Should women touch the Shivling
Premanand Maharaj's answer on the question, that women should touch the Shivling might surprise you

Overview:शिवलिंग को लेकर समाज में फैली मान्यताओं पर क्या कहते हैं संत प्रेमानंद जी महाराज

महिलाओं का शिवलिंग स्पर्श करना धार्मिक रूप से वर्जित नहीं, बल्कि सामाजिक धारणाओं पर आधारित एक परंपरा है। संत प्रेमानंद जी महाराज ने इस मुद्दे पर जो बात कही है, वह न सिर्फ महिला श्रद्धालुओं को आत्मविश्वास देती है, बल्कि समाज को सोचने पर मजबूर भी करती है।

Premanand Maharaj on Shivling: हिंदू धर्म में शिवलिंग को सर्वोच्च पूजनीय माना गया है। इसे भगवान शिव का प्रतीक स्वरूप माना जाता है और इसके पूजन से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। लेकिन एक सवाल लंबे समय से चर्चा में है — क्या महिलाएं शिवलिंग को छू सकती हैं? क्या यह धार्मिक रूप से वर्जित है या केवल एक सामाजिक धारणा है? हाल ही में इस विषय पर संतप्रेमानंद जी महाराज का बयान सामने आया है, जिसने इस मुद्दे को एक नया दृष्टिकोण दे दिया है। आइए जानते हैं उन्होंने इस विषय पर क्या कहा, और इससे समाज में क्या बदलाव आ सकता है।

परंपराओं में महिलाओं को शिवलिंग से दूर क्यों रखा गया

Why women were kept away from the Shivling
Why women were kept away from the Shivling

प्राचीन काल से ही समाज में यह मान्यता रही है कि महिलाएं, विशेषकर मासिक धर्म के दौरान, शिवलिंग को स्पर्श नहीं कर सकतीं। यह धारणा शुद्धता और अपवित्रता की अवधारणा पर आधारित रही है। लेकिन समय के साथ इसका अर्थ और प्रसंग बदलते गए।

प्रेमानंद जी महाराज की राय: श्रद्धा सर्वोपरि है

प्रेमानंद जी महाराज ने अपने प्रवचनों में स्पष्ट रूप से कहा कि “अगर महिला सच्ची श्रद्धा से शिव को पूजती है तो शिवलिंग स्पर्श करने में कोई दोष नहीं है।” उनके अनुसार, ईश्वर भेद नहीं करते — ना जाति, ना वर्ग और ना ही लिंग के आधार पर।

धर्म में भावनाओं को दिया गया है स्थान

महाराज जी ने बताया कि भगवान शिव तो “भोलेनाथ” हैं — जो भावनाओं को समझते हैं, औपचारिकताओं से ऊपर हैं। यदि कोई महिला अपने मन से, श्रद्धा से भगवान का पूजन करती है, तो वह किसी भी धार्मिक नियम का उल्लंघन नहीं कर रही।

समाजिक मान्यताएं और धार्मिक सच्चाई

अक्सर जो बातें परंपरा के नाम पर कही जाती हैं, वे धर्मग्रंथों में स्पष्ट रूप से नहीं होतीं। प्रेमानंद जी ने यह भी कहा कि “अज्ञान के कारण समाज में कई भ्रांतियाँ फैली हैं, जिन्हें दूर करना ज़रूरी है।”

मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर दृष्टिकोण बदल रहा है

हाल के वर्षों में कई मंदिरों में महिलाओं को प्रवेश और शिवलिंग स्पर्श की अनुमति मिलने लगी है। यह समाज में बढ़ती जागरूकता और संतों की आधुनिक सोच का ही परिणाम है।

महिला श्रद्धालुओं को क्या करना चाहिए

प्रेमानंद जी के अनुसार, यदि किसी महिला की श्रद्धा सच्ची है और वह ईश्वर से जुड़ाव महसूस करती है, तो उसे रोकना गलत होगा। हालांकि, यदि मंदिर की व्यवस्था या पुरानी परंपरा इसका विरोध करे, तो विवाद से बचने की सलाह दी जाती है।

युवा पीढ़ी के लिए है यह एक नई सीख

आज की पीढ़ी को धर्म को समझने और आत्मसात करने की आवश्यकता है। सिर्फ रिवाजों का पालन नहीं, बल्कि पीछे छिपे भाव और ज्ञान को समझना ज़रूरी है। प्रेमानंद जी की बातों से यही स्पष्ट होता है।

मेरा नाम श्वेता गोयल है। मैंने वाणिज्य (Commerce) में स्नातक किया है और पिछले तीन वर्षों से गृहलक्ष्मी डिजिटल प्लेटफॉर्म से बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हूं। यहां मैं महिलाओं से जुड़े विषयों जैसे गृहस्थ जीवन, फैमिली वेलनेस, किचन से लेकर करियर...