यूं तो मुहब्बत एक ऐसी रौ है, जो किसी को कभी भी अपने में बहाकर ले जाती है। जात, धर्म, रंग-रूप से परे प्रेम ने खुद को कभी किसी परिभाषा का मोहताज नहीं रखा। ऐसे में अगर प्रेम का ये दीया किसी एक ही के दिल में जले तो? स्थिति शोचनीय है, लेकिन इस एकतरफा प्रेम का दूसरा विकल्प क्या है? किसी के प्रति प्रेम एवं आकर्षण सहज ही महसूस किया जाता है, क्योंकि ये भावनाएं इंसान की हद में शामिल नहीं होती। जरूरी तो यह है कि आपकी प्रेम भावना किसी के प्रति एकतरफा ना हो।

एकतरफा प्यार की बुनियाद

यकीनन हम किसी के साथ ज्यादा वक्त गुजारते हैं या किसी के बेहद करीब हैं तो वे एक आकर्षण के सूत्र में बंध जाते हैं। यही आकर्षण अगर प्रेम का रूप ले ले तो समझ लीजिए, संभल जाने का वक्त आ गया है। इस एकतरफा प्यार की बुनियाद थोड़ी सी जानपह चान या दोस्ती से शुरू हो सकती है। हम किसी के साथ थोड़ा वक्त गुजारते हैं तो सामने वाले की कुछ बातें हमारे विचारों से मिलती-जुलती लगती हैं तो हम उस आकर्षण को प्रेम का नाम देने लग जाते हैं। हमने जीवनसाथी को लेकर जो ख्वाब बुने होते हैं, वैसी झलक सामने वाले में दिखाई देने लगती है तो हम उसे प्रेम का नाम दे बैठते हैं। ऐसी स्थिति में यह समझना होगा कि सामने वाले को भी अगर ऐसा खिंचाव आपके प्रति महसूस हो, तभी इसे प्रेम का नाम दें, वरना एकतरफा प्रेम की कोई उम्र नहीं होती।

पागलपन की हद

हमारे आस-पास के समाज का ताना-बाना बहुत ज्यादा संकुचित मानसिकता के बीच फंसा पड़ा है। ऐसे में प्रेम की एकतरफा कहानियों ने समाज में कई खौफनाक घटनाओं को अंजाम दिया है। हाल ही में झारखंड की सोनल पर तेजाबी हमले के पीछे इसी एकतरफा प्रेम की अहम भूमिका थी। क्या एकतरफा प्यार का ये पागलपन समाज की विकृत मानसिकता को बढ़ावा नहीं दे रहा? आए दिन इसी एकतरफा प्यार की वजह से बलात्कार, हत्या, अपहरण जैसी घटनाएं देखने को मिलती हैं। ऐसे में इस सोच को समझना होगा कि यदि आप किसी के प्रति खिंचाव महसूस भी कर रहे हैं तो पागलपन की हद ना छुएं। इस खिंचाव को नजरअंदाज कर स्वस्थ मानसिकता का परिचय देते हुए जीवन को नई दिशा की तरफ मोडऩा चाहिए।

क्यों आती है एकतरफा प्यार की नौबत

इस बात में कोई शक नहीं कि एकतरफा प्यार के चक्कर में कोई भी पड़ सकता है। मनोवैज्ञानिकों की राय में एकतरफा प्रेम के पीछे महज आकर्षण ही एकमात्र कारण है। कोई भी चीज अगर हमारी कल्पना से मिलती-जुलती है तो हम उसे पाने की कोशिश में लग जाते हैं। ऐसे में इसे प्रेम का नाम तो नहीं दिया जा सकता। इस आकर्षण में तकलीफ के अलावा कुछ भी हाथ नहीं लगता। भावनाओं के इस एकतरफा खेल का अंजाम सफल नहीं होता। इससे बच निकलना ही अच्छा है।

कैसे बचें

  • खुद पर नियंत्रण रखें और व्यस्त रहें, रचनात्मक कार्यों की तरफ ज्यादा ध्यान लगाएं।
  • अगर आप किसी के प्रति ऐसी भावना महसूस कर रहे हैं और यह पता हो कि वह शादीशुदा, इंगेज है या आपके लिए वैसी भावना नहीं रखता तो उससे नजदीकियां ना बढ़ाएं।
  • एकतरफा प्यार का कोई नतीजा नहीं निकलता। बेहतर है इससे खुद का बचाव कर लें।
  • कभी भी इस भावना को इतना उत्तेजित ना होने दें कि यह पागलपन का रूप ले ले।
  • योगा, मेडिटेशन अपनाएं ताकि नकारात्मक सोच

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