उत्तराखंड के सत्ताल के बारे में जानिए

सत्ताल जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह सात परस्पर जुड़ी झीलों का एक आकर्षक समूह है।

Sattal Tourism: हमारे देश में घूमने और टहलने के लिए जगहों की कोई कमी नहीं है। ऐसी ही एक जगह है सत्ताल जोकि उत्तराखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और अपने सात ताजे पानी की झीलों के समूह के लिए जाना जाता है। यह जगह देश भर में लोकप्रिय है और इस जगह को सत्ताल नाम इन सात झीलों की वजह से ही मिला है। इस जगह पर हर रोज़ हज़ारों सैलानी आते हैं और यहाँ के प्राकृतिक वातावरण में खो जाते हैं। दरअसल, सत्ताल को जाना भी यहाँ के प्राकृतिक वातावरण और तरह-तरह के पाए जाने वाले पक्षियों की वजह से ही है। यह जगह पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों के लिए बिल्कुल स्वर्ग के सामान है। जिसकी वजह से सैलानी इस जगह पर पूरे साल आते रहते हैं। यदि आप सत्ताल यात्रा की योजना बना रहें हैं तो इन तमाम जगहों पर घूमना और एंजोय करना बिल्कुल भी नहीं भूलना। 

सत्ताल में जीव और वनस्पति 

सत्ताल उत्तरखंड का एक ऐसा पर्यटन स्थल है, जहाँ के सुखद वातावरण और मनभावन मौसम की वजह से पूरे साल पर्यटक आते हैं। देश में मौजूद अन्य पर्यटन स्थलों से यह बिलकुल ही अलग यह जगह अन्य जगहों की तुलना में आज भी बहुत अधिक प्राकृतिक है। कुमाऊँ जिले में स्थित सत्ताल कई बड़े पर्वतों से घिरा होने के कारण अधिक ख़ूबसूरत दिखाई देता है। इस जगह पर आकर आपको जो प्राकृतिक छटा और जैव विविधता देखने को मिलती है वह शायद ही कहीं और देखने को मिल पाए। सत्ताल कई प्रवासी पक्षियों का निवास स्थान है और विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधों को आश्रय देता है। इस स्थान पर जड़ी-बूटियाँ, फर्न, झाड़ियाँ और बाग़ काफी मात्र में पाए जाते हैं। इन सबके अलावा सत्ताल में विभिन्न प्रकार की मछलियों और तितलियों की प्रजातियों को भी देखा जा सकता है। 

सत्ताल का प्रमुख आकर्षण सेवन लेक

सत्ताल जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह सात परस्पर जुड़ी झीलों का एक आकर्षक समूह है। समुद्र तल से तक़रीबन 1370 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद इन झीलों की ख़ूबसूरती को भला कौन नहीं देखना चाहेगा। इससे भी ख़ास बात यह कि इन झीलों के पानी के स्रोत भूमिगत स्प्रिंग्स हैं, इन्हीं भूमिगत स्प्रिंग्स से इनमें पानी आता है। इन सभी झीलों के नाम हिंदू धर्म से जुड़े हुए हैं। इन सात अकर्षक झीलों में नल दमयंती ताल, पन्ना ताल, राम ताल, लक्ष्मण ताल, सीता ताल, पूर्ण ताल और सुख ताल के नाम शामिल हैं।

 सत्ताल में घूमने की जगह भीमताल 

नैनीताल से तक़रीबन 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भीमताल काफ़ी अच्छा और लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। यह अपनी खूबसूरत भीमताल झील और द्वीप लिए जाना जाता है। जिसकी वजह से इस जगह पर पूरे साल पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। समुद्र तल से 1370 मीटर की ऊंचाई पर होने की वजह से यह मौसम के लिहाज़ से भी काफ़ी अच्छा रहता है। यह सड़क मार्गों अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है जिसकी वजह से पर्यटक देश के सभी प्रमुख जहगों से भीमताल आसानी से पहुंच सकते हैं। 

सत्ताल के पास मशहूर जगह नैनीताल 

नैनीताल देश का एक लोकप्रिय हिल स्टेशन है। इस जगह पर हर रोज़ हज़ारों सैलानी आते हैं। समुद्र तल से तक़रीबन दो हज़ार मीटर की ऊँचाई पर होने के कारण इस जगह का मौसम और जलवायु दोनों ही बहुत ही ख़ूबसूरत और मनभावन हो जाती है। इस जगह पर पहुँचकर मौसम और ख़ूबसूरती का जो तालमेल देखने को मिलेगा वह नैनीताल के अलावा आपको शायद ही कहीं और देखने को मिले। हिमालय के कुमाऊं पर्वतमाला की हरी-भरी तलहटी में बसी यह जगह सचमुच बहुत ही लाजवाब है। नैनीताल का सबसे बड़ा आकर्षण इस जगह पर मौजूद झील है। शहर के केंद्र में स्थित नैनी झील को देखकर ऐसा लगता है कि इसे ही तो देखने के लिए हम नैनीताल आए थे। इस जगह पर आना इसलिए भी सुविधाजनक है देश की राजधानी दिल्ली से बेहद करीब है। पर्यटक इस जगह पर आकर नैनी झील में बोटिंग करने के साथ स्थानीय व्यंजनों का आनंद उठा सकते हैं।

सत्ताल का दर्शनीय स्थल सुभाष धारा 

भीमताल के पास सुभाष धारा एक ताजा पानी का प्राकृतिक झरना है। ओक के घने जंगल में बहता यह झरना काफ़ी ख़ूबसूरत दिखाई देता है। इस जगह से गुज़रने वाले पर्यटकों को अपनी तरफ़ खिंचता है। पर्यटक इस जगह पर रुककर इससे बहते निर्झर पानी को देखते और फ़ोटोग्राफ़ी करते हैं। यह प्राकृतिक रूप से काफ़ी ख़ूबसूरत और शांत वातावरण प्रदान करता है। इस जगह पर शांति के साथ समय बिताना आपको अच्छा लगेगा। 

सत्ताल का पर्यटन स्थल तितली संग्रहालय 

जॉन एस्टेट में स्थित बटरफ्लाई फार्म संग्रहालय सत्ताल की सबसे ख़ास जगहों में शुमार की जा सकती है। बटरफ्लाई फार्म संग्रहालय सत्ताल की एक ऐसी जगह है जो आपको प्रकृति के करीब होने का अहसास कराएगी और इस जगह पर आखर रंग बिरंगी तितलियों को देखकर आपका मन ख़ुश हो जाएगा। यह जानकार आपको आश्चर्य होगा कि इस तितली संग्रहालय में कीटों की 110 प्रजातियों और तितलियों की लगभग 2500 से अधिक प्रजातियों का आवास है।  यह जगह प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग के सामान है। यदि आप सत्ताल यात्रा पर जाने की योजना बना रहें हैं तो बटरफ्लाई संग्रहालय को अपनी लिस्ट में अवश्य शामिल करें।

सत्ताल में घूमने की जगह मेथोडिस्ट आश्रम 

सत्ताल में स्थित मेथोडिस्ट आश्रम एक ऐसा स्थान है जो शहर के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ औपनिवेशिक वास्तुशिल्प को ज़ाहिर करता है। इस जगह पर आकर आपको पुराने समय की कई ऐतिहासिक चीज़ों को देखने और जानने का अनुभव होगा, साथ ही साथ आप औपनिवेशिक वास्तुशिल्प की झलक भी आप देख पाएँगे। सेंट जॉन्स चर्च आश्रम के परिसर में स्थित मेथोडिस्ट आश्रम का निर्माण महात्मा गाँधी के एक दोस्त स्टेनली जोन्स ने वर्ष 1930 में करवाया। इस जगह पर आकर आप एकांत और शांति का अनुभव कर सकते हैं।

सत्ताल की यात्रा के लिए टिप्स 

सत्ताल जाने वाले लोगों के लिए अच्छा होगा कि अपनी यात्रा के पहले दिन सत्ताल पहुँचकर आसपास के स्थानों की सैर करें और यदि थोड़ा बहुत साहसिक पर्यटन का शौक़ रखने हैं तो सात झीलों के पास कैम्पिंग का मज़ा लें। इस जगह पर कैम्पिंग के साथ साथ मछली पकड़ने और बोटिंग जैसे मज़ेदार काम भी आप कर सकते हैं। यात्रा के दूसरे दिन सत्ताल के सभी प्रमुख दर्शनीय स्थलों की यात्रा कर सकते हैं। सत्ताल घूमने के क्रम में सुभाषधारा तथा मेथोडिस्ट आश्रम जैसी जगहों पर जा सकते हैं। 

घूमने जाने का सबसे अच्छा समय 

गर्मियों के दौरान सत्ताल की यात्रा काफी अच्छी होती है क्योंकि यह जगह गरमियों में भी ठंडी होती है। इसलिए दिल्ली और आसपास के शहर जहां पर गर्मी अत्यधिक होती है इस जगह पर छुट्टियाँ व्यतीत करने के लिए आते हैं। देश में जब सब जगह गर्मी होती है तो सत्ताल में सुखद मौसम होता है। सर्दियों के समय कड़ाके की ठंड पड़ती है, लेकिन इस दौरान भी यहाँ का मौसम बेहद ही सुहाना होता है। यदि आप सर्दियां के दौरान सत्ताल यात्रा की योजना बना रहे हैं तो कुछ गरम कपड़े ज़रूर रखें।

सत्ताल उत्तराखंड कैसे पंहुचा जाये 

सत्ताल में कोई अपना हवाई अड्डा, रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड नहीं है, लेकिन यह उत्तराखंड के कुछ प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इसलिए पर्यटकों को देश के किसी भी कोने से सत्ताल की यात्रा करना आसान है। सत्ताल का निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर और रेलवे स्टेशन काठगोदाम में है। सत्ताल तक पहुँचने के लिए कैब सेवाएं भी आसानी से उपलब्ध हैं।

संजय शेफर्ड एक लेखक और घुमक्कड़ हैं, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हुआ। पढ़ाई-लिखाई दिल्ली और मुंबई में हुई। 2016 से परस्पर घूम और लिख रहे हैं। वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन एवं टोयटा, महेन्द्रा एडवेंचर और पर्यटन मंत्रालय...

Leave a comment