Chinese Reverse Parenting: कई बार बच्चे पेरेंट्स की बात नहीं सुनते, उनके बताए गए काम नहीं करते बल्कि उन्हें उलटा जवाब देते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चों को सही रास्ते पर लाने में रिवर्स पेरेंटिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ये पेरेंटिंग इनदिनों चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रही है। इन वीडियोज में बच्चे घर का काम करते नजर आ रहे हैं और पेरेंट्स आराम से बैठकर चिल कर रहे हैं। आपको बता दें कि रिवर्स पेरेंटिंग में बच्चों को घर और बाहर की जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं। गर्मी की छुट्टियों में बच्चों को इंगेज रखने में ये पेरेंटिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रिवर्स पेरेंटिंग बच्चे के लिए कितनी फायदेमंद है और इसे कैसे अप्लाई किया जा सकता है चलिए जानते हैं इसके बारे में।
क्या है रिवर्स पेरेंटिंग

रिवर्स पेरेंटिंग एक ऐसी पेरेंटिंग है जो दादी-नानी के समय से चलती आ रही है। बच्चों को जिम्मेदार बनाने और उन्हें काम की अहमियत के बारे में समझाने के लिए हमारे ग्रांडपेरेंट्स घर के काम की जिम्मेदारी उन्हें दिया करते थे। उसी के तर्ज पर वर्तमान में पेरेंट्स बच्चों को आत्मनिर्भर व जिम्मेदार बनाने के लिए घर और बाहर के काम दे उन्हें सौंप रहे हैं। इस स्थिति में माता-पिता और बच्चे की भूमिकाएं उलट जाती हैं। बच्चे पेरेंट्स द्वारा निभाए जाने वाली सभी जिम्मेदारियां खुद निभा रहे हैं और पेरेंट्स आराम कर रहे हैं।
रिवर्स पेरेंटिंग के फायदे
बच्चे बनेंगे आत्मनिर्भर: इस प्रकार की पेरेंटिंग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती है। इसके तहत बच्चे घर के सभी जरूरी काम करना सीख सकते हैं। वह भविष्य में किसी पर डिपेंडेंट नहीं होंगे।
बच्चे और पेरेंट्स का मजबूत रिश्ता: रिवर्स पेरेंटिंग से बच्चे और पेरेंट्स का रिश्ता मजबूत हो सकता है। वह एक-दूसरे के कार्यों और जिम्मेदारियों को समझेंगे व मदद करेंगे।
आर्थिक जिम्मेदारी को समझना: बच्चे अक्सर घर की आर्थिक स्थिति से अनजान रहते हैं। यही वजह है कि बच्चे पेरेंट्स से महंगी से महंगी चीजें मांगते हैं और न मिलने पर जिद्द करते हैं। रिवर्स पेरेंटिंग में बच्चे पेरेंट्स की आर्थिक जिम्मेदारियों को समझेंगे और उनकी मदद करेंगे।
पेरेंट्स को मिलेगा क्वालिटी टाइम: घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के चलते पेरेंट्स को एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का समय नहीं मिलता। रिवर्स पेरेंटिंग के चलते बच्चे पेरेंट्स की जिम्मेदारियों को निभा सकते हैं और पेरेंट्स को क्वालिटी टाइम बिताने का मौका दे सकते हैं।
रिवर्स पेरेंटिंग का नुकसान
संघर्षपूर्ण चुनौती: कई बच्चों को रिवर्स पेरेंटिंग संघर्षपूण लग सकती है। दादी-नानी की पेरेंटिंग स्टाइल माता-पिता से भिन्न हो सकती है जिसकी वजह से बच्चे को ये चुनौती संघर्षपूर्ण लग सकती है।
बच्चे को तनाव: बच्चे पर घर और बाहर की जिम्मेदारियों डालना कई बार तनाव का कारण बन सकता है। हो सकता है कि बच्चा अभी जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार न हो। ऐसी स्थिति में बच्चे तनाव महसूस कर सकते हैं।
भावनात्मक प्रभाव: बच्चे पर काम का अत्यधिक भार डालने से वह पेरेंट्स के प्रति कठोर हो सकते हैं। इससे दोनों के बीच भावनात्मक रिश्ता कमजोर हो सकता है।
रिवर्स पेरेंटिंग बच्चों के लिए कितनी कारगर

रिवर्स पेरेंटिंग से बच्चे केवल आत्मनिर्भर नहीं बनते बल्कि वह अनुशासित, स्वतंत्र और जिम्मेदार भी बनते हैं। इस पेरेंटिंग स्टाइल से बच्चों को काबिल बनाने में मदद मिल सकती है। रिवर्स पेरेंटिंग पूरी तरह से कारगर साबित हो सकती है बशर्ते बच्चों को इससे शारीरिक और मानसिक तनाव न हो।
रिवर्स पेरेंटिंग में रखें इस बात का ख्याल
– बच्चों पर जरूरत से ज्यादा काम का बोझ डालने की भूल न करें।
– रिवर्स पेरेंटिंग का मकसद बच्चे को जिम्मेदार बनाना है न कि तनाव देना।
– पेरेंट्स बच्चे के साथ अधिक सख्ती या गलत सलूक न करें। इससे बच्चा नेगेटिव इंसान बन सकता है।
– बच्चे को नए खेल, एक्टिविटी और हॉबीज को सीखने का मौका दें।
– बच्चे को काम और जिम्मेदारियों के बारे में प्यार से समझाएं।
