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नीलकंठ-गुलशन नन्दा भाग-34

गुसलखाने का किवाड़ बंद हुआ और बेला के विचारों की डोर कट गई। उसने दृष्टि घुमाकर उधर देखा। संध्या नहाने चली गई थी। सहसा एक विचार ने अचानक उसके मस्तिक पर हथौड़े मारने आरंभ कर दिए, चोटों की गति बढ़ती गई और वह बेचैन होकर तड़पने लगी। नीलकंठ नॉवेल भाग एक से बढ़ने के लिए […]

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