Vani Kola
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Vani Kola : क्या आप एक सफल उद्यमी बनना चाहती हैं? तो फिर यह लेख केवल और केवल आपके लिए है। जिस तरह से महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नए-नए स्टार्टअप खोल रही हैं वह काबिलेतारिफ है। इन्हीं महिलाओं के इस गुण को निखारने के लिए आज हम देश की सबसे सफल इन्वेस्टर के इन्वेस्टिंग टिप्स लेकर आए हैं।
वैसे भी Entrepreneurship के लिए दी गई सलाह काफी किमती होती है और जब वह सलाह किसी उद्यमी पूंजीदाता (venture capitalist) खासकर द वाणी कोला के द्वारा दी गई हो तो अनमोल बन जाती है। आज इस लेख में हम आपके लिए उनके द्वारा दी गई 5 अनमोल सलाह लेकर आए हैं जो आपको आपका बिजनेस सेट करने और सफल होने में काफी मदद करेंगे।

कौन है वाणी कोला?

अगर हम कहें कि वाणी कोला भारत की सफलतम बिजनेस महिलाओं में से एक है तो यह एक वाक्य उनके परिचय के लिए नाकाफी होगा। क्योंकि सफल तो कई महिलाएं हैं और स्टार्टअप्स के दौर में कई महिलाएं सफल हो भी रही हैं। फिर वाणी कोला में ऐसा क्या है जो उन्हें अन्य सफल महिलाओं से अलग बनाता है और आज का लेख विशेष तौर से उन पर केंद्रित करके लिखने को मजबूर करता है???
तो इसका जवाब है उनके द्वारा दिए गए इनवेस्टिंग टिप्स।
दरअसल वाणी कोला एक सफल बिजनेसवूमेन तो हैं ही और इसकी घोषणा फार्च्यून लिस्ट में भी हो चुकी है। लेकिन लोग वाणी को उनके बिजनेस या उनकी सफलता की कहानियों के लिए जानना पसंद नहीं करते। बल्कि वाणी कोला को तो उनके फैन्स उनके इन्वेस्टिंग टिप्स के लिए सर्च करते हैं और एक मुलाकात मिलने पर उनसे उनके इनवेस्टमेंट टिप्स के बारे में जानने के लिए बेताब रहते हैं।
जी हां… वाणी कोला अपनी सफलता और बिजनेस से ज्यादा अपने इनवेस्टमेंट गुणों के लिए ज्यादा जानी जाती है और उनके यही गुण उन्हें देश का सबसे सफलतम इनवेस्टर बनाते हैं। इसलिए आज हम देश की इस सबसे सफल इनवेस्टर के बारे में तो जानेंगे ही साथ में ये भी जानेंगे कि सही इन्वेस्टिंग कैसे की जाती है।

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There were only 6 girls among 400 boys

ग्रेजुएशन के दौरान कॉलेज में 400 लड़कों के बीच थीं केवल 6 लड़कियां

वाणी कोला भारत की शुरुआती महिला उद्यमी और पूंजीपति में से एक है। यह कलारी कैपिटल की संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं। कलारी कैपीटल भारत के शुरुआती कैपीटल वेंचर फर्म है जो अन्य कंपनियों में इन्वेस्ट करने को अपनी प्राथमिकता देता है।
वाणी कोला का जन्म 1964 (या फिर 1963 में पुष्टि नहीं हुई है) में हैदराबाद (अभी तेलंगाना) में हुआ था। वाणी शुरू से ही पढ़ाई में अच्छी थीं और उनकी चीजों को लेकर समझ उस समय के अन्य लड़कियों से अलग थी। रसोई में उनका इंटरेस्ट था कि नहीं इस बारे में साफ तौर पर तो नहीं कहा जा सकते लेकिन इलेक्ट्रिकल चीजों को लेकर उनका रुझान काफी था। घर में लड़कियों की पढ़ाई पर रोक-टोक तो नहीं थी लेकिन ऐसा भी नहीं था कि विशेष तौर पर बढ़ावा दिया जाए। इसलिए यह सबकुछ वाणी पर ही निर्भर करता था कि वह अपनी क्षमता को निखारकर आगे बढ़ने का फैसला करती हैं कि नहीं?
वाणी ने अपनी क्षमताओं को निखारने पर ही ध्यान दिया। इनकी शुरुआती शिक्षा घर के पास के विद्यालय से हुई। फिर इन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से पूरा किया। यह उस समय की बात है जब भारत एक बंद अर्थव्यवस्था थी और लड़कियों के लिए पढ़ाने से पहले रसोई के काम सीखना ज्यादा जरूरी होता है। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि उस समय हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में 400 इंजीनियरंग के छात्र थे जिसमें केवल 6 लड़कियां पढ़ती थीं।

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Then went to America to do master

फिर मास्टर करने के लिए अमेरिका गईं

ग्रेजुएशन करने के बाद अच्छे माहौल और अच्छी पढ़ाई के लिए वाणी 1980 के दशक में अमेरिका चली गईं। इन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की।

शुरुआती करियर में ही सिलिकॉन वैली में लहराया अपना परचम

वाणी कोला ने अपना शुरुआती करियर सिलिकॉन वैली में शुरू किया। यहां उनका 22 साल का करियर रहा। इन्हें वहां सीरयल उद्यमी (serial entrepreneur) के नाम से जाना जाता है। करियर के शुरुआती दिनों में इन्होंने ई-प्रोक्योरमेंट कंपनी राइटवर्क्स(RightWorks) की स्थापना की और अपने मेहनत से उसे सफल बनाया। फिर 4 साल बाद इस कंपनी को $657 मिलियन में ICG को बेच दिया। उस समय यह डील सिलिकॉन वैली में किसी भारतीय महिला द्वारा की गई सबसे बड़ी डीलों में से एक थी जिस पर हर किसी की नजर गई। वाणी की सबसे अच्छी बात यह थी कि इस डील के समय वह एक अन्य कंपनी Certus Software की सीईओ और फाउंडर थीं।

इनके इन्वेस्टिंग टिप्स कीमती नहीं, अनमोल हैं

वाणी कोला की सबसे अच्छी बात है कि वे अपने हर फैसले खुद लेती हैं और उन्हें अपने हर फैसले पर काफी भरोसा होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि उनका यह गुण उन्हें उम्र के साथ नहीं मिला है। बल्कि यह गुण उनमें शुरू से ही था जो कि समय के साथ और अधिक सटीक होता गया। तभी उनके पास लोग उनसे, उनके सफलता के राज जानने के लिए नहीं बल्कि उनसे इन्वेस्टिंग टिप्स लेने के लिए आते हैं।

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Investing tips

2006 में लौटीं भारत

सिलिकॉन वैली में जाकर काम करने का सपना हर युवा का होता है लेकिन हर युवा उसके बाद देश लौटकर देश की सेवा करने का सपना देखता है। ऐसा ही सपना वाणी का था और इसलिए वे 2006 में भारत लौटीं। भारत में वाणी एक उद्यम पूंजी फर्म शुरू करने के लिए आई थीं जो उस समय के भारत के लिए बिल्कुल नया था। वाणी ने विनोद धाम के साथ मिलकर 2006 में इंडो-यूएस वेंचर पार्टनर्स (IUVP) की स्थापना की। न्यू एंटरप्राइज एसोसिएट्स (एनईए) के साथ एक साझेदारी, यह भारत में उद्यम पूंजी में उनका प्रारंभिक उपक्रम था। 2012 में इसका नाम बदलकर कलारी कैपिटल कर दिया गया था। कोला कलारी कैपिटल के प्रबंध निदेशक है। वह एक प्रौद्योगिकी-केंद्रित प्रारंभिक चरण की निवेशक है और वैश्विक कंपनियों के निर्माण के लिए उद्यमियों के साथ काम करती है, उच्च विकास उद्यम बनाने के लिए भारत के घरेलू विकास का लाभ उठाती है। कोला ने ई-कॉमर्स, मोबाइल सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में निवेश का नेतृत्व किया है। उनके कुछ उल्लेखनीय उद्यम पूंजी प्रयासों में शामिल हैं: ड्रीम11, अर्बन लैडर, स्नैपडील और मिंत्रा।

भारत में न्यू एंटरप्राइज एसोसिएट्स (New Enterprise Associates) के साथ उनकी साझेदारी शुरुआती वेंचर केपिटल व्यवसाय था। 2012 में जिसे इन्होंने कलारी केपिटल (Kalaari Capital) के नाम से रीब्रांड कर लॉन्च किया। कोला के नेतृत्व में कलारी केपीटल 2017 तक 650 मीलियन यूएस डॉलर की संपत्ति बन गई।

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India returned in 2006

क्या है कलारी कैपिटल

कलारी कैपिटन एक निवेशक कंपनी है जो स्टार्टअप्स या अन्य कंपनियों में निवेश करती है। इस फर्म ने कई सारे ई-कॉमर्स, मोबाइल सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रोजेक्टस में निवेश किया है जिसमें ड्रीम11, अर्बन लैडर, स्नैपडील और मिंत्रा जैसी ऑनलाइन कंपनियां शामिल हैं।

वाणी कोला के टिप्स

जब वाणी से उनके इन्वेस्टिंग टिप्स के बारे में पूछा जाता है तो वह हंसकर कहती हैं मुझे इस बारे में शुरुआती करियर के दौरान कुछ मालूम भी नहीं था और ना ही अब मालूम है। फिर जब उनसे युवाओं को देने वाले टिप्स के बारे में पूछा जाता है तो वह पांच मुख्य टिप्स देती हैं जिन पर हर किसी को ध्यान देने की जरूरत है।

बातचीत का तरीका प्रभावी बनाएं


वाणी हर युवा को अपने बातचीत का तरीका प्रभावी बनाने की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि आज का युवा काफी उत्साही है और हर चीज के बारे में जागरुक है। ऐसे में अगर कोई चीज आपको खास बनाएगी तो वह है आपके बातचीत का ढंग।
वाणी कोला मानती हैं और हर किसी को यह सलाह देती हैं कि प्रभावी ढंग से संवाद करना किसी भी बिजनेस को सफल बनाने और वित्तीय सफलता हासिल करने के लिए काफी जरूरी है। बोलना सब जानते हैं, लेकिन अपनी बात को प्रभावी ढंग से रखने का तरीका किसी-किसी को ही मालूम होता है और यह ऐसा गुण है जिस पर एक दिन में आप माहिर नहीं हो सकते बल्कि यह कई सारे प्रयासों का परिणाम होता है। इसका अभ्यास रोज करें और हितों व बाजार में तालमेल बनाने के लिए राजनयिकों से सीखें। इसके साथ ही दूसरे व्यक्ति की प्राथमिकताओं और जरूरत को समझें। राजनेताओं से सीखने के टिप्स शायद ही कोई और आपको दें लेकिन वाणी आपको यह टिप्स देती है क्योंकि उनका मानना है कि हर किसी में कुछ ना कुछ गुण होता है और हर किसी से कुछ ना कुछ सीखा जा सकता है।

आउटरीच लिस्ट बनाएं

अपने और अपने सेक्टर के पॉजिटिव और नेगेटिव चीजों की लिस्ट तो सब बनाकर रखता है लेकिन एक स्टार्टअप के तौर पर यह केवल काफी नहीं होता है। आपको पूंजी इन्वेस्ट करने से पहले रिसर्च में समय इन्वेस्ट करने की जरूरत है। यह हर स्टार्टअप्स को संभावित निवेशकों और प्रमुख हितधारकों की पहचान करने में मदद करेगा। व्यवस्थित होना और फिर उन्हें उनके इंटरेस्ट एरिया और उनकी पहुंच के तौर पर बांटना बहुत ही जरूरी चरण है।

ई-मेल करना सीखें और पर्सनली मेल करें

हाल ही में आई विश्व आर्थिक मंच की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में दुनिया में हर एक मिनट में 197 मीलियन ईमेल भेजे जाते हैं। आज के प्रोफेशनल लाइफ में ईमेल्स का बहुत बड़ा रोल है। इसी रोल के महत्व के बारे में समझाते हुए वाणी कोला कहती हैं एक ईमेल आपके रेज्यूमे, आपकी डील, आपके फीडबैक, आपकी पूरी पर्सनेलिटी के बारे में अच्छे से परिचय दे देता है। ऐसे में केवल इसे एक ईमेल ना समझें बल्कि इसे अपना आईना समझें और आप जैसा खुद को देखना चाहते हैं वैसा अपना ईमेल रखें। आपको फिर सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
इसका सबसे बेहतर तरीका है सबको एक ही फॉर्मेट में मेल भेजना एक अच्छा तरीका नहीं है। जबकि आज के युवा रेज्यूमे और मेल का एक फॉर्मेट तैयार रखते हैं और उसे ही सब जगह भेजते हैं। ऐसा बिल्कुल भी ना करें। हर जॉब या इन्वेस्टिंग के लिए अपने पर्सनल रुझान को उस कंपनी से जोड़कर ईमेल करें और फिर देखें जादू।

फॉलोअप लें

युवा जॉब के लिए ये इन्वेस्टर को रिझाने के लिए एक मेल कर देते हैं और उनके जवाब का इंतजार करते रहते हैं। यह सही तरीका नहीं है। इसके दो कारण हैं-
पहला तो कि सामने वाला बिज़ी हो सकता है और शायद उन्होंने आपका ईमेल नहीं देखा हो या भूल गया हो।
दूसरा, जरूरत आपको है तो एक बार याद दिलाने में क्या हर्ज है। यह आपकी दृढ़ता और गंभीरता के गुणों को ही पेश करेगा।
तो वाणी के अनुसार आज के गलाकट प्रतिस्पर्द्दा में केवल एक मेल भेजना ही काफी नहीं है। कुछ दिनों के इंतजार के बाद, वाणी फॉलोअप लेने की सलाह देती है। और वह ऐसा कम से कम तीन बार करने को कहती है। लेकिन प्रत्येक बार के लिए अलग-अलग मेल लिखने की सलाह देती हैं।

जिद्दी बने

वाणी हर युवा को जिद्दी बनने की सलाह देती है। खासकर महिलाओं को जो करियर में अभी-अभी उतरी हैं और उन्हें लंबा सफर तय करना है। ऐसे में बिना जिद्दी बने इस सफर को तय करना नामुमकिन है। वाणी कोला ने यह गुण अपने पहले डील से ही बनाए रखा है। वह कहती हैं जब भी ‘no- ना’ सुनें तो उनके साथ खुद को शामिल ना करें बल्कि आगे बढ़ें और किसी दूसरी कंपनी या इन्वेस्टर को ढूंढें। क्योंकि ना बोलने वाला इंसान आपको नहीं जानता है।

वाणी की आखिरी सलाह काफी सही है। क्योंकि स्वर्गीय स्वर कोकिला लता मंगेशकर को भी उनके करियर के शुरुआती समय में उनकी पतली आवाज के कारण रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था और बाद का इतिहास तो आप सबको ही मालूम है। तो जिद्दी बनें और करियर के लंबे सफर में परचम लहराकर ही सांस लें। ये दुनिया आपकी मुराद हो जाएगी।

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