तीसरा दृश्य: (रात का वक्त – हुसैन अब्बास मसजिद में बैठे बातें कर रहे हैं। एक दीपक जल रहा है।) हुसैन – मैं जब ख़याल करता हूं कि नाना मरहूम ने तनहा बड़े-बड़े सरकश बादशाहों को पस्त कर दिया, और इतनी शानदार खिलाफत कायम कर दी, तो मुझे यकीन हो जाता है कि उन पर […]
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कर्बला – मुंशी प्रेमचंद -1
पहला दृश्य: {समय – नौ बजे रात्रि। यजीद, जुहाक, शम्स और कई दरबारी बैठे हुए हैं। शराब की सुराही और प्याला रखा हुआ है।} यजीद – नगर में मेरी खिलाफ़त का ढिंढोरा पीट दिया गया? जुहाक – कोई गली, कूचा, नाका, सड़क, मसजिद, बाजार, खानकाह ऐसा नहीं है, जहां हमारे ढिंढोरे की आवाज न पहुंची […]
कर्बला – मुंशी प्रेमचंद
(Karbala) कर्बला : एक परिचय मुंशी प्रेमचंद का “कर्बला” एक उनके महत्वपूर्ण नाटक है जो भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह नाटक मुस्लिम समुदाय की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना, करबला की घटना, पर आधारित है, जो हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों के बलिदान की कहानी को उजागर करता है। कहानी का […]
