्थ्य से जुड़े ढेरों फायदे हुए थे, जैसे ज्ञानात्मक सुधार, अल्जाइमर के लक्षणों में सुधार, दिमागी स्वास्थ्य को फायदा। सेब खाना कई तरह से फायदेमंद है, इसलिए इसको अपने आहार में शामिल कर ही लेना चाहिए। बिना भूले अबसे रोज एक सेब जरूर खाइएगा।

डार्क चॉकलेट के लीजिये खूब मजे-
शायद जानकार ताज्जुब हो लेकिन डार्क चॉकलेट आपके दिमागी स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है, मतलब डार्क चॉकलेट अब सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाएगी, आपके दिमाग को भी तेज करेगी। इसलिए अगली बार जब पति देव आपके लिए ये वाली चॉकलेट लाएं तो वजन बढ़ जाने की शिकायत ना करिएगा। बल्कि खुद को याद दिलाइएगा कि ये आपके दिमाग को तेज करेगी। और ऐसा इसलिए होगा क्योंकि इसमें ऐसे तत्व होते हैं जो दिमाग में खून के संचार को ठीक रखने में मदद करते हैं। आइरन, मेग्नेशियम और फाइबर के साथ फ्लेवोनोल्स ऐसे ही तत्व होते हैं। डॉ. भारती कहती हैं कि डार्क चॉकलेट तनाव के प्रभाव को खत्म करता है तो याददाश्त भी बढ़ाता है। इसके साथ ही ये प्रोब्लेम सोलविंग स्किल को बढ़ाता है तो डिमनेशिया के रिस्क को भी कम करती है।
बादाम देंगे दिमाग को ताकत-
बादाम में दिमाग को शक्तिशाली बनाने की इतनी ताकत होती है कि इसको ब्रेन फूड भी कहा जाता है। इसमें इतना विटामिन ई होता है कि कोगनीटिव डिकलाइन से तो बचाता ही है, सतर्कता बढ़ाता है और याददाश्त भी मजबूत करता है। बादाम आपके दिनभर के खाने में मौजूद बी2 का 17 प्रतिशत शरीर को देता है। बी2 खाने को शरीर की ऊर्जा में बदलता है। डॉ. भारती कहती हैं कि बादाम में प्रोटीन बहुत होता है, जो दिमाग के सेल्स की मरम्मत करता रहता है साथ में ये याददाश्त को भी बढ़ाता है।
ग्रीन टी करेगी रखेगी दिमाग का ख्याल-
ग्रीन टी एक ऐसी ड्रिंक है, तो अब भारतीय किचन का हिस्सा बन चुकी है। ज़्यादातर घरों में इसका सेवन सेहत का ख्याल रखने के नजरिए से किया जाने लगा है। पर किसी को ये पता ही नहीं है कि जो लोग इसका इस्तेमाल करते हैं, वो अपने दिमाग का भी पोषण करते हैं क्योंकि ग्रीन टी ब्रेन फंकशन में भी सुधार करती है। एक तरह से इससे दिमाग का भरपूर पोषण होता जाता है। इसके सेवन से सतर्कता, याददाश्त और ध्यानकेन्द्रित करने में भी मदद मिलती है। डॉ. भारती कहती हैं कि एक खास तरह का अमीनो एसिड एल-थेयनीन होता है, जो गाबा नाम के नियरोट्रांसमीटर क्रियाओं को बढ़ा देता है। जिसकी वजह से चिंता और तनाव कम होते हैं। दिमाग ज्यादा रिलैक्स महसूस करता है। इतना ही नहीं इस चाय में पोलीफेनल्स और एंटीओक्सीडेंट्स भी भरपूर होते हैं। जो मानसिक तनाव से दिमाग को सुरक्षित रखते हैं। इसके नियमित सेवन से अलजाईमर और पार्किंसन के खतरे से भी बचा जा सकता है।
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