Who is Mira Murati
Who is Mira Murati

Summary : मीरा सिर्फ बिजनेस नहीं कर रहीं, वे नई सोच तैयार कर रही हैं

मीरा की कंपनी का उद्देश्य है सभी के लिए सुलभ एआई बनाना। इसने लगभग ₹16,600 करोड़ की फंडिंग जुटाई है जो कि इतिहास की सबसे बड़ी सीड फंडिंग मानी जा रही है।

Who is Mira Murati: 36 साल की मीरा मुराती, आम नाम नहीं हैं। वो सिलिकॉन वैली की ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने मार्क जुकरबर्ग की मेटा (फेसबुक की पैरेंट कंपनी) की ₹8,300 करोड़ (यानी 1 बिलियन डॉलर) की पेशकश को ठुकरा दिया। यही नहीं, उनकी पूरी टीम ने भी इस ऑफर को नकार दिया। हाल ही में एक इंटरव्यू में मुराती ने कहा, “अब तक थिंकिंग मशीन्स लैब में किसी ने भी मेटा का ऑफर नहीं लिया”। मेटा ने उनकी नई एआई स्टार्टअप थिंकिंग मशीन्स लैब के कुछ कर्मचारियों को दो लाख डॉलर से लेकर 1 बिलियन डॉलर तक के ऑफर दिए थे। मकसद था उन्हें अपनी नई सुपरइंटेलिजेंस लैब में लाना।लेकिन मुराती और उनकी टीम ने पैसों के बजाय अपनी कंपनी की लंबी सोच और विजन को तरजीह दी।

इस मामले में मेटा ने इन खबरों पर आपत्ति जताई। उनके कम्युनिकेशन डायरेक्टर एंडी स्टोन ने कहा, “हमने थिंकिंग मशीन्स लैब के कुछ ही लोगों को ऑफर दिया था और केवल एक बड़ा ऑफर था। बाकी की जानकारी गलत है।” फिर भी मुराती अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि मेटा ने थिंकिंग मशीन्स को खरीदने की कोशिश की थी जैसे वो पहले स्कैलएआई को खरीदना चाहता था लेकिन ये कोशिश नाकाम रही।

1988 में अल्बानिया के व्लोरे में जन्मी मीरा मुराती की परवरिश एक बदले हुए राजनीतिक माहौल में हुई। 16 साल की उम्र में उन्हें कनाडा के कॉलेज में स्कॉलरशिप मिली, जो अंतरराष्ट्रीय सोच और नेतृत्व सिखाता है। इसके बाद उन्होंने कॉल्बी कॉलेज से आर्ट्स और डार्टमाउथ से इंजीनियरिंग में डिग्री ली। ये दोनों विषयों का मिश्रण उनकी सोच और तकनीकी समझ को गहराई देने में मददगार रहा।

Mira Murati Photo
Mira Murati
  • मीरा ने करियर की शुरुआत जोडिएक एरोस्पेस से की। फिर टेस्ला में मॉडल एक्स पर सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर के रूप में काम किया। इसके बाद लीप मोशन में उन्होंने जेस्चर टेक्नोलॉजी और एआर (ऑगमेंटेड रियलिटी) पर काम किया। 2018 में मीरा ओपनएआई में शामिल हुईं। वहां उन्होंने चैटजीपीटी, डेल-ई, कोडेक्स और सोरा जैसे मशहूर टूल्स को लीड किया। 2022 में उन्हें कंपनी का चीफ़ टेक्नोलॉजी ऑफिसर बनाया गया। नवंबर 2023 में, जब ओपनएआई में लीडरशिप का संकट आया और सैम ऑल्टमैन को हटाया गया, तो मुराती को अंतरिम सीईओ बनाया गया। हालांकि ऑल्टमैन कुछ ही दिनों में लौट आए, लेकिन मुराती ने सितंबर 2024 में ओपनएआई छोड़ दिया और अपनी नई कंपनी शुरू की।

फरवरी 2025 में शुरू हुई यह एक एआई स्टार्टअप है, जिसका उद्देश्य है – जनरल पर्पज़, एथिकल और सभी के लिए सुलभ एआई बनाना। जुलाई 2025 तक, इसने $दो बिलियन (लगभग ₹16,600 करोड़) की फंडिंग जुटाई – जो कि इतिहास की सबसे बड़ी सीड फंडिंग मानी जा रही है। इस कंपनी को Nvidia, AMD, Accel, Cisco, ServiceNow और यहां तक कि अल्बानिया सरकार का भी समर्थन मिला है। हालांकि इसने अभी तक कोई प्रोडक्ट लॉन्च नहीं किया है, पर इंडस्ट्री की निगाहें इस पर टिकी हैं। बताते हैं यह कंपनी उन एआई टूल्स पर काम कर रही है जो बीमारियों, जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसे वैश्विक मुद्दों को सुलझाने में मदद कर सकते हैं। मुराती का तरीका थोड़ा अलग है। वह सिर्फ एआई इंजीनियर नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और रिसर्चर्स को भी शुरुआती स्टेज पर शामिल कर रही हैं।

एआई की दुनिया में टैलेंट पैसे के पीछे भागता है, लेकिन मुराटी की टीम ने कुछ और चुना।उनके लिए स्वतंत्रता और विज़न ज्यादा मायने रखते हैं। उनका मानना है कि वो एआई को नई सोच और अपने मूल्यों के साथ विकसित करना चाहते हैं — न कि किसी और की राह पर चलना।

  • उन्हें 2023 में Fortune’s Most Powerful Women in Business में और 2024 में TIME’s 100 Most Influential People in AI में शामिल किया गया। जहां महिला-नेतृत्व वाली कंपनियों को कुल वेंचर कैपिटल का सिर्फ 2.1% ही मिलता है, वहीं मुराती ने अकेले $2 बिलियन जुटाए। ये सिर्फ पैसे का मामला नहीं है, बल्कि भविष्य को आकार देने का सवाल है। मीरा मुराती सिर्फ एआई टूल्स नहीं बना रहीं, वो एआई के पूरे ढांचे को फिर से गढ़ने में लगी हैं। ऐसा ढांचा जो पारदर्शी, जवाबदेह और समावेशी हो। जब मार्क ज़ुकरबर्ग ने ₹8,300 करोड़ की पेशकश की, तो मीरा के पास जवाब था “नहीं”… क्योंकि कुछ सपने बिकने के लिए नहीं होते।

ढाई दशक से पत्रकारिता में हैं। दैनिक भास्कर, नई दुनिया और जागरण में कई वर्षों तक काम किया। हर हफ्ते 'पहले दिन पहले शो' का अगर कोई रिकॉर्ड होता तो शायद इनके नाम होता। 2001 से अभी तक यह क्रम जारी है और विभिन्न प्लेटफॉर्म के लिए फिल्म समीक्षा...