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Overview:बहस से बर्बाद हो सकता है रिश्‍ता,  अपनाएं पैचअप करने का ये तरीका

रिश्तों में असहमति आम है, लेकिन इन्हें बहस में बदलने से बचना जरूरी है। पहले इसका कारण जानें फिर पार्टनर के साथ करें नई रिश्‍ते की शुरुआत।

Arguments in Relationship: रिश्तों को हेल्‍दी बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य हो सकता है। आप अपने साथी की कितनी भी परवाह क्‍यों न कर लें, कुछ मौके ऐसे आते हैं जब असहमति होती है या छोटी-मोटी बातें चिढ़ पैदा कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में, अगर सावधानी न बरती जाए, तो छोटी सी असहमति भी बड़ी बहस में बदल सकती है। असहमति, बहस और झगड़ा ये ऐसे कारण हैं जिसकी वजह से रिश्‍ता कमजोर होने लगता है। हालांकि, बहस करना हमेशा बुरा नहीं होता लेकिन कई बार पार्टनर की छोटी-छोटी गलतियां बहस के लिए जिम्‍मेदार हो सकती हैं। यदि आप भी अपने पार्टनर से बहस करते हैं तो सतर्क हो जाएं। पहले बहस के कारणों का पता लगाएं और फिर पार्टनर को खुश करने के इन तरीकों को अपनाएं।

पार्टनर्स के बीच क्‍यों होती है बहस

बहस से टूट सकता है रिश्‍ता
Why do partners argue

संवाद की कमी: रिश्तों में बहस का सबसे बड़ा कारण संवाद की कमी है। जब पार्टनर अपनी भावनाओं, जरूरतों या अपेक्षाओं को खुलकर व्यक्त नहीं करते, तो गलतफहमियां पैदा होती हैं।

अपेक्षाओं का टकराव: हर व्यक्ति के रिश्ते से अलग-अलग अपेक्षाएं होती हैं। जब ये अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तो निराशा और तनाव बढ़ता है, जो बहस का कारण बन सकता है।

तनाव और बाहरी दबाव: काम का तनाव, आर्थिक समस्याएं, परिवार की जिम्मेदारियां या स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं पार्टनर के बीच तनाव को बढ़ा सकती हैं।

सम्मान की कमी: जब पार्टनर एक-दूसरे की भावनाओं, विचारों या सीमाओं का सम्मान नहीं करते, तो बहस बढ़ सकती है।

अनसुलझे मुद्दे: छोटी-छोटी बातें, अगर समय पर हल न हों, तो नाराजगी का रूप ले लेती हैं। जैसे, घर के कामों का बंटवारा, समय की कमी या एक पार्टनर की कोई आदत जो दूसरे को परेशान करती हो।

व्यक्तित्व का अंतर: हर व्यक्ति का स्वभाव, सोच और व्यवहार अलग होता है। एक पार्टनर अंतर्मुखी हो सकता है, जबकि दूसरा बहिर्मुखी। इन अंतरों को समझने में कमी होने पर बहस हो सकती है।

रिश्ते को बचाने के लिए अपनाएं ये तरीके

बहस से टूट सकता है रिश्‍ता
Follow these steps to save your relationship

सम्मान के साथ असहमति जताएं: झगड़े अचानक नहीं शुरू होते। कई बार एक छोटी सी समस्या चर्चा का रूप लेती है और फिर वह बहस में बदल जाती है। इसे बढ़ने से रोकने के लिए, आरोप लगाने वाले शब्दों से बचें।

समस्याओं को हल करें: जब आपको किसी समस्या का पता चले, तो उसे तुरंत संबोधित करें। अनदेखी करने से नाराजगी बढ़ती है, जो बाद में बड़ी बहस का कारण बन सकती है।

मासिक रिश्ता की जांच: संचार किसी भी रिश्ते की रीढ़ है। लेकिन व्यस्त जीवन में संवाद के लिए समय निकालना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, हर महीने एक दिन चुनें, जब आप पिछले महीने की बात करें और अगले महीने के लिए लक्ष्य तय करें। इससे मानसिक स्‍तर का पता चलता है।

टेक्स्ट या मैसेंजर पर बहस न करें: कई बार टेक्स्ट पर समस्याओं को उठाना आसान लगता है, लेकिन ऐसा न करें। आमने-सामने की बातचीत सबसे अच्छी होती है। टेक्स्ट में आपकी बॉडी लैंग्वेज, चेहरे के हाव-भाव और आवाज का लहजा गायब होता है, जो संवाद को गलत दिशा में ले जा सकता है।

प्रतिस्पर्धा से बचें: जब आपका साथी आप से कोई शिकायत करता है, तो जवाब में उनकी कमियां निकालना आसान होता है। इसके बजाय, उनकी शिकायत को स्वीकार करें और परेशानी का हल निकालें।

ऐसे करें पैचअप

– पार्टनर को सॉरी बोलें

– उन्‍हें कोई पसंदीदा गिफ्ट दें

– डिनर डेट पर ले जाएं

– समय न हो तो कॉफी डेट पर ले जाएं

– अपनी गलतियों को मानें

– उनकी बात का समर्थन करें

– पसंदीदा खाना बनाकर खिलाएं

मेरा नाम मोनिका अग्रवाल है। मैं कंप्यूटर विषय से स्नातक हूं।अपने जीवन के अनुभवों को कलमबद्ध करने का जुनून सा है जो मेरे हौंसलों को उड़ान देता है।मैंने कुछ वर्ष पूर्व टी वी और मैग्जीन के लिए कुछ विज्ञापनों में काम किया है । मेरा एक...