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गृहलक्ष्मी की कहानियां :  मरूस्थल में गंगाजल

कृति ने अपने विवाह का आमन्त्रण पत्र ही सीधे-सीधे वरुण के हाथ में रख दिया और वरुण को जैसे करंट लग गया। कोई दस-बारह साल बाद तो नहीं मिल रही थी कृति उससे बल्कि करीब पांच वर्षों से वो दोनों एक ही कार्यालय में काम कर रहे थे। यहां तक कि कल रात देर तक काॅफी के बहाने वरुण उसी के साथ था, पर वरुण का मन ही कहां भरता था।

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आखिर बदल गई कलिका – गृहलक्ष्मी कहानियां

कलिका एक जागरूक युवती थी। उसने अपने से भी ज्यादा मेधावी और प्रतिभा सम्पन्न गिरीश से प्रेम विवाह किया था। कलिका शिमला से पूना जब गिरीश के घर पर आई तो उसने कुछ ही दिनों में महसूस किया कि गिरीश का व्यवहार बहुत ही सामाजिक है। नागपुर से सटे दूर दराज के गांव से उनके परिचितों को पूना बुलाकर नौकरी व्यवसाय में मदद करना गिरीश को सुकून देना था।

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दुखिया सब संसार

पुजारी जी भले ही अपनी कालोनी में सम्मानित वृद्ध थे, पर उनके घर में उनसे भी यही उम्मीद की जाती थी कि वे अपनी शक्ल ज्यादातर बाहर वालों को दिखाएं और धर्मशाला की भांति सिर्फ रात्रि-शयन के लिए घर पर आएं।

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गृहलक्ष्मी की कहानियां : सच्ची सगाई

जिन शिखा दीदी को खुशी बरसों से यादों में बसाए हुए थी, उनकी आवाज सुनते ही खुशी की खुशी का पारावार नहीं रहा…उसे लगा कि आज हुई है उसकी सच्ची सगाई ।

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