पिछले कुछ वर्षों से जिस मदर्स डे को मनाने की परंपरा ने पश्चिम से प्रवेश कर भारत के युवा वर्ग पर अच्छा-खासा प्रभाव डाला है, माना जाता है कि इस मदर्स डे का प्रारंभ, एक अमेरिकन एक्टिविस्ट एना जारविस ने सन उन्नीस सौ आठ में ‘सेकंड संडे (मई माह का दूसरा रविवार) के रूप में किया।
