यदि आप  दिन रात सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं, तो हो सकता है सोशल मीडिया आप की परेशानियों को पहले से अधिक बढ़ा रही हो। हम सोशल मीडिया के विभिन्न प्लैटफॉर्म्स पर ढेरो लोगो के साथ जुड़े हुए होते हैं। लेकिन हम जुड़ कर भी उनसे नहीं जुड़ पाते। हम जब तक ऑनलाइन रहते हैं तब तक ही उनसे जुड़ पाते हैं। लेकिन जब हम अपना डेटा बन्द कर के अपनी असली दुनिया में आते हैं, तो हमें उससे भी अधिक अकेलापन महसूस होता है। जितने अकेले हम होते भी नहीं हैं। इससे हमारी सोशल मीडिया की एक आदत या लत लग जाती है जोकि बुरी है। 

संवाद से दूर 

शोध में यह भी साफ पता चला है कि जो व्यक्ति सोशल मीडिया पर जितना ज्यादा समय लगाता है वह असली दुनिया में होने वाले संवाद से दूर रहता है। कुछ लोग असलियत में किसी अन्य इंसान से बात करने में हिचक महसूस करते हैं जिसे हम सोशल एंग्जाइटी के नाम से भी जानते हैं। ऐसे लोग सोशल मीडिया पर ही दोस्ती करना पसंद करते हैं क्योंकि सोशल मीडिया उन्हें सुरक्षित लगता है और यहां आमने सामने बात भी नहीं करनी होती। सोशल मीडिया पर हम अपनी मर्जी से किसी से मिल सकते हैं न कि हमें कोई जबरदस्ती मिलने बुला सकता है। यदि हम थोड़े दिन की जान पहचान के बाद किसी से मिलते हैं तो हमें उतना अजीब नहीं लगता जितना हमें पहली बार मिलने व बाते करने में लगता है। 

लाइलाज है ये लत-

शोध में बताया गया कि सोशल मीडिया यूज करने वाले यूजर्स में से कई  यूजर ऐसे होते हैं जो  किसी न किसी कारण से दुखी होते हैं। जिसका कोई इलाज नहीं है। इस पर फ्लाइंडर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर तरुण बस्तियम्पिल्लई ने बताया, ‘ऐसे में केवल दवा या साइकोलॉजिकल ट्रीटमेंट का सहारा लेने की बजाय चिकित्सकों को तत्काल सोशल नेटवर्किंग को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जिसमें दोस्तों और परिवार का प्रभाव भी शामिल है

यह सब बातें सोच कर हम सोचते हैं सोशल मीडिया बहुत अच्छी चीज है लेकिन इसके बहुत से साइड इफैक्ट्स भी हो सकते हैं जो कि आप के लिए बहुत खतरनाक सिद्ध हो सकते हैं। हो सकता है आप किसी को दिल से दोस्त बना कर उसे अपनी सारी जानकारियां दे दे और वो उनका गलत प्रयोग करें। या फिर आप जिस के साथ अकेला महसूस नहीं करते वो एक दिन आप को ब्लॉक करदे? अब आप को पहले से भी अधिक अकेले महसूस होगा। 

रिसर्च के मुताबिक 

एक रिसर्च के मुताबिक पता चला है कि सोशल मीडिया के कारण आज कल की युवा पीढ़ी बहुत अकेला महसूस करती है। सोशल मीडिया के कुछ अनुभव हमारे पॉजिटिव निकलते हैं तो कुछ नेगेटिव भी निकलते हैं। यदि आपकी अनुभव पॉजिटिव निकला है तो आप ज्यादा अकेला महसूस नहीं करेंगे। लेकिन यदि आप का अनुभव नेगेटिव निकला है तो आप स्वयं को बहुत असहाय व अकेला पाएंगे। इससे यह प्रमाणित होता है कि सोशल मीडिया पर हम केवल नेगेटिविटी की ओर ही ध्यान देते हैं जोकि हमारी सेहत के लिए भी बहुत ज्यादा अच्छा नहीं है। 

अकेलापन समस्या नहीं

लेकिन अकेलापन समस्या नहीं है। आप को असली समस्या खोजने की आवश्यकता है। आप को पता होना चाहिए कि आप क्यों अकेला महसूस करते हैं। यदि आप एंटी सोशल हैं तो आप को किताबें पढ़नी चाहिए। आप को अपना दूसरो से मिलने का भय खत्म करना पड़ेगा। और यदि आप सोशल हैं फिर भी ऐसा महसूस कर रहे हैं तो आप को अपनी सोशल स्किल्स पर और अधिक ध्यान देना होगा। यदि आप सामने वाले इंसान को अच्छी तरह जानेंगे व परखेंगे तो निश्चित ही यह आप के लिए काम कर सकता है और हो सकता है आप उनसे जुड़ने के बाद अकेला महसूस न करे। 

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