Posted inआध्यात्म

शक्तिपात एक दोहरी घटना है

प्रश्न- ओशो, क्या केवल शक्तिपात के माध्यम से कुंडलिनी सहस्रार तक विकसित हो सकती है? उसके सहस्रार पर पहुंचने पर क्या समाधि का एक्सप्लोजन हो जाता है? यदि शक्तिपात के माध्यम से कुंडलिनी सहस्रार तक विकसित हो सकती है, तो इसका अर्थ यह हो जाएगा कि दूसरे से समाधि उपलब्ध हो सकती है!

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