World Water Day: “किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी,
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी !”
किसानों की उम्मीदों का पानी, जीवन का आधार पानी। पानी हमारे दैनिक जीवन में कितना महत्त्वपूर्ण है ये महज़ शब्दो से बयां नहीं किया जा सकता है। पानी के ज़रूरत और निरंतर घटते स्तर को देखते हुऐ हर साल वर्ल्ड वाटर डे मनाया जाता है।
आपको बता दें, 22 मार्च को दुनिया भर में ‘वर्ल्ड वॉटर डे’ के रूप में मनाया जाता है। पानी के संरक्षण, जलाशयों, भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए इसकी शुरुआत हुई थी। इस साल इसका थीम Groundwater: Making The Invisible Visible’ भूतल स्थित पानी के संरक्षण पर आधारित है।
लगातर वनों की कटाई , और लगातर बढ़ रहे प्रदुषण के चलते पानी का स्तर घटता ही जा रहा है। पानी की बरबादी में भारत भी पीछे नहीं है। भारत प्राचीन काल से एक जलवायु समृद्ध देश था। यहां की हरियाली और प्रकृति को देखकर ही विदेशी अक्रमणकारियों का मन ललचाया था। प्रतियोगितामक सोच के चलते यहां भी औद्योगिकीकरण और पेड़ों की कटाई शुरू हो गई जिसके चलते भूजल का स्तर चिंताजनक तरीके से घट रहा है। सिर्फ यही एक वजह नहीं है , लगातर बढ़ रहीं जनसंख्या भी उतनी ही जिम्मेदार है। बढ़ती आबादी के कारण देश में पानी की मांग अभी हो रही आपूर्ति के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी। इससे लाखों लोग पानी की समस्या से जूझेंगे। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अगर भारत में जल संरक्षण के लिए मिशन मोड में काम नहीं हुआ तो ,हो सकता है आनेवाले समय में बड़े शहर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में 2030 तक पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाए। अगर अभी से सावधानी नहीं बरती गई तो वो दिन दूर नही जब भारत की स्थिति केपटाउन की तरह हो जायेगी। केपटाउन में जल संकट की वजह से लोगों को नहाने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
“माना पानी का नही है कोई मोल
पर जीवन के लिए ये है बेहद अनमोल।।”

ये महज़ चंद पंक्तियां नही है बल्कि आने वाले भविष्य के संकट की चेतावनी है जिस पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है। पानी के संकट को दूर करने के लिए हमें निम्लिखित उपायों को अपने दैनिक जीवन में अपनाना बेहद जरुरी है:
1.कहते हैं न की किसी भी चीज़ की अति अच्छी नही होती है। कोई भी चीज हो अगर जरुरत से ज्यादा होगी तो एक दिन संकट पैदा कर ही देती है। भारतीयों की प्रमुख्य समस्या है हद से ज्यादा पानी का खर्च करना। कुछ लोग तो नल खोलकर ही भूल जाते हैं तो कुछ लोग घंटो सावर में पानी बर्बाद करते रहते हैं। एक सभ्य मानव की तरह और प्रकृति के मोल को समझते हुए हमें कम से कम पानी का इस्तेमाल और बर्बाद होने से बचाव करना चाहिए।
2. लगातर वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण पानी का भूजल स्तर लगातर कम हो रहा है। इसको रोकने के लिए हमें वनों की कटाई को रोकना चाहिए और साथ ही साथ नए वृक्षों को भी लगाने पर जोर देना चाहिए। इसे न केवल पानी का संरक्षण होगा बल्कि पर्यावरण भी अच्छा होगा।
3. पानी को बचाने के लिए हर वक्त छोटे छोटे कदम उठाने को तैयार रहें। पब्लिक प्लेस में भी खुले नल को देखते ही बंद करें। चावल दाल इत्यादि के यूज पानी को फेकने की बजाय गमलों में डाल दें।
4. पानी का प्राक्रतिक स्रोतों बारिश के लिए हरियाली होना बेहद ज़रूरी है नहीं तो ये धरती बंजर बनते देर न लगेगी। हरियाली की ओर कदम बढ़ाने के लिए आप न खुद बल्कि अपने दोस्तो और परिवार जन को भी पेड़ लगाने का संदेश देना सीखें। आप अपना जन्मदिन , एनिवर्सरी , इंगेजमेंट इत्यादि शुभ अवसरों पर भारी पार्टी खर्च से अलग एक पौधा लगाकर नई मिशाल पेश कर सकतें हैं।
5. बारिश के पानी को आप स्टोर करके रख सकते हैं जिनसे अगले दिन पौधे की सिचायी कर सकते हैं। हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें जिसे बार बार पानी के इस्तेमाल से बचा जा सकता है।
