बात है पुरानी लेकिन मन की गहराई में उतर कर आज भी मुझे गुदगुदाती है। मेरी उम्र होगी आठ या नौ साल, बचपन में नानी-मामा के यहां अपरिहार्य कारणों से रही। एक दिन मेरे मामाजी शेव करके ब्रश साफ करने बाथरूम गए, रेजर में ब्लेड लगा हुआ था। जब मामाजी शेव कर रहे थे, मैं उनको बहुत गौर से देख रही थी। उनके जाने के बाद, उत्सुकतावश अपनी एक आई ब्रो पर ही रेजर चला दिया। एक आई ब्रो का मुंडन हो गया, जबकि एक सही सलामत बची थी। मेरी नानी-मामा, नाना सब मुझे देख कर हंसने लगे। माजरा समझने में नहीं आया, तब नानी जी ने दर्पण में मुझे चेहरा देखने को कहा। देखा, तो मैं कार्टून बनी हुई थी। मजबूरी में दूसरी आइब्रो का भी मुंडन करना पड़ा। सबके बीच में हंसी का पात्र तो बनी ही।

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