Overview: बच्चे की नींद बताती है कि वह इंटेलीजेंट है या नहीं, आप भी जानें ये स्लीप पैटर्न
बच्चों की नींद और उनकी इंटेलिजेंस के बीच गहरा संबंध होता है। पर्याप्त नींद न लेने से बच्चों की एकाग्रता, प्रदर्शन और भावनात्मक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
Child Intelligence and Sleep: नींद बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाती है। यह न केवल उनकी सेहत को बेहतर रखती है, बल्कि उनकी बुद्धिमत्ता और एकाग्रता को भी प्रभावित करती है। भारतीय घरों में अक्सर यह धारणा देखी गई है कि 8-9 घंटे की नींद पर्याप्त है, और इससे ज्यादा सोने वाले बच्चों को आलसी समझा जाता है। लेकिन, विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र के हिसाब से पर्याप्त नींद लेना बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। अगर बच्चा कम सोता है, तो उसका व्यवहार, सीखने की क्षमता और शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है। तो चलिए जानते हैं नींद बच्चे की इंटेलिजेंस और सेहत को कैसे प्रभावित करती है।
बच्चों को कितनी नींद लेना चाहिए

अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन के अनुसार, बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से निम्नलिखित नींद की आवश्यकता होती है:
4 से 12 महीने: 12-16 घंटे
1 से 2 साल: 11-14 घंटे
3 से 5 साल: 10-13 घंटे
6 से 12 साल: 9-12 घंटे
13 से 18 साल: 8-10 घंटे
पर्याप्त नींद न लेने से क्या परेशानियां आ सकती हैं
पर्याप्त नींद न लेने से बच्चों में कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी और खराब शैक्षणिक प्रदर्शन। इसके अलावा बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास भी रुक सकता है और बच्चा अपनी उम्र से कम डेवलप हो सकता है।
बच्चे की नींद क्यों है जरूरी
याददाश्त को मजबूत करना: नींद के दौरान दिमाग दिनभर की जानकारी को व्यवस्थित और संग्रहीत करता है।
दिमाग की सफाई: नींद के समय दिमाग से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं, जो जागने के दौरान जमा हो जाते हैं।
रचनात्मकता और सीखना: नींद दिमाग को नई और पुरानी जानकारी को जोड़ने में मदद करती है, जिससे रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता बढ़ती है।
भावनात्मक संतुलन: कम नींद लेने वाले बच्चे चिंतित, चिड़चिड़े और भावनाओं को नियंत्रित करने में कमजोर हो सकते हैं।
ध्यान और एकाग्रता: नींद की कमी से बच्चे विचलित, आवेगी और कम एकाग्र हो सकते हैं, जिससे कभी-कभी ADHD जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
शैक्षणिक सफलता: पर्याप्त नींद लेने वाले बच्चे आसानी से सीखते हैं और स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
निर्णय लेने की क्षमता: अच्छी नींद बच्चों को सही निर्णय लेने में मदद करती है।
शारीरिक स्वास्थ्य: नींद रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है और बीमारियों से बचाव करती है।
वजन नियंत्रण: कम नींद मोटापे और डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकती है।
कैसे बच्चे होते हैं होशियार

जो बच्चे अपनी उम्र के अनुसार पर्याप्त नींद लेते हैं, वे न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी तेज होते हैं। ऐसे बच्चे स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, खेल और अन्य गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं और भावनात्मक रूप से संतुलित होते हैं। कम नींद लेने वाले बच्चों में दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है, खासकर किशोरावस्था में। पर्याप्त नींद लेने वाले बच्चे अन्य बच्चों की तुलना में अधिक इंटेलिजेंट होते हैं।
बच्चों को बेहतर नींद दिलाने के उपाय
खेल और व्यायाम: बच्चों को दिन में बाहर खेलने और व्यायाम करने का समय दें। इससे उनका शरीर थकता है और नींद अच्छी आती है।
प्यार और ध्यान: सोने से पहले बच्चों को सुरक्षित और प्यार भरा माहौल दें। उनकी चिंताओं को सुनें और उन्हें आश्वस्त करें।
स्वस्थ सोने का माहौल: कमरा साफ, शांत, अंधेरा और आरामदायक तापमान वाला होना चाहिए।
नियमित दिनचर्या: सोने और झपकी का समय निश्चित करें। दांत साफ करना, नहाना और कहानी पढ़ना जैसी गतिविधियां शामिल करें।
इलेक्ट्रॉनिक्स से दूरी: सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल, टीवी या अन्य डिवाइस बंद करें।
