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ममता का स्पर्श
Global Kids: ध्रुवीकरण की रफ्तार में आज, विश्व वाकई में छोटा और सुलभ हो गया है।
आज सभी अभिभावक चाहते हैं कि वो अपने बच्चों को ऐसी परवरिश दें, जो उन्हे इस वैश्विक युग में जीने योग्य बना दे। वैश्वीकरण का अर्थ यह नहीं है कि आपका बच्चा विश्वभ्रमण के लिए तैयार हो जाए, अपितु इसका अर्थ बच्चे के आत्मविश्वास एवं दृष्टिकोण से है जो उसे विश्व का सामना करने योग्य बनाता है।

खुली-मानसिकता विकसित करें
अभिवावक होने के नाते, ये जरूरी है की आप सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा खुले विचारों का हो और उसके विचार किसी संकुचित मानसिकता से ग्रसित नहीं हों। इस खुली मानसिकता से आशय है कि न सिर्फ वो सभी व्यक्तियों के प्रति सहिष्णु हो बल्कि उनके विचारों, आचरणों, व्यक्तिगत मतभेदों और साथ ही साथ नये तजुर्बों और रचनाओं के साथ भी तालमेल बिठा सके 

आत्मनिर्भरता
वैश्विक दुनिया में एक बच्चे को रमने के लिए, उसे आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा दी जानी चाहिए। ऐसी आत्मनिर्भरता जो उम्र के मुताबिक, जीवन के सभी पहलुओं का सान्निध्य, शारीरिक, सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक आजादी दे।

संवेदनशीलता अंकुरित करें
बच्चों में दूसरों के प्रति सहानुभूति रखने की क्षमता का होना आवश्यक है और अभिभावक होने के नाते ये सुनिश्चित करना कि हम उनमें विश्व स्तर की सांस्कृतिक जागरूकता और संवेदनशीलता अंकुरित करें जो किसी विशेष
समुदाय, धर्म या राष्ट्रीयता तक ही सीमित न हों।

रूढि़वादी विचारधारा से बचें
जरूरी है कि आपके बच्चे न्यायपरक हों और किसी भी प्रकार की अतिवादिता एवं रूढि़वाद से बचने की क्षमता रखते हों।

लचीला और अनुकूलनीय
अपने बच्चे की विश्वस्तरीय परवरिश के लिए जरूरी है कि आप अपने बच्चों में स्वाभाविक लचीलेपन का संचार करें। यदि बच्चे हठी प्रवृत्ति के हुए तो वो लगातार बदलती दुनिया के वातावरण के अनुकूल नहीं ढल पाएंगे।

तकनीकी संगत
आज के युग में तकनीक के बिना जीने की कल्पना भी असंभव है। तकनीकी तरक्की को आत्मसात करने से आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपका बच्चा वैश्वीकरण के प्रति जागरूक हो। यद्यपि, तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता
हानिकारक है परन्तु इसकी उपयोगिता को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वैसे भी तकनीक के पास हम सभी के लिए कुछ न कुछ आवश्यक है। इसलिए उसे तकनीक से दूर न रखें।

जिज्ञासा को सराहें
अभिवावक के रूप में, हमें बच्चों के सवाल पूछने की क्षमता प्रोत्साहित करना चाहिए। हमें उसके सवालों के जवाब देने में संकोच नहीं करना चाहिए। उसके विपरीत हमें उन्हें मुखर होकर बातचीत करने का माहौल देना चाहिए। अधिक
उर्वरकता के साथ विश्व ज्ञान के भण्डारण में उनके खोजी एवं जिज्ञासु मन की मदद करनी चाहिए।

अवसर दें
अभिवावक के रूप में हमें ऐसे माहौल का निर्माण करने की आवश्यकता है, जिसमें खोजबीन के और सीखने के अनेकानेक अवसर मौजूद हों। यह जरूरी है कि आपका बच्चा दुनिया में आत्मनिर्भर होकर जीना सीखने की आवश्यक योग्यता आपका प्रतिभागी बनकर प्राप्त करे।

आत्म-सम्मान की रचना करें
विश्व स्तरीय तेजस्विता के लिए आवश्यक है कि आपका बच्चा आत्म-सम्मान से भरा हो। इस कड़ी में अभिभावक बेहद उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं। वो बच्चों को आशावादिता और सहभागिता का माहौल दे सकते हैं ताकि बच्चा सुरक्षित और आत्मनिर्भर बने।

शक्तिशाली नींव स्थापित करें
इंसान की नींव के प्रथम निर्माता अभिभावक ही होते हैं। जरूरी है कि बाल्यकाल में ही मूल्यपरक जीवन और आस्था का निर्माण हो। बच्चा आसपास से ही सीखता है और उन्हीं सीखों को भविष्य में उपयोग करता है। इसलिए हमें आदर्श के रूप में अपेक्षित व्यवहार कर उनका मार्गदर्शन
करना चाहिए। अगर बच्चे को शक्तिशाली आधार मिलेगा तो वह विश्व से लोहा लेने के लिए आत्मनिर्भर और संकल्पित बनेगा।