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रावण—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: लंकापति रावण था सबसे बलसालीफिर भी न्याय पड़गया उसपे भारी ।।स्वर्ण नगरीको वो बचा न पायादस सिर भी उसके काम न आया ।।विजयादशमी याद दिलाती हे उसकि कहानीकहानी जो आज भी नहीं हुई पुरानी ।।हर घर में आज रावण है बस गयाअहंकार और घमंड का हो रहा बोलबाला ।।संचार गति से सब ज्ञानी […]

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”मौन की आवाज”-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: मैं बोलती नहीं,पर भीतर एक nadi बहती है,शब्द नहीं, संवेदनाएँहर लहर में कहती हैं कुछ। मैं चुप रहती हूँ,पर मेरी आँखें अक्सरसवाल करती हैं खुद से,और उत्तर भी खोज लेती हैंअंधेरों की परछाइयों में। दीवारों से नहीं टकराती,मैं खुद से टकरा जाती हूँ,जहाँ मेरी खामोशीमुझसे सबसे ऊँची आवाज़ मेंकहती है —“तू टूटी नहीं है, […]

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प्रतीक्षा शिव की—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: जरुरी तो नहींहर तपस्या जंगल से हीं प्रारम्भ होएक दूसरे से दूर रहके इन महीनों मेंएक तपस्या  हमने  भी तो की हैंमेरी जिंदगी तुमने………तुम्हारी जिंदगी मैंने जी हैं…….. तपस्या मौन कीतपस्या शोर कीतपस्या  इंतजार कीतपस्या समझौते  कीतपस्या  जुदाई  कीतपस्या एतबार की…….. तपस्या समर्पण कीतपस्या  मर्यादा कीतपस्या  अभिव्यक्ति कीतपस्या  राग कीतपस्या  विराग कीतपस्या  उलझी  हुई पहेली  […]

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फिर से उठूंगी मैं-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तोड़ दो चाहे मेरी राहें, बिखेर दो मेरे सपनों के पंख। पर देखो, हर बार गिरकर भी, और ऊँची उड़ान भरूंगी मैं।तुम्हारी नफ़रत की आग से, सिर्फ़ तपकर चमकूंगी मैं। तुम्हारे तानों के पत्थरों से अपना किला गढ़ूंगी मैं।मुझे दबाओ जितना दबा सकते हो, इतनी ही ताक़त से फूटूंगी मैं। अंधेरों के उस पार कहीं, एक नया सूरज रचूंगी मैं।मेरे आँसू  मेरी हार नहीं हैं, ये तो मेरे […]

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