googlenews
child health
 
आमतौर पर लोगों की सुबह की शुरुआत ही चाय की चुस्की से होती है। चाय न मिले तो मानो दिन ही खराब हो जाता है। कुछ बड़े बुजुर्गों का तो ये भी मानना है कि बच्चों को भी चाय पिलानी चाहिए क्योंकि उससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बच्चे खाने -पीने की आदतों के लिए पूरी तरह से अपने बड़ों पर निर्भर होते हैं। इस बात में कोई दोराय नहीं है कि चाय बड़ों के लिए कई तरह से फायदेमंद है लेकिन एक बच्चे और एक वयस्क पर चाय का असर अलग-अलग होता है।  अगर आपका बच्चा बहुत अधिक चाय पीता है तो इसका असर उसके शारीरिक विकास पर पड़ने के साथ-साथ  उसके मस्त‍िष्क, मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम पर भी पड़ सकता है।  कई बार हम ये सोचकर ज्यादा दूध वाली चाय बच्चे  को दे दते हैं कि चाय के बहाने ही सही बच्चे को दूध मिलेगा लेकिन ऐसा करना बिलकुल गलत् है क्योंकि चाय बच्चों की सेहत के लिए अच्छी नहीं है। आइए आपको इसके बताते है की चाय बच्चों को किस तरह से नुकसान पहुंचाती है। 
 
 
नींद कम आती है 
चाय में कैफीन होती है जिसकी वजह से चाय पीने से बच्चों को नींद कम आती है और उनका विकास ठीक से नहीं हो पाता है। कम उम्र में ही अनिद्रा की शिकायत की वजह से बच्चा पढ़ाई में भी ठीक से  मन नहीं लगा पाता है। 
 
 सिरदर्द की समस्या 
चाय में पाए जाने वाले निकोटीन की वजह से बच्चा इसका आदि हो जाता है और चाय न मिलने पर उसे सिरदर्द , सुस्ती और आलस्य जैसे समस्याएं हो जाती हैं। 
 
 तंत्रिका तंत्र  पर बुरा असर पड़ना 
 
 चाय में कैफीन होती है और ज्यादा चाय पीने से बच्चे के नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है। कैफीन तंत्रिका तंत्र के साथ -साथ बच्चे के मस्तिष्क , मांसपेशियों और हड्डियों पर भी बुरा असर डालती है। 
 
 शरीर में चीनी की मात्रा बढ़ती है
चाय में पड़ने वाली चीनी से बच्चों के शरीर में चीनी की मात्रा बढ़ जाती है जो आगे चलकर मोटापे और मधुमेह की समस्या को जन्म देती है। 
 
इसमें कोई पोषक तत्व नहीं होता है 
 चाय में ऐसा कोई भी पोषक तत्त्व नहीं होता है जो बच्चों की सेहत के लिए लाभदायक हो। कई बार हम ज्यादा दूध वाली चाय बच्चों को देते हैं कि इससे शायद बच्चों को दूध का पोषण मिल जाए लेकिन वास्तविकता ये है कि दूध में चाय पत्ती डालने से दूध का पोषण भी ख़तम हो जाता है।