A distressed woman sitting in the foreground while a man gestures behind her during an argument.
Emotional Loneliness in Marriage

summary: पति बार-बार मना करना, महिला टूटता आत्मविश्वास

पति के बार-बार मना करने से महिला खुद को महत्वहीन, अस्वीकारित और असुरक्षित महसूस करने लगती है, जिससे उसका आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है और रिश्ते में भावनात्मक दूरी बढ़ती जाती है।

Husband Refusal Effects on Women Confidence: पति-पत्नी का रिश्ता प्यार के साथ सम्मान और सहयोग पर टिका रहता है। लेकिन जब रिश्ते में इसकी कमी हो तो रिश्ते में सिर्फ दूरियां ही नहीं आती व्यक्तिगत रूप से भी काफी परेशानियां आती हैं। जैसे आत्मविश्वास का कमना, तनाव और उदासी का बढ़ना। पति के द्वारा बार-बार पत्नी के आग्रह को ठुकराना या मना करना भावनात्मक रूप से उन्हें कमजोर बना सकता है। आइए इस लेख में जानते हैं पति के बार-बार मना करने से महिला को किन तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इसका क्या समाधान है।

खुद को महत्वहीन समझना: अगर पति महिला के हर बात या आग्रह पर मन करें, उसके भावनाओं को गलत और बेकार कहे तो महिला धीरे-धीरे खुद को महत्वहीन समझने लगती है। वह अपनी बातों, भावनाओं या रिश्ते में अपनी राय को बेकार समझने लगती है। वह मान बैठती है, रिश्ते में उसकी जरूरत नहीं है। परिणाम स्वरुप वह हमेशा चुप, उदास और डरी हुई रहती है। वह खुद से रिश्ते में पहल या बातचीत से बचती है।

भावनात्मक अस्वीकृति, तनाव का करण: जब पति द्वारा एक महिला को बार-बार मना किया जाता है तो वह भावनात्मक रूप से बहुत आहत होती है। वह खुद की इच्छाओं और चाहतों को हीन समझने लगती है। खुद को एक निर्बल स्त्री की संज्ञा देने लगती है। रिश्ते में लंबे समय तक इस स्थिति की वजह से महिला तनाव का शिकार हो जाती है। उसका आत्मविश्वास कम जाता है। रिश्ते में संवाद कम हो जाते हैं। यहां तक कि वह अपनी ज़रूरतें बताना भी बंद कर देती है। महिला के अंदर चिंता, गुस्सा, ओवरथिंकिंग जैसी चीज बढ़ने लगती है। पति के द्वारा बार-बार शारीरिक नजदीकी के लिए मना करने पर महिला खुद की बॉडी सेमिंग खुद ही करने लगती है। ‘मैं आकर्षित नहीं हूं’, जैसी भावना उसमें भर जाती है।

Husband refusal effects on women confidence
Effects on women confidence

पति-पत्नी के बीच का मानसिक तनाव केवल उन तक सीमित नहीं रहता, उसका बुरा प्रभाव परिवार के सभी सदस्य पर पड़ता है। जब महिला के प्यार और जरूरते पूरी नहीं होती तो परिणाम स्वरूप महिला प्यार के मामले में परिवार के दूसरे सदस्यों से भी उदासीन हो जाती है। वह मशीन की भांति काम तो करती है पर लगाव नहीं रख पाती। अपने प्यार की कमी का गुस्सा अपने बच्चों पर चिल्लाकर या डांट कर निकलती है, जिससे बच्चे का विकास प्रभावित होता है और घर का माहौल भी तनावपूर्ण होता है।

पति के ना कहने से अपनी योग्यता की तुलना ना करें। बल्कि उनका ना कहने का कारण मूड या आदत हो सकता है ऐसा सोचें।

महिला अपनी पहचान उस रिश्ते तक सीमित रखने की बजाय अपने शौक को अपना कैरियर बनाकर अपनी पहचान बढ़ाए।

पति ना समझे उसके बाद भी अपने दोस्त, बहन, परिवार या किसी सपोर्ट ग्रुप से जुड़े, बात करें। इससे आपका मन हल्का होगा।

पति से अपने संवाद सुधारने की कोशिश करें। हो सके तो काउंसलर की मदद ले। अगर घर के बड़े बुजुर्ग आपकी भावनाओं को समझते हैं तो उनकी मदद भी आप ले सकते हैं।

अगर आप पुरुष हैं और इस लेख को पढ़ रहे हैं तो यहां कुछ टिप्स बताए जा रहे हैं जिन्हें आप अपनाकर ना सिर्फ अपनी पत्नी की खुशियों को सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि अपने परिवार की भी खुशियों को सुनिश्चित कर सकते हैं।

अपनी पत्नी की बातों को ध्यान से सुने, उनकी जरूर, पसंद और भावनाओं का सम्मान करें।

सीधे ना कहने की जगह कारण बताएं। हर बार टलने से बचें। कोशिश करें अगर आज आपने ना कहा है तो अगले दिन खुद पहल करें, ताकि वह समझे कि आप उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं।

पत्नी के काम, मेहनत और सहयोग की सराहना करें।

निशा निक ने एमए हिंदी किया है और वह हिंदी क्रिएटिव राइटिंग व कंटेंट राइटिंग में सक्रिय हैं। वह कहानियों, कविताओं और लेखों के माध्यम से विचारों और भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। साथ ही,पेरेंटिंग, प्रेगनेंसी और महिलाओं से जुड़े मुद्दों...