होरी की फसल सारी-की-सारी डाँड़ की भेंट हो चुकी थी । बैशाख तो किसी तरह कटा, मगर जेठ लगते-लगते घर में अनाज का एक दाना न रहा । पाँच-पाँच पेट खाने वाले और घर में अनाज नदारद । दोनों जून न मिले, एक जून तो मिलना ही चाहिए । भरपेट न मिले, आधा पेट तो […]
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गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-13
गोबर अंधेरे ही मुँह उठा और कोदई से विदा माँगी । सबको मालूम हो गया था कि उसका ब्याह हो चुका है, इसलिए उससे कोई विवाह-सम्बन्धी चर्चा नहीं की । उसके शील-स्वभाव ने सारे घर को मुग्ध कर लिया था । कोदई की माता को तो उसने ऐसे मीठे शब्दों में और उसके मातृपद की […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-12
रात को गोबर झुनिया के साथ चला, तो ऐसा काँप रहा था, जैसे उसकी नाक कटी हुई हो । झुनिया को देखते ही सारे गाँव में कुहराम मच जायेगा. लोग चारों ओर से कैसी हाय-हाय मचायेंगे, धनिया कितनी गालियाँ देगी. यह सोच-सोचकर उसके पाँव पीछे रहे जाते थे । होरी का तो उसे भय न […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-11
ऐसे असाधारण काण्ड पर गाँव में जो कुछ हलचल मचना चाहिए था, वह मचा और महीनों तक मचता रहा । झुनिया के दोनों भाई लाठियाँ लिये गोबर को खोजते फिरते थे । भोला ने कसम खायी कि अब न झुनिया का मुँह देखेंगे और न इस गाँव का । होरी से उन्होंने अपनी सगाई की […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-10
हीरा । का कहीं पता न चला और दिन गुजरते जाते थे। होरी से जहाँ तक दौड़-धूप हो सकी की; फिर हारकर बैठ रहा । खेती-बारी की भी फिक्र करनी थी । अकेला आदमी क्या-क्या करता । और अब अपनी खेती से ज्यादा फिक्र थी पुनिया की खेती की । पुनिया अब अकेली होकर और […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-9
प्रात: काल होरी के घर में एक पूरा हंगामा हो गया । होरी धनिया को मार रहा था । धनिया उसे गालियाँ दे रही थी । दोनों लड़कियाँ बाप के पाँवों से लिपटी चिल्ला रही थी और गोबर माँ को बचा रहा था । बार-बार होरी का हाथ पकड़कर पीछे ढकेल देता; पर ज्योंही धनिया […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-8
जब से होरी के घर में गाय आ गयी है, घर की श्री ही कुछ और हो गयी है । धनिया का घमण्ड तो उसके संभाल से बाहर हो-हो जाता है । जब देखो-गाय की चर्चा।भूसा छिज गया था । ऊख में थोड़ी-सी चरी बो दी गयी थी । उसी की कुट्टी काट कर जानवरों […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-7
यह अभिनय जब समाप्त हुआ, तो उधर रंगशाला में धनुष – यज्ञ। समाप्त हो चुका था और सामाजिक प्रहसन की तैयारी हो रही थी; मगर इन सज्जनों को उससे विशेष दिलचस्पी न थी । केवल मिस्टर मेहता देखने गये और आदि से अन्त तक जमे रहे । उन्हें बड़ा मजा आ रहा था । बीच-बीच […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-6
जेठ की उदास और गर्म सच्चा सेमरी की सड़कों और गलियों में पानी के छिड़काव से शीतल और प्रसन्न हो रही थी । मण्डप के चारों तरफ फूलों और पौधों के गमले सजा दिए गए थे और बिजली के पंखे चल रहे थे । रायसाहब अपने कारखाने में बिजली बनवा लेते थे । उनके सिपाही […]
गोदान – मुंशी प्रेमचंद भाग-4
होरी को रात भर नींद नहीं आयी । नीम के पेड़-तले अपनी बीस की खाट पर पड़ा बार-बार तारों की ओर देखता था । गाय के लिए एक नाँद गाड़नी है । बैलों से अलग उसकी नाँद रहे तो अच्छा । अभी तो रात को बाहर ही रहेगी, लेकिन चौमासे में उसके लिए कोई दूसरी […]
