स्वामी जी के मन में पूरे एक वर्ष से विश्व धर्म सभा में जाने की योजना चल रही थी। उसके लिए धन का प्रबंध होना भी आवश्यक था। उन्होंने इस काम की शुरुआत दक्षिण भारत से की। उन्होंने अपने व्याख्यानों का विषय रखा ‘मेरी पाश्चात्य यात्रा का उद्देश्य । दक्षिण भारत के शहरों के अलावा उन्हें देश के दूसरे हिस्सों से भी कई निमंत्रण मिले।
उनके एक शिष्य आलासिंगा पेरूमल ने भी धन एकत्र करने के अभियान में पूरा सहयोग दिया। स्वामी जी कहते थे, “यदि मां की इच्छा होगी तो इसके लिए आवश्यक धन, यहां की जनता से ही आना चाहिए क्योंकि मैं भारत की अभावग्रस्त जनता के लिए ही विदेश गमन कर रहा हूं।” भले ही इस काम में समय लगा पर वे अपने लक्ष्य पर अडिग रहे।

स्वामी जी के एक मित्र व शिष्य खेतड़ी महाराज उनके सहयोगी थे। उन्होंने स्वामी जी के आशीर्वाद से ही पुत्र – रत्न पाया था। वे चाहते थे कि स्वामी जी उनके घर पर आयोजित पारिवारिक समारोह में भाग लें। स्वामी जी का कहना था कि वे एक संन्यासी हैं। उनका ऐसे आनंदोत्सवों में क्या काम परंतु अपने एक शिष्य के कहने पर वे वहां उत्सव में भाग लेने चले गए।
खेतड़ी महाराज ने अपने मित्र का स्वागत किया। उन्हें पूरे दो सप्ताह तक अपने पास रखा। उन्होंने भी अमेरिका प्रवास के लिए धन का प्रबंध करने में अपना योगदान दिया।
स्वामी विवेकानंद जी उत्साहित हो उठे और बोले, “जिस तरह से लोगों का सहयोग मिल रहा है, उससे लगता है कि मेरी शिकागो यात्रा के लिए माता का आशीर्वाद है और मां की इच्छा से ही मेरी विदेश यात्रा का प्रायोजन पूरा होगा। मैं माता की इच्छा से ही अपने लक्ष्य में सफल हो जाऊंगा । “
स्वामी कहते थे कि कोई भी काम त्याग व समर्पण के बिना पूरा नहीं हो सकता। हमें प्राणी मात्र के कल्याण के लिए सहयोग देना चाहिए। वे सहायता शब्द का विरोध करते थे। उनका कहना था कि हमें दूसरे के लिए कर्म करने का अवसर मिला, हम धन्य हैं।

“ इस सहायता शब्द को हमें अपने मन से निकाल देना चाहिए। यह मत सोचना कि तुम किसी की सहायता कर सकते हो। यह तो घोर पाप है। तुम तो स्वयं ईश्वर की इच्छा से यहां हो। क्या तुम कहना चाहते हो कि तुम प्रभु की सहायता करते हो? नहीं, सहायता नहीं, तुम उनकी पूजा करते हो । “
उनके कहने का मतलब था कि प्राणी मात्र का कल्याण करना एक पूजा है। हर प्राणी में ईश्वर का अंश विद्यमान है। जब हम किसी की सहायता करते हैं तो परोक्ष रूप से भगवान की ही प्रार्थना करते हैं।

