Wedding Bangles: आपकी शादी पक्की हो गई। अभी पता चला है कि इस महीने ही आपकी शादी है। मुबारक हो! अब तक तो आपने हर तैयारी कर ली होगी मेकअप से लेकर वेन्यू की। शादी के लिए चूड़ियों की शॉपिंग खास होती है। शादी के लहंगे की अलग और दूसरी साड़ियों की अलग। आप भी बाजारों में लहंगे से मैचिंग चूड़ियां तलाश रही होंगी लेकिन इसके लिए इतना बेचैन और व्याकुल नहीं हो। माना कि शादी वाली चूड़ियों की बात ही अलग होती है पर इसके लिए आप परंपरा और रीति-रिवाज को महत्व दें, जो आपके यहां इन सुहाग की चूड़ियों के लिए होते हैं। यहां हम भारत के विभिन्न राज्यों में पहने जाने वाली शादी की चूड़ियों पर चर्चा करेंगे। इसके अनुसार आप शादी के लिए बैंगल बॉक्स तैयार करें। यदि इन 7 राज्यों से इतर है आपके यहां इन चूड़ियों के लिए रीति-रिवाज तो उसे अपनाएं। आखिर इन चूड़ियों की खनक आपके आने वाली जिंदगी की खुशहाली की निशानी है।
मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में शादी के समय दुलहन के लिए ससुराल से आने वाले शृंगार के सामान में गहरी नीली या फिर काली चूड़ियां भेजी जाती हैं। काली और गहरी नीली चूड़ियों को भेजने के पीछे का उद्देश्य यही होता है कि बहू को बुरी नजर से बचाया जा सके। और उसके बाद पहली विदाई पर चूड़ियां बदली जाती हैं, जिसमें बाकी चूड़ियों के आगे दो काली या दो गहरी नीली चूड़ियां डाली जाती हैं। दुलहन को यह चूड़ियां सवा साल तक पहनकर रखनी होती हैं।
बिहार और मिथिलांचल

बिहार और मिथिलांचल में दुलहन को लहठी पहनाई जाती है बल्कि हर शुभ कार्य में वहां की विवाहित महिलाएं लहटी ही पहनती हैं। रंग-बिरंगी लहठी, लाह से बनती है। शादी वाले दिन परिवार की कोई भी सुहागन महिला लहठी पहनाती है।
महाराष्ट्र

शादी के दिन मराठी दुलहन नौवारी साड़ी पहनती हैं। पारंपरिक रूप से साड़ी का रंग सुर्ख लाल होता है, लेकिन आजकल मराठी दुलहनें साड़ी में मनपसंद रंगों का चयन करती हैं। परंपराओं में आधुनिकता का कितना भी मेल हो जाए, मराठी दुलहन शादी के दिन हरे कांच की चूड़ियां पहनती हैं। हरे कांच की चूड़ियों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए दुलहनें इसमें सोने के कंगन या हरे रंग के अलावा अन्य रंग की चूड़ियां भी पहनती हैं, ताकि ये साड़ी से मेल खाए।
गुजरात

खूबसूरत वर्क और स्टोन वर्क वाली हरी, सुनहरी और लाल चूड़ियों में गुजराती दुलहनों की कलाइयां देखी जाती हैं। यह चूड़ी सेट दुलहन को उसकी मां द्वारा वैवाहिक जीवन की मंगलमय नई यात्रा के लिए सौभाग्य के प्रतीक के रूप में देती है। यह निश्चित रूप से दुलहन और उसकी मां के लिए महत्वपूर्ण है। उनके बंधन और उसकी मां के प्रति सच्चे प्यार का प्रतीक है।
पंजाब

पंजाबी दुलहनों की बाजू अलग चमकती है। आखिर उसमें डला होता है लाल-लाल चूड़ा। पारंपरिक रूप से चूड़े का रंग लाल होता है। चूड़े में कुछ चूड़ियां सफेद रंग की भी होती हैं। आजकल चूड़ा महरून, गुलाबी, नारंगी रंग का भी मिलता है। जिस तरह से अन्य राज्यों में नई-नवेली दुलहनों को मंगलसूत्र, सिंदूर, बिछुए, चूड़ियां और बिंदी लगाना जरूरी होता है, उसी तरह से पंजाबी और सिख नई-नवेली दुलहन की कलाइयां चूड़े के बिना अधूरी हैं। या यूं कहें कि शृंगार चूड़े के बिना अधूरा है। आमतौर पर चूड़े में 21 या 51 चूड़ियां होती हैं। इसे शादी के पहले एक साल तक पहना जाता है। इसे मामा पहनाते हैं भांजी को।
राजस्थान

राजस्थान अपनी जीवंत और रंगीन संस्कृति और भावपूर्ण परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां आप दुलहनों को मशहूर राजस्थानी चूड़ियां पहने देख सकती हैं। दुलहनें अपनी शादी का चूड़ा बनाने के लिए कई रंग-बिरंगी चूड़ियां जोड़ती हैं। चूड़ियां कई डिजाइन, रंग, काम और लाख से बनी होती हैं।
केरल

मलयाली दुलहन को भारी-भरकम और ढेर सारे सोने के गहने और सोने की चूड़ियां पहने देखा जा सकता है। यहां कि दुलहनें सोने के आभूषण पहनना पसंद करती हैं। सोने के गहने, यहां दुलहन के माता-पिता की वित्तीय स्थिति और समाज में प्रतिष्ठा का प्रतीक है। किसी भी अन्य दुलहन की तरह सभी मलयाली दुलहनें कांच की चूड़ियां नहीं पहनती हैं, बल्कि आप उन्हें अपनी शादी के दिन भारी सोने का कड़ा पहने हुए देख सकते हैं।
पं. बंगाल (कोलकाता)

बंगाली दुलहनें मूंगा और सीप की चूड़ियां पहनती हैं, जो शाखा और पोला के नाम से लोकप्रिय हैं। यह अनुष्ठान सात विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है। इसका महत्व और ऐतिहासिक प्रासंगिकता भी है। सभी विवाहित महिलाएं इन चूड़ियों को अपने सुखी और पूर्ण वैवाहिक जीवन के प्रतीक के रूप में पहनती हैं। ये चूड़ियां एक विवाहित महिला के लिए बहुत अहम होती हैं।
