सोना सत्रहवें साल में थी और इस साल उसका विवाह करना आवश्यक था । होरी तो दो साल से इसी फिक्र में था पर हाथ खाली होने से कोई काबू न चलता था । मगर इस साल जैसे भी हो, उसका विवाह कर देना ही चाहिए, चाहे कर्ज लेना पड़े, चाहे खेत गिरों रखने पड़े […]
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गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-23
गोबर और झुनिया के जाने के बाद घर सुनसान रहने लगा । धनिया को बार-बार मुन्नु की याद आती रहती है । बच्चे की माँ तो झुनिया थी; पर उसका पालन धनिया ही करती थी । वही उसे उबटन मलती, काजल लगाती, सुलाती और जब काम-काज से अवकाश मिलता, उसे प्यार करती । वात्सल्य का […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-22
इधर कुछ दिनों से रायसाहब की कन्या के विवाह की बातचीत हो रही थी । उसके साथ ही एलेक्शन भी सिर पर आ पहुँचा था; मगर इन सबों से आवश्यक उन्हें दीवानी में एक मुकदमा दायर करना था, जिसकी कोर्ट-फीस ही पचास हजार थी, ऊपर के खर्च अलग । रायसाहब के साले जो अपनी रियासत […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-21
देहातों में साल के छः महीने किसी-न-किसी उत्सव में ढोल-मजीरा बजता रहता है । होली के एक महीना पहले से एक महीना बाद तक फाग उड़ती है; आषाढ़ लगते ही आल्हा शुरू हो जाता है और सावन-भादों में कजलियाँ होती हैं । कजलियों के बाद रामायण-गान होने लगता है । सेमरी भी अपवाद नहीं है […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-20
फागुन अपनी झोली में नवजीवन की विभूति लेकर आ पहुंचा था । आम के पेड़ दोनों हाथों से बौर के सुगन्ध बाँट रहे थे, और कोयल आम की डालियों में छिपी हुई संगीत का गुप्त दान कर रही थी ।गांवों में ऊख की बोआई लग गयी थी । अभी धूप नहीं निकली, पर होरी खेत […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-19
मिर्ज़ा खुर्शेद का हाता क्लब भी है, कचहरी भी, अखाड़ा भी । दिन भर जमघट लगा रहता है । मुहल्ले में अखाड़े के लिए कहीं जगह नहीं मिलती थी । मिर्ज़ा ने एक छप्पर डलवाकर अखाड़ा बनवा दिया है; वहाँ नित्य सौ-पचास लड़न्तिये आ जुटते हैं । मिज़ाजी भी उनके साथ जोर करते हैं । […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-18
खन्ना और गोविन्दी में नहीं पटती । क्यों नहीं पटती यह बताना कठिन है । ज्योतिष के हिसाब से उनके ग्रहों में कोई विरोध है, हालांकि विवाह के समय ग्रह और नक्षत्र खूब मिला लिये गए थे । काम-शास्त्र के हिसाब से इस अनबन का और कोई रहस्य हो सकता है, और मनोविज्ञान वाले कुछ […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-17
गाँव में ख़बर फैल गयी कि राय साहब ने पंचों को बुलाकर खूब डाँटा और इन लोगों ने जितने रुपये वसूल किये थे, वह सब इनके पेट से निकाल लिये । वह तो इन लोगों को जेल भेजवा रहे थे, लेकिन इन लोगों ने हाथ-पाँव जोड़े थूककर चाटा तब जाके उन्होंने छोड़ा । धनिया का […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-16
राय साहब को जब ख़बर मिली कि इलाके में एक वारदात हो गयी और होरी से गाँव के पंचों ने जुरमाना वसूल कर लिया है, तौ फौरन नोखेराम को बुलाकर जवाब-तलब किया- क्यों उन्हें इसकी इत्तला नहीं दी गयी । ऐसे नमकहराम दगाबाज आदमी के लिए उनके दरबार में जगह नहीं है ।नोखेराम ने इतनी […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-15
मानती बाहर से तितली है, भीतर से मधुमक्खी । उसके जीवन में हंसी ही हंसी नहीं है, केवल गुड खाकर कौन जी सकता है! और जिए भी तो वह कोई सुखी जीवन न होगा । वह हँसती है, इसलिए कि उसे इसके भी दाम मिलते हैं । उसका चहकना और चमकना. इसीलिए नहीं है कि […]
