Hindi Poem
Hindi Poem

Hindi Poem: तोड़ दो चाहे मेरी राहें,
 बिखेर दो मेरे सपनों के पंख।
 पर देखो, हर बार गिरकर भी,
 और ऊँची उड़ान भरूंगी मैं।
तुम्हारी नफ़रत की आग से,
 सिर्फ़ तपकर चमकूंगी मैं।
 तुम्हारे तानों के पत्थरों से
 अपना किला गढ़ूंगी मैं।
मुझे दबाओ जितना दबा सकते हो,
 इतनी ही ताक़त से फूटूंगी मैं।
 अंधेरों के उस पार कहीं,
 एक नया सूरज रचूंगी मैं।
मेरे आँसू  मेरी हार नहीं हैं,
 ये तो मेरे बीज हैं—
 जो कल उगेंगे जंगल बनकर,
 और हवा को महक देंगे।
तुम्हारी जीतें भी छोटी पड़ेंगी,
 जब मैं खड़ी रहूंगी मुस्कुराती,
 और दुनिया देखेगी हैरत से
 कैसे हर चोट को गीत बनाती।
हाँ, मैं राख से जन्मी चिंगारी हूँ,
 आंधी को भी झुका दूँगी।
 तुम्हारे हर ‘नहीं’ के बीच से
 अपना ‘हाँ’ खोज लाऊँगी।
फिर से मैं उठूंगी,
 बार-बार उठूंगी—
 जब तक मेरी साँसों में
 सपनों का संगीत गूंजता रहेगा।