भगवान श्री कृष्ण जगत के पालनहार हैं। उनका नाम लेते ही मनुष्य के चौरासी चक्र के बंधन से मुक्त हो जाता है। जो व्यक्ति जन्माष्टमी के व्रत को करता है, वह ऐश्वर्य और मुक्ति को प्राप्त करता है। आयु, कीर्ति, यश, लाभ, पुत्र व पौत्र को प्राप्त कर इसी जन्म में सभी प्रकार के सुखों को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। जो मनुष्य भक्तिभाव से श्रीकृष्ण की कथा को सुनते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। वे उत्तम गति को प्राप्त करते हैं।
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कुछ ऐसा है रक्षाकवच से रक्षाबंधन तक का राखी का सफर
हमारे जनजीवन में पर्वों का प्राचीन काल से ही खास महत्व रहा है। इन्हीं पर्वों के माध्यम से लोगों की सोई हुई चेतना पुनः जाग उठती है तथा हमारे अंदर एक नवीन चेतना, शक्ति और साहस का संचरण होता है। भारतीय लोक जीवन के इन्हीं पर्वों में भाई-बहन के स्नेह का परिचायक और कच्चे धागों […]
अलौकिक शक्तियों के स्वामी थे बाबा नीम करौली
संत-महात्मा भारत जैसे राष्ट्र की धरोहर होते हैं। इन्हीं अध्यात्मिक गुरुओं के कारण भारत आदिकाल से धर्म गुरु के रूप में विश्वगुरु बनकर विख्यात रहा है। वर्तमान युग में भी अनेक संत, ज्ञानी, योगी और प्रवचनकर्ता अपने कार्यों और चमत्कारों से विश्व को चमत्कृत करते रहे हैं परंतु बाबा नीम करौली जी की बात ही अलग […]
जब रथ पर सवार होते हैं जगन्नाथ भगवान
यह मौका होता है पुरी की प्रसिद्ध रथ यात्रा का। यात्रा के इन नौ दिनों में भक्त और भगवान के बीच कोई सीमा नहीं रह जाती, जात-पात का भेद तक मिट जाता है। सब रथ में सवार भगवान को ढोने का आनंद लेते हैं।
हर किसी को पढ़ने चाहिए ‘गाय’ से जुड़े ये तथ्य
गाय हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। हमारे यहां गाय को माता और देवतुल्य समझकर पूजा जाता है। गाय का केवल आध्यात्मिक या धार्मिक महत्त्व ही नहीं है अपितु गाय से प्राप्त होने वाली प्रत्येक वस्तु जैसे गोबर, मूत्र और दूध सभी का वैज्ञानिक व चिकित्सकीय महत्व भी है। अाप आस्था-श्रद्धा रखें या न रखें […]
जानिए नवरात्रों में क्यों बंटता है हलुवे-चने का प्रसाद
हिन्दू धर्म में सदियों से ही हर व्रत, पूजा तथा धार्मिक अनुष्ठान आदि के उपरांत प्रसाद वितरण की प्रथा रही है। किस देवी-देवता को कौन से फल या मिष्ठान आदि का भोग लगना है तथा किस प्रसाद का वितरण करना है यह पहले से ही तय है। नवरात्रों में भगवती मां को काले चने व हलवे के प्रसाद का भोग लगाया जाता है। तथा कन्याओं एवं अन्य लोगों में प्रसाद के रूप में इस ही बांटा जाता है।
दुर्गा के नौ रूप है नवरात्र
हिन्दू धर्म में देवी पूजा का विशेष महत्त्व है जिसे नवरात्र के रूप में नौ दिनों तक साल में दो बार मनाया जाता है। यह नौ दिन दुर्गा के नौ रूपों के प्रतीक हैं जिनका विवरण इस प्रकार है-
