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Parenting Tips: बच्चों को पालना इस दुनिया का सबसे मुश्किल काम है। लेकिन हमारे समाज में यह काम अकेले मां की जिम्मेदारी बनती है। इसलिए तो इंडियन महिलाएं इतनी फ्रस्टेट होती हैं। खासकर तो पुरुष इनकी परेशानी समझते नहीं है और एक ही सवाल पूछते रहते हैं कि आखिर में तुम घर में बैठे करती क्या हो? वह तो अच्छा हुआ कि कोरोना के कारण लॉकडाउन हो गया है और उन्हें पता चला कि घर के काम ही पूरे दिन में थकाने के लिए काफी होते हैं। ऐसे में बच्चों की जिम्मेदारी दोहरी जिम्मेदारी हो जाती है जो इंडियन महिलाओं को सुपरवुमेन बनाने के लिए काफी है। फिर भी कई पुरुषों को कोई फर्क नहीं पड़ता है। कुछ ही पुरुष है जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान बच्चों की जिम्मेदारी को समझा और अपने पार्टनर के साथ इस जिम्मेदारी को साझा किया।
लॉकडाउन का फायदा रहा कि पति-पत्नी (जिन्होंने एक-दूसरे की सच में मदद की) दोनों ने अपने बच्चे को सामने बड़ा होते हुए देखा और एक-दूसरे की जिम्मेदारी में बराबर के भागीदार बने रहे। कुछ पुरुषों ने तो नए जन्मे शिशु को नहलाने और उनकी पोटी साफ करने की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।  

पैरेटिंग है चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी

इस जिम्मेदारी को निभाते हुए ही पुरुषों को अहसास हुआ है कि बच्चे को पालना एक चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी है और बच्चे अपने आप बड़े नहीं हो जाते। दिनभर घर में बच्चों को झेलना और उनके ऊटपटांग कामों पर बिना गुस्सा किए समझाना एक बहुत ही धैर्य वाला काम है। बच्चों के सवाल ही कई बार खीझ बढ़ाने वाले होते हैं। इन सब बातों से कई पुरुष अब भी अनजान हैं जिनकी नजर में महिलाओं का काम ना के बराबर होता है। ऐसे लोगों का तो कुछ नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर आपके पार्टनर थोड़े भावुक हैं और इस चीज को समझते हैं तो आप उनसे अपनी पैरेंटिंग की जिम्मेदारी साझा कर सकती हैं। वैसे भी आजकल पति-पत्नी दोनों वर्किंग होते हैं, ऐसे में किसी एक पर बच्चों की जिम्मेदारी डालना उसके साथ अन्याय होगा। तो इस काम में अपने पति की मदद जरूर लें। अगर वह मदद करने के इच्छुक नहीं हैं तो उन्हें आप बताइए कि पैरेंटिंग कोई आसान काम नहीं है और आर्थिक जिम्मेदारियों को बांटने के साथ इसकी जिम्मेदारी भी साझा करने की जरूरत होती है।

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Responsibility

पैरेंटिंग हो सकती है मजेदार

साथ ही उन्हें यह समझाएं कि अगर दोनों साथ मिलकर पेरेंटिंग की जिम्मेदारी साझा करेंगे तो यह एक मजेदार अनुभव हो सकता है। क्योंकि जब तक आप समझाएंगी नहीं तब तक शायद ही आपके पति समझेंगे। क्योंकि आज भले ही स्मार्टफोन हर किसी के हाथ में है और जमाना मॉडर्न हो गया हो लेकिन सोच अभी भी वही है कि घर के और बच्चों के काम मां या पत्नी के ही जिम्मेदारी होते हैं। तो जिस तरह से पढ़ने के लिए और काम करने के लिए महिलाओं ने आवाज उठाई थी उसी तरह से घर के काम और बच्चों की परवरिश में पति को साझेदार बनाने के लिए भी महिलाओं को आवाज उठानी होगी और अपने पति इस बात का अहसास दिलाना होगा कि यह एक बहुत ही मुश्किल काम है।
इसके लिए इन तरीकों को अपनाएं और अपने पति को पैरेटिंग के काम में साझेदारी बनाएं।

पहला सुझाव : ज़िम्मेदारियों का बंटवारा स्पष्ट कर लें

इसे गंभीर तौर पर लें और शुरुआत में ही(बच्चा पैदा होने के समय ही) पेरेंटिंग की जिम्मेदारी का बंटवारा कर लें। क्योंकि जब आप किसी के साथ कोई काम मिल कर करती हैं तो उसमें मुश्किलें भी काफी आती है, लेकिन एक बार काम का बंटवारा अच्छी तरह से हो जाता है तो वह आसानी से हो भी जाता है। जैसे टीम वर्क में होता है। आपने देखा होगा कि शुरुआत में टीम वर्क में एक-दूसरे से सामंजस्य बैठाने में थोड़ी-बहुत मुश्किल जरूर आती है लेकिन समय के साथ सारी चीजें आसानी से होने लगती है और टीम में टीममेट्स एक-दूसरे की ताकत बन जाते हैं। ऐसा ही पैरेंटिंग की पार्टनरशिप में करें।
तो बच्चे के पैदा होने के साथ ही उनको नहलाने की जिम्मेदारी आप लें तो पॉटी साफ करने की जिम्मेदारी अपने पति को दें। रात में अगर डायपर बदलने की जिम्मेदारी आप लेती हैं तो दिन की जिम्मेदारी उन्हें दें। ऐसे ही हर काम का बंटवारा करें और पैरेंटिंग को आसान व मजेदार बनाएं। 

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Clarify the distribution of responsibilities

दूसरा सुझाव : जिम्मेदारियों में बदलाव ना करें

पैरेंटिंग की जिम्मेदारी काफी पेचीदा होती है इसलिए इसमें ऑफिस के टास्क की तरह-तरह बार-बार बदलाव ना करें। क्योंकि आपके पति को ये सब की बिल्कुल भी आदत नहीं है और वह इसे अपना काम मानते भी नहीं है। वह केवल आपकी मदद करने के लिए ऐसा कर रहे हैं इसलिए एक बार जो काम का बंटवारा हो चुका है उसमें बदलाव ना करें। वैसे भी बार-बार बदलाव आपके पार्टनर को कंफ्यूज ही करेगा और वह आपकी मदद करने से चूक जाएंगे।
अगर किसी चीज की समस्या हो रही है तो उसके बारे में अपने पति से बात करें और सुलझाएं। केवल इस बात का ध्यान रखें कि आपको अपनी जिम्मेदारी खुशी-खुशी साझा करनी है ना कि बोझ की तरह। वरना पैरेंटिंग को साझा करने कोई मतलब नहीं रह जाएगा।     

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Don’t Change Responsibilities

तीसरा सुझाव: टाइम टेबल बनाएं

किसी भी काम को करने में सबसे बड़ा रोल टाइम मैनेजमेंट का ही होता है। इसलिए इस पैरेंटिंग के साझेदारी के काम में भी आप अपना खुद का टाइम टेबल बना लें। खासकर तो तब जब आप दोनों ही ऑफिस के साथ बच्चे को संभाल रहे हैं और अगर हाउसवाइफ हैं तो यह और भी ज्यादा जरूरी है क्योंकि आपके पति को यह समझना है कि आप घर में केवल बैठी नहीं होती हैं बल्कि बाकी काम भी करती है। इसलिए सबसे पहले टाइम टेबल बनाएं और ऑफिस के काम व बच्चों के काम के लिए टाइम का बंटवारा कर लें। क्योंकि ऑफिस के काम में अगर अंडर-परफॉर्मर हो गए तो अच्छे माता-पिता बनने के बाद भी खुशी नहीं मिलेगी।
जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होने लगे तो कुछ काम उसे स्वयं करने दें और बाकी काम पति-पत्नी आपस में बांटे। कुछ पैरेंट्स बच्चों के काम से फ्री होने के लिए कई बार उनके होमवर्क खुद कर देते हैं। ऐसा ना करें। ऐसा कर के आप खुद के साथ भी और बच्चे के साथ भी गलत कर रहे हैं। इससे बच्चा कुछ सीखेगा नहीं और आप खुद पर एक्सट्रा बोझ डाल रहे हैं। इसलिए उनकी होमवर्क करवाने में मदद करें। धीरे-धीरे वह खुद होमवर्क करने लगेंगे।
इसलिए टाइम टेबल बनाकर दोनों जगहों के काम में तालमेल बैठाएं और खुद को मल्टीटास्कर बनाएं। इससे आपको वाकई में बहुत खुशी मिलेगी।  

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