सुख-समृद्धि के लिए शुक्रवार को करें महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ, जीवन में होगी धन वर्षा: Mahalaxmi Stotram
Mahalaxmi Stotram

Mahalaxmi Stotram: हिंदू धर्म में सभी देवताओं का अपना स्थान और महत्व है। सभी देवताओं की पूजा विधि से लेकर दिन निर्धारित है। सोमवार का दिन भगवान शिव का होता है तो बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इसी तरह शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का माना गया है। मां लक्ष्मी धन की देवी हैं। जो भी भक्त मां लक्ष्मी की सच्ची श्रद्धा से आराधना करता है उसके जीवन में कभी सुख—समृद्धि व धन का अभाव नहीं रहता है। मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा अर्चना करने से धन, यश व समृद्धि की प्राप्ति होती है। पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि शुक्रवार के दिन महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना बेहद लाभकारी होता है। महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ करने से जीवन में सुख—शांति बनी रहती है और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ करने के लाभ और जाप विधि।

महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ के लाभ

Mahalaxmi Stotram
Mahalaxmi Stotram Path Benefits

धर्म शास्त्रों में धन व यश की देवी मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय बताए गए हैं। जिसमें एक उपाय महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ से जुड़ा हुआ है। शुक्रवार के दिन महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ का जाप करना उत्तम होता है। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे भक्तों की सभी मुराद पूरी होती है और धन, प्रसिद्धि और सफलता मिलती है। शास्त्रों के अनुसार, महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ मां लक्ष्मी को बेहद प्रिय हैं। इसके जाप से मां लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। इससे आर्थिक संकट से छुटकारा मिलता है और साथ में धन संबंधित परेशानी दूर होती है। जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

कैसे करें महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ

Mahalaxmi Stotram Path
Mahalaxmi Stotram Path

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद माता की चौकी तैयार करें। उस पर मां लक्ष्मी को विराजमान करें और माता का ध्यान करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा आरंभ करें। मां लक्ष्मी को सिंदूर, जल, अक्षत, फूल, माला, सुपारी, नारियल, पान आदि अर्पित करें। इसके बाद धूप व दीपक जलाएं और मां का ध्यान करें। इसके बाद महालक्ष्मी स्तोत्र पाठ शुरू करें। पाठ करते समय पूरा ध्यान मां की भक्ति में लगाएं। इसके बाद पूजा संपन्न कर देवी लक्ष्मी से सुख—समृद्धि व सौभाग्य की कामना करें और आशीर्वाद लें।

महालक्ष्मी स्तोत्र (Mahalaxmi Stotra)

Mahalaxmi Stotram

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
सर्वज्ञे सर्ववरदे देवी सर्वदुष्टभयंकरि।
सर्वदु:खहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे।
महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणी।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं य: पठेद्भक्तिमान्नर:।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा।।
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्।
द्विकालं य: पठेन्नित्यं धन्यधान्यसमन्वित:।।
त्रिकालं य: पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा।।

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