युवा देश की पूंजी होते हैं। यदि युवाओं को उन्नत शिक्षा और सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, उन्हें बेहतर सुअवसर प्रदान किए जाएं, जोखमों का मजबूती से सामना करना सिखाया जाए, तो निस्संदेह वे एक बेहतर और विकसित भारत के निर्माण के लिए अपना युवा दिमाग लगा सकते हैं और हर तरह की कठिनाइयों एवं चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सकते हैं। भारत में युवाओं को महंगी शिक्षा और बेरोजगारी के अलावा जिन अन्य मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है, उनमें शामिल हैं नशीली दवाओं की लत, यौन शोषण, असहिष्णुता और हिंसा। इन सभी मुद्दों को जड़ से उखाड़ फेंकने के बाद ही युवाओं से नए भारत के निर्माण में सहयोग देने की अपेक्षा की जा सकती है।
नशीली दवा का दुरूपयोग
आज के समय में युवाओं में नशे की लत पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर समस्या बनकर उभरी है। निरंतर दबाव, किशोरावस्था में अपरिपक्वता और यहां तक कि अभिभावकों का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार ऐसे कुछ कारण हैं, जो हमारे युवाओं को नशे की ओर आकर्षित कर रहे हैं, जिससे न केवल उन्हें बाद में पछतावा होता है बल्कि उनका जीवन भी असभ्य बन जाता है।विशेषज्ञों की रिपोर्ट बतलाती हैं कि किशोरावस्था तक पहुंचते-पहुंचते बच्चे मादक पदार्थों का सेवन करना शुरू कर देते हैं। हमें विचार करना होगा कि ड्रग्स और एल्कोहल तक उनकी पहुंच को कैसे रोक सकते हैं।
इन प्रश्नों के उत्तर इस प्रकार हैं-
- ड्रग्स और एल्कोहल के सेवन को रोकने के लिए परिवार और दोस्तों से भरपूर सहयोग मिलना चाहिए।
- देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे पुनर्वास केन्द्र उपलब्ध कराए जाएं जो ऐसे युवाओं की मदद करें जिन्हें नशे की लत लग चुकी है।
- आधी जंग तो तब ही खत्म हो जाती है जब कोई व्यसनी यह प्रण कर लेता है कि उसे नशे की लत को छोडऩा है। नशे में लिप्त युवाओं को निरंतर ऐसे लोगों के सम्पर्क में रहना चाहिए जो उनको समझ सके।
परिवार के सदस्यों का सहयोग
अपने प्रियजनों का सहयोग मिलना बहुत जरूरी है। परिवार के सदस्यों को यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि ऐसी क्या परिस्थितियां थीं जिन्होंने उसे (बच्चे को) ऐसा
जोखिम भरा स्टेप लेने के लिए मजबूर किया। अभिभावकों को अपने बच्चों से उम्मीदें पालने से पहले उन्हें कम से कम ऐसी परवरिश तो जरूर देनी चाहिए कि उनका बच्चा बड़ा होकर एक अच्छा इंसान जरूर बन सके और अपने समाज की बेहतरी के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे पाये।
यौन शोषण
यौन शोषण आज देश की सबसे गंभीर और दुखद स्थिति बन चुकी है। बाल-दुव्र्यवहार जो एक सामाजिक बुराई के तौर पर तेजी से उभर रहा है, का सामना करने के लिए हमें अपने विचार रूपी शक्तिशाली हथियार का इस्तेमाल करना होगा। जिन लोगों के हाथों में बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा है, वही दोषियों को सहयोग देते दिखाई पड़ रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए समाज, कानून, व्यवस्था-प्रणाली और अन्य कल्याणकारी संस्थानों एवं शिक्षण संस्थानों से भरपूर सहयोग मिलना चाहिए।
असहिष्णुता
धर्म, जाति, सामाजिक स्थिति आदि के आधार पर आज मनुष्य ही मनुष्य से असहिष्णुता की भावना रखने लगा है। यह बात युवाओ में आम हो गई है। वे छोटी-छोटी बातों पर अधीर हो जाते हैं। शिक्षा न केवल इन चरम सीमाओं को समझने में बल्कि सामाजिक परिवर्तन के तरीकों को प्रदान करने में भी एक मुख्य भूमिका अदा कर सकती है।
निष्कर्ष
वर्तमान में हमारा देश कई चुनौतियों से जूझ रहा है और हमारे युवा किसी भी चुनौती का समाधान ढंढने में सक्षम हैं। आगामी नये वर्ष में हमें अपने युवाओं का एक नया नज़रिया देखने को मिलेगा जो नशीली दवाओं के दुरूपयोग, यौन शोषण, असहिष्णुता और हिंसा से मुक्त होगा। वे अपने साथी युवाओं पर सकारात्मक प्रभाव डाल पाने में
जरूर सक्षम होंगे। वे उन्हें जीवन में सकारात्मक चीज़ों को सिखाने में जरूर कामयाब होंगे।

