सी.वी.एस.टेस्ट डाऊनसिंड्रोम, टे-शेक, सिकिल सैल एनीमिया वसिस्टिक फाइबरोसिस की जांच के लिए किया जाता है। इससे न्यूरल ट्यूब व इससे एनाटोमिकल विकारों का पता नहीं चलता। इसे पहली तिमाही में किया जाता है और यह एमनियो सेंटेसिस से कहीं पहले परिणाम दे देता है, जो कि आमतौर पर 16 सप्ताह बाद होता है।
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प्रेगनेंट होना चाहती हैं तो फुल बॉडी चेकअप करवाएं
महिला को जैसे ही गर्भाधान की संभावना का पता चले या होना चाहती है तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, जिससे कि प्रसव सुरक्षित हो सके और गंभीर खतरों वाली गर्भावस्था और गर्भपात से बचा जा सके। अगर गर्भवती महिला प्रसव पूर्व इन बातों का ध्यान रखेगी तो स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी।
पिता की अधिक आयु से भी बढ़ता है गर्भपात का खतरा
कहा जाता है कि जो महिलाएं अधिक उम्र में गर्भधारण करती हैं उनको गर्भपात का खतरा ज्यादा होता है पर ये बात भी सच है कि पिता की अधिक आयु से भी गर्भपात का खतरा बढ़ता है,इसलिए अगर आप अधिक उम्र में गर्भधारण कर रही हैं तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें ।
गर्भपात के बाद डॉक्टर की सलाह से गर्भधारण करें
गर्भपात शारीरिक और मानसिक दोनों स्तर पर बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में बहुत जल्द ही दोबारा गर्भवती होने की योजना बनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें ।
कम उम्र के संबंध न बन जाएं जंजाल
जानकारी के अभाव में छोटी उम्र में बने सेक्स संबंध न सेहत की दृष्टि से ठीक होते हैं न ही समाज की। कम उम्र में बने सेक्स संबंध अक्सर जी का जंजाल बन जाते हैं, जिनसे छुटकारा पाने का कोई रास्ता नहीं दिखता…
यौन जानकारी के अभाव में किशोरावस्था में बढ़ते गर्भपात
किशोरावस्था में गर्भधारण के अधिक मामले अशिक्षित लड़कियों में देखे जाते हैं जो स्कूली पढ़ाई कर चुकी लड़कियों के मुकाबले नौ गुना अधिक होते हैं।
गर्भपात कराने के बाद हो सकते हैं ऐसे खतरे
कभी-कभी भ्रूण की कुदरती खामियां या गर्भधारण से जुड़ीं घातक स्वास्थ्य स्थितियां भी ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर कर देती हैं। वजह चाहे जो भी हो, गर्भपात कराने से महिला पर मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से असर पड़ता है।
