Rohini Vrat 2023 March: भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध धर्म जैसे अनेकों प्रकार के धर्म का पालन करने वाले लोग रहते हैं। अलग- अलग धर्म को मानने वाले लोग अपने धर्म के अनुसार ही व्रत- त्योहार मनाते हैं। आज इस लेख में हम बात करेंगे जैन धर्म के रोहिणी व्रत के बारे में जो जैन धर्म के लोगों के लिए एक विशेष दिन होता है। पंचाग के 27 नक्षत्रों में से जब महीने के किसी दिन रोहिणी नक्षत्र आता है] तो उस दिन यह व्रत किया जाता है। इस तरह साल में 12 रोहिणी नक्षत्र का व्रत किया जाता है। कभी कभी महीने में 2 रोहिणी व्रत भी आते हैं। इस महीने 27 मार्च 2023 को रोहिणी व्रत रखा जाएगा।सूर्योदय के बाद रोहिणी नक्षत्र सबसे ज्यादा शक्तिशाली होता है। इस दिन जैन धर्म की महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती है। पुराने जैन धर्मग्रंथों में इस व्रत की विधि और महत्व का वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं रोहिणी व्रत की विधि और महत्व के बारे में।
रोहिणी व्रत की पूजा विधि

जैन धर्मशास्त्रों के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के दिन इस व्रत को करने के कारण ही इसे रोहिणी व्रत कहते हैं। जैन धर्म के पुरुष और महिलाएं यह व्रत करती हैं। सुबह जल्दी उठकर नहाकर, साफ कपड़े पहनकर पवित्र मन से यह व्रत किया जाता है। इस दिन जैन धर्म के लोग, जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर श्री वासुपूज्य जिनेन्द्र जी की पंचरत्न, तांबे या सोने से बनी मूर्ति की पूजा ऊँ हीं श्री वासुपूज्य जिनेन्द्राय नम: महामंत्र का तीन बार जाप करते हुए की जाती है।
व्रत करने वाले वासुपूज्य जी को फूल, फल, अगरबत्ती, धूप अर्पित कर यह संकल्प लेते हैं कि हम किसी के साथ कभी कोई बुरा व्यवहार नहीं करेंगे। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त के समय रोहिणी नक्षत्र तक यह व्रत करने वाले महिलाएं और पुरुष अन्न जल का त्याग करते हैं, जिसे चौविहार कहा जाता है। अगले दिन सुबह गरीबों को दान करते हैं। यह व्रत 3, 5 या 7 साल के लिए किया जाता है। व्रत के साल पूरे होने पर विधि विधान से व्रत का उद्यापन किया जाता है।
रोहिणी व्रत का महत्व

मान्यता है कि रोहिणी व्रत करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। मन के विकार दूर होते है। पति पत्नी के आपसी संबंधों में मधुरता आती है। व्रत करने वाले व्यक्ति के मन से लोभ और जलन जैसे भाव खत्म हो जाते है। साथ ही महिलाओं द्वारा रोहिणी व्रत करने पर उनके पति को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही घर के सभी सदस्यों का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। क्योंकि इस दिन घर में शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाया जाता है। इस व्रत को करने वाले सभी लोगों के घरों में भगवान वासुपूज्य जी का आशीर्वाद बना रहता है जिससे घर में धन- धान्य और सुख- समृद्धि बढ़ती रहती है। साथ ही इस व्रत से जन्म- मरण के बंधनों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है।
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